इंटर्नशिप स्टाइपेंड को लेकर चरक संस्थान के ट्रेनी डॉक्टर हड़ताल पर बैठे

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May 18, 2026

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इंटर्नशिप स्टाइपेंड को लेकर चरक संस्थान के ट्रेनी डॉक्टर हड़ताल पर बैठे

-इंटर्न ने स्टाईपेंड को लेकर दिल्ली सरकार पर लगाये भेदभाव के आरोप, कहा- चौ. ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान के ट्रेनी डॉक्टरों का स्टाईपेंड सबसे कम, नही सुन रही सरकार

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नजफगढ़/शिव कुमार यादव/- दिल्ली के खेड़ा डाबर में स्थित एशिया के सबसे बड़े एकमात्र चौ. ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान के पिछले चार दिन से हड़ताल पर बैठे ट्रेनी डॉक्टरों ने दिल्ली सरकार व अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाये हैं। उनका कहना है कि दिल्ली में पिछले चार सालों से दिल्ली के सभी मैडिकल कॉलेजों में सबसे कम उनका इंटर्नशिप स्टाइपेंड है। उन्होने संस्थान के प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से अपनी मांग दिल्ली सरकार तक पंहुचाने की बहुत कोशिश की लेकिन दिल्ली सरकार ने उनकी एक नही सुनी जिसकारण उन्होने अब हड़ताल का सहारा लिया है। कई छात्रों ने तो कई बार आवेदन पत्रों और आरटीआई के माध्यम से भी जानकारी लेनी चाही लेकिन फिर भी उन्हे कोई सकारात्मक जवाब नही मिला। इंटर्न की मांग है कि सरकार उनका स्टाईपेंड तुरंत बढ़ाये वर्ना हड़ताल जारी रहेगी।


                 ट्रेनी डॉक्टरों का कहना है कि कोविड के दौरान इंटर्न दो साल से निःस्वार्थ होकर काम करते रहे पर संस्थान प्रशासन और दिल्ली सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया। एक बार फिर से जून 2022 में इंटर्न(हम) ने प्रशासन से पूछा कि बाकी कॉलेज 26,300/- या 23,500/- रूपये इंटर्न को दे रहे है तो हमारा स्टाइपेंड 15,120/- रूपये प्रति मास (न्यूनतम) क्यों है? तो हमें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कई आवेदन पत्र अधिसूचनाओं के साथ बहुत से सरकारी प्राधिकारियों के पास हैं। किन्तु हमे कोई जवाब नही दे रहा है। हमने दिल्ली सरकार के विभिन्न अफसरों को ई-मेल किया जिनका भी कोई जवाब नहीं मिला। अंत में हमने फिर हड़ताल पर जाने का फैसला किया। संस्थान प्रशासन से हमें जवाब मिला है कि हमने फाइल आगे मंत्रालय में भेज दी है, अब हमारे हाथ में कुछ नहीं है, अब आपको आगे की जानकारी दिल्ली सचिवालय से लेनी होगी।
               इंटर्नस का कहना है कि उन्हे जो पैसा दिया जाता है वह दूसरे अस्पतालों के मुकाबले बहुत कम है। दूसरे अस्पतालों में 15000 से बढ़कर  25000 कर दिया गया है लेकिन खेड़ा डाबर अस्पताल में अभी भी हमें 15000 ही दिया जाता है।  पिछले कई सालों से हम अपनी समस्या अस्पताल प्रशासन के सामने रख रहे हैं लेकिन हमें सिर्फ भरोसा दिया जाता है और हमारा मुंह बंद कर दिया जाता है। सरकार तक हमारी आवाज कोई नहीं पहुंचाता। अस्पताल प्रशासन का तो यह भी कहना है कि ट्रेनिंग के दौरान जो भी आपको मिलता है वह कोई सैलरी नहीं है यह तो सिर्फ आपके मात्र एक खर्च करने के लिए हैं।
              इस संबंध में ट्रेनी डॉक्टर्स कौशल सारस्वत, डाक्टर शुक्ला व डाक्टर सागर का कहना है कि हम कोरोना काल में भी भरपूर लोगों की सेवा करते रहे लेकिन हमारी समस्याओं की तरफ  प्रशासन आंखें बंद करके बैठा हुआ है। हम ट्रेनिंग के दौरान किन किन समस्याओं से गुजरते है यह समझने वाला कोई नहीं है। आज हम 4 दिन से हड़ताल पर बैठे हैं। प्रशासन ने हमारी कोई सहायता नहीं की है। यहां तक की हमे पीने तक का पानी नहीं दिया और ना ही हमारे पास कोई लाइट की व्यवस्था है। हम लोग दोपहर गर्मी में यही गेट पर बैठे हैं लेकिन हमारी इस समस्या को सुनने की बजाय सब अपने ही कमरों में बैठे हैं।
           इस संबंध में जब अस्पताल की निदेशिका डा. विदुला गुज्जरवार से बात की तो उन्होने बताया कि हमने इनकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाया है। हम डिप्टी सीएम से मिले थे और उन्हें इनकी समस्याओं का पूरा विवरण दिया है। अब हमारे हाथ में कुछ नही है जो भी करना है सरकार को करना है। उन्होने कहा कि उन्हे उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्या को समझेगी और जल्द कोई फैसला लेगी।

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