हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर गुटबाजी तेज

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December 10, 2022

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हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर गुटबाजी तेज

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/चंडीगढ़/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- हरियाणा में भाजपा आलाकमान के लिए प्रदेश अध्यक्ष का चयन टेढ़ी खीर बनता जा रहा है। इसमें सबसे बड़ी बाधा प्रदेश भाजपा की आपसी फूट को माना जा रहा है। हालांकि प्रदेश में पहले भाजपा की सरकार गठबंधन की बैसाखियों के सहारे चल रही है लेकिन फिर भी भाजपा में अंदरूनी फूट अब धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रही है। हरियाणा में भाजपा पूरी तरह से दो धड़ों में बंटी दिखाई दे रही है जिसके एक गुट में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटटर, प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, करनाल के सांसद संजय भाटिया, कुरूक्षेत्र के सांसद नायब सैनी, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, संगठन मंत्री सुरेश भट्ट व पूर्व मंत्री कृष्ण बेदी शामिल है। वहीं दूसरे गुट में पूर्व मंत्री व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के दावे दार कैप्टन अभिमन्यु, औमप्रकाश धनखड़, रामविलास शर्मा, सांसद व केंद्रीय मंत्री राव इन्द्रजीत सिहं व सांसद धर्मवीर को माना जा रहा है। साथ ही मौजूदा मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री अनिल विज मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं तो दो वरिष्ठ नेता शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुज्जर और स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता इस प्रकरण में तटस्थ माने जा रहे हैं। जिसे देखते हुए लगता है कि हरियाणा में प्रदेश अध्यक्ष पद का चुनाव किसी महाभारत से कम नही रह गया है।
यहां बता दें कि दिन प्रतिदिन मुख्यमंत्री के खिलाफ सांसदों व विधायकों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। ऐसे भी कई विधायक है जो दौबारा विधानसभा में चुनकर आये है लेकिन उन्हे मंत्रीमंडल में जगह नही मिलने से वो नाराज दिखाई दे रहे हैं और उन्हे जब भी मौका मिलता है वह अपनी नाराजगी जताते दिखाई देते है। अध्यक्ष पद को लेकर जहां मुख्यमंत्री वर्तमान अध्यक्ष सुभाष बराला की ही पैरवी कर रहे है वहीं जाट लाॅबी भी अब पूरी तरह से सक्रिय दिखाई दे रही है और कुछ जाट नेताओं ने तो यह ऐलान भी कर दिया है कि हरियाणा में भाजपा अध्यक्ष जाट ही होगा। हालांकि इस घांेषणा से गैर जाट नेता व विधायक सतर्क हो गये है जिससे विरोधी खेमे में बिखराव की स्थिति भी बन सकती है।
यहां बता दें कि पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु हमेशा ही भाजपा का एक दमदार चेहरा रहे है। चाहे चुनाव में उन्हे भले ही हार का सामना करना पड़ा हो लेकिन अपनी साफ छवि के चलते आज भी भाजपा में उनकी पूरी पकड़ बताई जाती है। मुख्यमंत्री से नाराज कुछ विधायक व सांसद भी इस समय कैप्टन के साथ जुड़े हुए है हालांकि कैप्टन अभिमन्यु का कहना है कि भाजपा में किसी तरह की कोई फूट या धड़ेबाजी नही है। यह एक चुनाव है जिसमें कोई भी अपनी उम्मीदवारी कर सकता है। उन्होने हमेशा आलाकमान व पार्टी के दिशानिर्देंशों का पालन किया है। वहीं वर्तमान अध्यक्ष अभी तक दो बार अध्यक्ष बने है एक बार निर्वाचित व एक बार मनोनित। जिसे देखतें हुए यह कयास लगाये जा रहे है कि वह एक बार और अध्यक्ष बन सकते है क्योंकि पार्टी नियमों के अनुसार कोई भी निर्वाचित उम्मीदवार तीसरी बार अध्यक्ष नही बन सकता है जबकि वह एक बार ही निर्वाचित अध्यक्ष बने है। अगर पार्टी ने चाहा तो वह एक बार फिर अध्यक्ष बन सकते है। वैसे भी सुभाष बराला अभी तक निर्विवाद अध्यक्ष रहे है।

बरोदा चुनाव का भी असर दिखेगा अध्यक्ष पद पर
मुख्यमंत्री का विरोधी खेमा इन दिनो जोर शोर से मुख्यमंत्री की मुखाल्फत में लगा हुआ है। विरोधियों का मानना है कि इस सीट पर कैप्टन अभिमन्यु भाजपा के उम्मीदवार होगें और वो जैसे-तैसे करके सीट भी निकाल ले जायेगे। उन्हे प्रदेश में जाट भाजपा कार्य कर्ता व समर्थक कांग्रेस के भुपेन्द्र सिंह हुड्डा का मजबूत प्रतिद्वंदी मानकर चल रहे है और उनके समर्थकों का कहना है कि कैप्टन ही कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे सकते है। अगर कैप्टन चुनाव जीत गये तो उनके मंत्री बनने में भी कोई परेशानी नही होगी। जिसके लिए उनके समर्थक व जाट लाॅबी अभी से राजनीति गरमाने में जुट गये हैं। और अगर कैप्टन अभिमन्यु प्रदेश के अध्यक्ष बन गये तो समर्थकों का मानना है कि जल्द ही वह प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बन जायेंगे।
हालांकि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए और भी कई नाम सामने आ रहे है जिनमें पानीपत ग्रामीण से दूसरी बार विधायक बने महिपाल ढाडा अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हैं, वे हरियाणा में युवा मोर्चा और किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं तथा केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी उनके पक्षधर हैं। माना यह जा रहा है कि भाजपा जाट को हटाकर जाट को अध्यक्ष बनाएगी या किसी गैर जाट को भी आगे लेकर चलेगी, यह भी अभी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता। गैर जाटों में नायब सैनी, रमेश चंद्र कौशिक और कमल गुप्ता विधायक भी उम्मीदवार बताए गए हैं। अब देखने की बात यह है कि राष्ट्रीय दलों में किसकी कब पर्ची निकल जाए ,कहा नहीं जा सकता। यह तो अब आने वाला समय ही बतायेगा की हरियाणा में भाजपा का अध्यक्ष कौन होगा। यहां यह भी बता दे कि 14 जून से भाजपा ने प्रदेश में वर्चुअल रैली की घोषणा कर दी है जिसके असर भाजपा अध्यक्ष पद के चुनाव पर भी पड़ना लाजमी है जिसे देखते हुए दोनो गुट अपना-अपना जोर लगाने में जुट गये है। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर दिल्ली में होने वाली बैठक दो बार टल चुकी है। लेकिन माना यह भी जा रहा है कि आलाकमान सबसे ज्यादा तवज्जों मुख्यमंत्री को ही देगा और मुख्यमंत्री जिसे चाहेंगे वही अध्यक्ष बनेगा। वर्ना हरियाणा में भाजपा का बिखराव तय हो जायेगा और गुटबाजी खुलकर सामने आ जायेगी। जबकि विपक्ष भी यही चाह रहा है और इसमें आग में घी डालने का काम कर रहा है जिसे आलाकमान समझ चुका है।

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