इस्कॉन द्वारका में अक्षय तृतीया एवं चंदन यात्रा उत्सव

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इस्कॉन द्वारका में अक्षय तृतीया एवं चंदन यात्रा उत्सव

-हज़ारों गुणा शुभ फल देने आई पावन अक्षय तृतीया -सोना खरीदने और अन्न दान से होगा मंगल ही मंगल, चंदन यात्रा में हर दिन मिलेगा शीतलता का अहसास

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- इस जीवन की सांसारिक समस्याओं से निपटने और भौतिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए अकसर हम किसी न किसी चौखट पर कदम रखते हैं तो कहीं दान-पुण्य करते हैं, यहाँ तक कि देवताओं की शरण भी लेते हैं। वेदों में भी इसकी संस्तुति की गई है कि अमुक-अमुक इच्छाओं के लिए इन-इन देवताओं के पास जाना चाहिए। अक्षय तृतीया के दिन धन की देवी महालक्ष्मी ने कुबेर देव को असीम संपत्ति प्रदान की थी, जिससे कुबेर जी सभी देवताओं में सबसे धनी और श्रेष्ठ हो गए थे। इस शुभ अवसर पर श्री श्री रुक्मिणी द्वारकाधीश मंदिर इस्कॉन द्वारका दिल्ली में 23 अप्रैल को अक्षय तृतीया उत्सव खूब धूमधाम से मनाया जा रहा है।
                    बहुत शुभ दिन है वैशाख शुक्ल की अक्षय तृतीया जिसमें आज के दिन कोई भी शुभ-मंगल कार्य करने पर शुभ कर्म का नाश नहीं होता। चाहे आप सोना खरीदकर दान करें या अन्न दान करें। इसीलिए इस दिन को स्वर्ण दिन और कुबेर का दिन भी कहते हैं। इस्कॉन द्वारका ने उपहार में देने के लिए सोने व चाँदी के सिक्के खरीदने की व्यवस्था भी की है, जिसे आप प्रातः 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक व शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक ले सकते हैं। यह सिक्का आप श्री श्री रुक्मिणी द्वारकाधीश के चरणों में अर्पण कर जन्मों-जन्मों के लिए अक्षय लाभ प्राप्त कर सकते हैं।


                     मंदिर में अक्षय तृतीया उत्सव के प्रबंधक बताते हैं कि भक्तों के लिए दिवाली की तरह धूमधाम से मनाया जाने वाला यह त्योहार जीवन भर की अनेक खुशियाँ और वैभव प्रदान करता है। इसलिए सब इसे उमंग और उत्साह के साथ मनाते हैं। यह खुशी इसलिए भी बढ़ जाती है कि अक्षय तृतीया आध्यात्मिक दृष्टि से भी एक विशेष तिथि है और पुराणों में इस दिन की अनेक महिमा बताई गई है। इस दिन माँ गंगा ब्रह्मलोक से इस धरतीलोक पर प्रकट हुई थीं। त्रेता युग भी इसी दिन प्रारंभ हुआ। बद्रीनाथ धाम के द्वार भी इसी दिन खुलते हैं। पांडवों के अज्ञातवास के दौरान इसी दिन द्रौपदी को सूर्य देवता से कभी न क्षय होने वाला अक्षय पात्र मिला। आज के दिन पितृं को तृपण करने की भी महिमा बताई गई है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की भी महिमा है। घर पर भी नदियों का स्मरण करके स्नान किया जा सकता है। इस दिन गौ माता की सेवा भी की जाती है। व्यासदेव ने महाभारत की रचना भी गणेश जी के माध्यम से अक्षय तृतीया के दिन ही की थी। महाभारत में ही भगवद्गीता के 700 श्लोकों का वर्णन है। इसीलिए कहा जाता है कि ‘गीता’ सोने से भी बेहतर उपहार है। अतः आप गीता खरीदें और उपहार में दें।
                  अक्षय तृतीया भगवान कृष्ण और सुदामा के मिलन का दिन भी है। इस दिन ही गरीब सुदामा पत्नी के कहने पर तीन मुट्ठी पोहा लेकर अपने मित्र द्वारकाधीश से मिलने गए। भगवान ने प्रेम स्वरूप उसे ग्रहण किया और अनन्य भेंट प्रदान कर उनका असीम आभार प्रकट किया।
                  अक्षय तृतीया के दिन अन्न की देवी माँ अन्नपूर्णा का जन्म हुआ था। पुराणों में लिखा है कि यदि हम आज के दिन अन्न दान करते हैं तो हमारी भक्ति बढ़ती है, आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। इस्कॉन द्वारका की ‘फूड फॉर लाइफ’ श्रृंखला में कृष्ण भक्तों के लिए तुला दान अर्थात अपने शरीर के वजन के अनुसार अनाज का दान करें और जीवन भर की प्रसन्नता पाएँ।

                    गौरतलब है कि पुरी की जगन्नाथ यात्रा के रथ के निर्माण की शुरुआत भी इसी दिन से होती है। इस दिन से भगवान कृष्ण के शरीर पर चंदन का लेप लगाया जाता है जिसे चंदन यात्रा के नाम से जाना जाता है। यह यात्रा 23 अप्रैल शाम 4.30 बजे से आरंभ होगी, जो 13 मई तक चलेगी।इस अवसर पर शाम को 4 बजे से ही एक चंदन पेस्ट प्रतियोगिता ‘मेरा चंदन उसके चंदन से कम कैसे’ भी आयोजित की जाएगी। तुला दान, अक्षय पात्र व सेल्फी प्वाइंट जैसे मनोरंजक कार्यक्रमों के बीच भक्त इस वीकेंड का सही आनंद ले सकेंगे।
                   आप भी परिवार सहित इस्कॉन द्वारका में आएँ, भक्तों का संग पाएँ और दो दिवसीय उत्सव में भाग लेकर आनंद मनाएँ। विशेष पोहा प्रसादम का लाभ उठाएँ और घर ले जाने के लिए भगवान कृष्ण का पसंदीदा पोहा खरीदना न भूलें।

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