नई शिक्षा नीति से शिक्षा के क्षेत्र में होंगे अहम बदलाव, रोजगार परक होगा शिक्षा का मूल ढांचा

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नई शिक्षा नीति से शिक्षा के क्षेत्र में होंगे अहम बदलाव, रोजगार परक होगा शिक्षा का मूल ढांचा

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- विश्व में बदलते परिवेश के चलते देश में शैक्षणिक माहौल, शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार परक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने साढे तीन दशक बाद शिक्षा नीति के नए मसौदे को मंजूरी दे दी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति ने पिछले वर्ष ही मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को शिक्षा नीति का मसौदा सौंपा था। इस मसौदे पर दो लाख से ज्यादा सुझाव आए थे। इन सुझावों की समीक्षा के बाद बनी नई नीति को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।
केंद्रीय कैबिनेट से गुरुवार को मंजूर राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पूरे शैक्षणिक ढांचे में व्यापक बदलाव किया गया है। अब कॉलेज में स्नातक पाठ्यक्रम में दाखिला लेने के बाद तीन साल तक पढ़ाई के बाद ही डिग्री मिलने की अनिवार्यता खत्म हो गई। छात्र तीन या चार साल से पहले कभी भी कॉलेज छोड़ सकते हैं। बीच में पढ़ाई छोड़ने पर ड्रापआउट का धब्बा नहीं लगेगा। इसके तहत तीन वर्षीय डिग्री प्रोग्राम एक साल पूरा करने पर प्रमाण पत्र, दो साल पढ़ाई पर डिप्लोमा और तीन साल पूरे करने पर डिग्री मिलेगी। जबकि चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम बहुविषयक स्नातक कार्यक्रम होगा।
भारत के शिक्षण संस्थानों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में शामिल करने के लिए इंटरनेशनल रैकिंग के टॉप सौ संस्थानों के कैंपस भारत में खोलने की अनुमति दी जाएगी। विदेशी शिक्षकों व छात्रों को भारत से जोड़ा जाएगा। नालंदा, तक्षशिला की तर्ज पर भारतीय प्राचीन विश्वविद्यालयों को आगे बढ़ाया जाएगा। बहुविषयक शिक्षण वाली विवि और कॉलेज खोले जाएं। साहित्य, भाषा, खेल, योग, आयुर्वेद, प्राचीन, मध्यकालीन इतिहास और संगीत पर फोकस होगा।
विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों का काम अकादमिक और रिसर्च पर फोकस पर रहेगा। परीक्षा से लेकर दाखिले तक का काम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी करेगी। अब एक विषय की जगह बहुविषयक डिग्री प्रोग्राम शुरू होंगे। जिन कोर्स में छात्रों की संख्या कम है या पुराने हो चुके हैं, उनकी जगह पर नए कोर्स शुरू होंगे। नालंदा-तक्षशिला की तर्ज पर भारतीय विश्वविद्यालयों को बहुविषयक बनाया जाएगा। यानी कानून, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी आदि विवि या कॉलेजों में विभिन्न विषयों पर आधारित पढ़ाई शुरू की जाएगी। उच्च शिक्षण संस्थान दो प्रकार के होंगे। हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में रिसर्च और अकादमिक पढ़ाई पर फोकस होगा। जबकि हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन कलस्टर में छोटे-छोटे कॉलेज मिलकर बड़ा कॉलेज या विश्वविद्यालय बना सकेंगे।
लिबरल एजुकेशन में देश की 64 कलाओं को बढ़ावा मिलेगा। विभिन्न विषयों में दक्षता और क्षमता के आधार पर डिग्री की पढ़ाई होगी। इसका मतलब ज्ञान के साथ कौशल विकसित करना है, जिससे रोजगार के मौके मिलें। स्नातक तक कोर्स 3-4 वर्ष का होगा और कभी भी प्रवेश और पढ़ाई छोड़ने का विकल्प सर्टिफिकेट के साथ मिलेगा। शिक्षा सुधार योजनाओं में हिंदू मठ, आश्रम, गुरुद्वारा, ईसाई मिशनरी संस्थान, इस्लामिक ट्रस्ट, बौद्ध और जैन समुदाय को शामिल का प्रस्ताव है। इसका मकसद विभिन्न वर्गों को जोड़ना और वैचारिक मतभेद दूर करना है। स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्त्रस्म में बिजनेस व इंडस्ट्री के सुझाव पर बदलाव होगा, ताकि रोजगार पर फोकस किया जा सके। इसके अलावा पूर्व छात्र और स्थानीय समुदाय से सुरक्षा, सफाई पर मदद ली जाएगी।
शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर। ऑनलाइन शिक्षा के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेट तैयार होगा, वर्चुअल लैब और डिजिटल लाइब्रेरी बनेंगी। सभी प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाएं नेशनल टेस्टिंग एजेंसी कराएगी। कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर जोर रहेगा। भारतीय समेत शास्त्रीय भाषाओं में कोर्स उपलब्ध करने पर जोर। संस्कृत की पढ़ाई करवाने पर सरकार आर्थिक रूप से मदद करेगी।

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