मानसी शर्मा /- छठ पूजा के दूसरे दिन की शुरुआत खरना से होती है। छठ के चारों दिन का अलग-अलग महत्व होता है। 6नवंबर बुधवार के दिन खरना मनाया जाएगा। छठ के महापर्व में खरना का विशेष महत्व हैं, क्योंकि, इस दिन छठ का विशेष प्रसाद बनाया जाता है। आइए जानते हैं खरना व्रत के नियम और महत्व।
क्या होता है खरना?
इस बार छठ पूजा के दूसरे दिन 6नवंबर, बुधवार को है। इसी दिन शाम से लगभग 36घंटे का निर्जला व्रत का आरंभ हो जाता है। इस दिन से रोटी, गुड़ की खीर और फल का भोग लगाया जाता है। खरना वाले दिन भगवान का विशेष प्रसाद व्रत रखने वाले ही तैयार करते हैं और शाम के समय भगवान को अर्पित करने के बाद ही वह उसे ग्रहण करते हैं। खरना से जो उपवास आरंभ होता है वह सप्तमी तिथि के दिन अर्घ्य देने के साथ ही समाप्त होता है।
खरना के नियम
इस दिन मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर बनाई जाती है। इसके लिए पीतल के बर्तन का प्रयोग किया जाता है। यह खीर बहुत ही शुद्धता और पवित्रता के साथ बनाई जाती है इसलिए मिट्टी के चूल्हे का प्रयोग किया जाता है। खीर के अलावा गुड़ की अन्य मिठाई, ठेकुआ और लड्डू आदि भी बनाए जाते हैं।
खरना की यह खास खीर सिर्फ और सिर्फ व्रती इंसान ही बनाता है। पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम के समय व्रती व्यक्ति इसी गुड़ की खीर का सेवन करते हैं। शाम के समय व्रत रखने वाला व्यक्ति कमरा बंद करके ही खीर का सेवन करता है। इसके बाद पूरा परिवार व्रती व्यक्ति से आशीर्वाद लेता है। साथ ही सुहागन महिलाएं व्रती महिलाओं से सिंदूर लगवाती हैं।


More Stories
दुष्यंत चौटाला बोले- “सीआईए ने घरों में घुसकर की अभद्रता
राहुल गांधी, बोले- “यह महिलाओं को अधिकार देने का नहीं
नासिक की आईटी कंपनी में गंभीर आरोपों की जांच तेज
20 लाख की हेरोइन के साथ महिला तस्कर और सप्लायर गिरफ्तार
फूड सर्विस और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में बदलाव की नई पहल
AKSHAYA TRITIYA 2026: अक्षय तृतीया पर आत्म विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा के लिए ये 5 वस्तु खरीदना है शुभ!