इजराइल के बाद अब इटली व नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने किया कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा

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December 2, 2022

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इजराइल के बाद अब इटली व नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने किया कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/देश-विदेश/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- कोरोना वायरस से पार पाने और उसका नामोनिशान मिटाने के लिए यूं तो पूरी दुनिया के वैज्ञानिक कोरोना की वैक्सीन व दवा बनाने के काम में जुटे है लेकिन अभी तक पूरी सफलता किसी को नही मिली है। फिर भी चीन व इजरायल के दावों के बाद अब इटली व नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने कोविड-19 वैक्सीन व दवा बनाने का दावा किया है। इटली का तो यहां तक कहना है कि वह एक मात्र ऐसा देश है जिसने इस वैक्सीन को सबसे पहले तैयार किया है। जो इंसानों पर भी असरदार है। यह रिपोर्ट रोम के इंफेक्शियस डिजीज स्पैलनजानी हॉस्पिटल में हुए एक परीक्षण पर आधारित होने का दावा किया है। हालांकि भारत भी इस दवा के निर्माण को लेकर पीछे नही है और भारत ने भी कोरोना की वैक्सीन व दवा का काम अंतिम चरण में होने का दावा किया है।
                                        इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस वैक्सीन ने चूहों के शरीर में एंटीबॉडीज जेनरेट की है जिसका असर इंसान की कोशिकाओं पर भी होता है. दवा बनाने वाली एक फर्म ताकीज के सीईओ लिगी ऑरिसिशियो ने इटली की एक न्यूज एजेंसी के हवाले से कहा, यह इटली में वैक्सीन का परीक्षण करने वाले उम्मीदवारों का सबसे एडवांस स्टेज है। वैक्सीन का परीक्षण करने के लिए वैज्ञानिकों ने चूहों का इस्तेमाल किया था। सिंगल वैक्सीनेशन के बाद उन्होंने चूहों के शरीर में एंटीबॉडीज को विकसित होते देखा जो मानव कोशिकाओं को प्रभावित करने वाले कोरोनो वायरस को ब्लॉक कर सकता है। ऑरिसिशियो को उम्मीद है कि गर्मियों के बाद वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल शुरू हो जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान पांच वैक्सीन कैंडिडेट्स ने बड़ी संख्या में एंटीबॉडी जेनरेट किए, जिसके बाद शोधकर्ताओं ने सर्वश्रेष्ठ परिणामों के साथ दो का चयन किया. ये सभी वैक्सीन डीएनए प्रोटीन स्पाइक के जेनेटिक मैटीरियल पर आधारित हैं।
                            शोधकर्ताओं ने रिपोर्ट में कहा, इम्युनिटी जेनरेट करने वाले अब तक हमारे पांच वैक्सीन कैंडिडेट्स का कोरोना वायरस पर असर हुआ है. वैक्सीन के दूसरे प्रयोग में हमें ज्यादा बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है। ताकीज के डॉ. एमानुएल मारा का कहना है कि ये वैक्सीन कैंडिडेट्स क्रमागत रूप से किसी भी तरह के कोरोना वायरस पर असर दिखा सकते हैं। बता दें कि इटली दुनिया का तीसरा ऐसा देश है जहां संक्रमितों की संख्या सबसे ज्यादा है। यहां 2 लाख से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं जिनमें से 29,000 से ज्यादा की मौत हो चुकी है।

वही नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने भी कोविड-19 की एंटीबॉडी बनाने का दावा किया है। इजरायल व नीदरलैंड के वैज्ञानिकों के अलग-अलग अध्ययनों का दावा है कि ये एंटीबॉडी कोरोना वायरस के संक्रमण को खत्म कर सकता है। वैज्ञानिकों के नेतृत्व वाली एक डच टीम ने कहा कि वो एक लैब में संक्रमण को रोकने में कामयाब रहे। उसी समय, इजराइल के रक्षा मंत्री नफतली बेन्नेट ने दावा किया है कि मुख्य जीवविज्ञानी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस का एंटीबॉडी विकसित करने में ‘अहम उपलब्धि’ हासिल की है, हालांकि एंटीबॉडी का अभी तक इंसानों पर परीक्षण नहीं किया गया। दोनों अध्ययन, जो अभी शुरुआती चरण में हैं, इससे कोरोनो वायरस के कारण उभरी महामारी कोविड-19 को रोकने और खत्म करने में मदद मिल सकती है।
                               नीदरलैंड में यूट्रेक्ट यूनिवर्सिटी के बेरेंड-जान बॉश ने कहा, ष्इस तरह के न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी में संक्रमित व्यक्ति में संक्रमण को बदलने, वायरस को साफ करने या वायरस से ग्रसित एक असंक्रमित व्यक्ति को बचाने की क्षमता होती है। यूट्रेक्ट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इसे ष्कोविड -19 के इलाज या रोकथाम के लिए पूरी तरह से मानव एंटीबॉडी विकसित करने की दिशा में एक शुरुआती कदम बताया है। नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में पब्लिश एक रिसर्च के मुताबिक, 2002-04 सार्स महामारी का मुकाबला करने के लिए विकसित एंटीबॉडी को देखा गया। जो एक कोरोना वायरस के कारण भी हुआ. इसमें कहा गया है कि यह एक ऐसी एंटीबॉडी की पहचान करता है जो वर्तमान वायरस के खिलाफ प्रभावी था, जिसे आधिकारिक तौर पर सार्स-कोव-2 कहा जाता है।

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