पीएचडी छात्र से ठगी, दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगों के बड़े गिरोह का किया पर्दाफाश!

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पीएचडी छात्र से ठगी, दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगों के बड़े गिरोह का किया पर्दाफाश!

-फर्जी बैंक खाते खोलकर करोड़ों की साइबर ठगी को देते थे अंजाम -दिल्ली यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र से शेयर मार्केट में मुनाफे का झांसा देकर 1.66 लाख रुपये की ठगी -बंधन बैंक का कर्मचारी निकला गिरोह का मास्टरमाइंड; तीन आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  दिल्ली पुलिस की साइबर थाना, नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की टीम ने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) उपलब्ध कराने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड और कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में एक निजी बैंक का कर्मचारी भी शामिल है, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को कमीशन पर उपलब्ध कराता था।

पीएचडी छात्र से शेयर मार्केट में मुनाफे का झांसा देकर ठगी
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता अखिल सिंह, जो दिल्ली विश्वविद्यालय में पीएचडी के छात्र हैं और बुराड़ी स्थित हिमगिरी एन्क्लेव के निवासी हैं, ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में उन्होंने बताया कि वे एक टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े थे, जहां शेयर मार्केट में निवेश कर भारी मुनाफा कमाने का दावा किया गया था। एक लिंक पर क्लिक करने के बाद उनकी बातचीत व्हाट्सएप के माध्यम से ठगों से हुई। शुरुआत में उन्होंने 5,000 रुपये निवेश किए, जिसके बाद उन्हें 60 हजार रुपये का लाभ होने का झांसा दिया गया। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, वेरिफिकेशन चार्ज और अन्य शुल्क के नाम पर लगातार पैसे जमा कराए गए। अंततः उन्होंने कुल 1,66,467 रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन न तो मुनाफा मिला और न ही रकम वापस हुई। बाद में ठगों ने उनका नंबर ब्लॉक कर दिया।

इस संबंध में साइबर थाना नॉर्थ में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।

तकनीकी जांच से खुला बड़ा नेटवर्क
जांच के दौरान पुलिस ने करीब 100 मोबाइल नंबरों और आईएमईआई का तकनीकी विश्लेषण किया तथा ठगी की रकम के बैंक खातों का मनी ट्रेल खंगाला। जांच में पता चला कि ठगी की राशि का एक हिस्सा सिटी यूनियन बैंक के खाते में जमा हुआ था, जो एम/एस एनएस इम्पेक्स नामक फर्जी फर्म के नाम पर खोला गया था।

लगातार तकनीकी निगरानी के दौरान पुलिस एक मोबाइल नंबर तक पहुंची, जो कई बैंक खातों से जुड़ा हुआ था। इसी आधार पर पुलिस ने बुद्ध विहार और रोहिणी में छापेमारी कर दो आरोपियों चिराग (22) और अमर यादव (48) को गिरफ्तार किया। उनकी निशानदेही पर बाद में मोती नगर से गिरोह के सरगना नितेश कुमार (28) को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

बंधन बैंक का कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड
पूछताछ में खुलासा हुआ कि नितेश कुमार, जो बंधन बैंक में कस्टमर रिलेशनशिप ऑफिसर के पद पर कार्यरत था, फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक खाते खुलवाता था। वह अपने सहयोगी अमर यादव की मदद से गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसे का लालच देकर उनके नाम पर सेविंग और करंट खाते खुलवाता था। इसके बाद बैंक खाते, डेबिट कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड साइबर अपराधियों को कमीशन पर बेच दिए जाते थे।

गिरोह ने अलग-अलग स्थानों पर किराये के कार्यालय खोलकर करीब 22 फर्जी बैंक खाते विभिन्न बैंकों में खुलवाए थे, जिनका इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।

ऐसे करते थे साइबर ठगी में मदद
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पहले किराये पर दुकान लेकर फर्जी कंपनियां तैयार करते थे। इसके बाद मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कुछ हजार रुपये का लालच देकर उनके दस्तावेजों से बैंक खाते खुलवाते थे। खाते खुलने के बाद उनकी किट और सिम कार्ड साइबर अपराधियों को सौंप दिए जाते थे, जिससे ठगी की रकम आसानी से इधर-उधर की जा सके।

बरामदगी
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन, 14 सिम कार्ड, 2 पासबुक, 6 चेकबुक, 7 डेबिट कार्ड, एक पेटीएम स्वैपिंग मशीन तथा कई अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।

जांच जारी
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान तथा देशभर में इन फर्जी बैंक खातों के जरिए की गई अन्य साइबर ठगी के मामलों का भी पता लगाया जा रहा है।

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