अभी घर नही जायेंगे किसान

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

January 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
January 20, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-अभी किसानों के कई मसले हल होने बाकी -लखनऊ में किसान आंदोलन को खत्म करने को लेकर हुई महापंचायत में बोले भाकियू के नेता राकेश टिकैत

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/लखनऊ/शिव कुमार यादव/- सोमवार को लखनऊ में संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि अभी तीनों कृषि कानून ही निरस्त हुए है लेकिन अभी किसानों के कई मसले हल होने बाकी है। जिसे देखते हुए अभी किसान घर नही जायेंगे। बल्कि सरकार से बात की इन मसलों का हल निकालेंगे। साथ उन्होने आरोप लगाया कि इन क़ानूनों को रद्द करने के एलान के बाद अब सरकार किसानों के बाक़ी बचे मसले हल करने के लिए उनसे बात नहीं करना चाहती।
                  राकेश टिकैत लखनऊ के कांशीराम ईको पार्क में आयोजित किसान महापंचायत में बोल रहे थे। जहां बड़ी संख्या में किसान इकट्ठा हुए हैं। ’एमएसपी अधिकार महापंचायत’ नाम की इस रैली का आयोजन ’संयुक्त किसान मोर्चा’ ने किया है। राकेश टिकैत ने ’एमएसपी अधिकार महापंचायत’ नाम के इस आयोजन में सरकार से मांग की है कि वो उन्हें साफ़ बताए कि क्या तीनों क़ानून सही अर्थों में रद्द हो चुके हैं। उन्होंने ये भी मांग की कि सरकार अन्य मसलों पर भी उनके संगठन से बात शुरू करे ताकि किसान अपने घर जा सकें।
                   इस दौरान राकेश टिकैत ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की कई मांगें हैं। इनमें विभिन्न फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को क़ानूनी दर्जा देने की मांग भी शामिल है। अपनी अन्य मांगों के बारे में कहा कि सरकार गांवों और मंडियों की जमीनें दूसरों को बेच रही है जिस पर रोक लगनी चाहिए। साथ ही 10 साल पुराने ट्रैक्टर चलाने पर रोक लगाने वाले क़ानून पर भी रोक लगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे कंपनियां आबाद और किसान बर्बाद हो रहे हैं।
                श्री टिकैत ने किसानों की रैली को शक्ति प्रदर्शन बताने वाले आरोपों को ग़लत बताया है। उल्होंने कहा कि जब किसानों की मीटिंग बुलाई तो वो लोग आए हैं जो परेशान हैं। ये कोई शक्ति प्रदर्शन नहीं है। उन्होंने उस आरोप को भी ग़लत बताया है कि कृषि क़ानून वापस ले लेने के ऐलान के बाद अब एक-एक करके कई मांगें इसलिए सामने आ रही हैं ताकि आंदोलन को लंबा खींचा जाए। राकेश टिकैत ने कहा कि कृषि क़ानूनों पर भले सरकार ने एलान किया है पर उनकी अन्य मांगों पर अभी कुछ नहीं कहा है। हम इसके लिए अगले छह माह और इंतज़ार कर सकते हैं। साथ ही ये भी कहा कि सरकार के दरवाज़े पांच साल में केवल कुछ महीने ही खुले होते हैं और अभी ऐसा ही समय है. इसलिए हम अपनी मांगें लेकर सरकार के सामने आए हैं।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox