55+ वर्ग में महेश चंद ने 113 किलोमीटर की कठिन ट्रेल रन पूरी कर बनाया नया कीर्तिमान

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55+ वर्ग में महेश चंद ने 113 किलोमीटर की कठिन ट्रेल रन पूरी कर बनाया नया कीर्तिमान

-हिमालय की ऊंचाइयों पर BRG का जलवा,

बहादुरगढ़/उमा सक्सेना/- बहादुरगढ़ रनर्स ग्रुप (BRG) के धावकों ने एक बार फिर अपने अदम्य साहस, अनुशासन और जुनून का परिचय देते हुए हिमालय की दुर्गम चोटियों पर नया इतिहास रच दिया। भारतीय सेना की ओर से आयोजित प्रतिष्ठित “सूर्य देव भूमि चैलेंज 2.0” में BRG के वरिष्ठ धावक महेश चंद ने 55 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन दिनों में 113 किलोमीटर की बेहद कठिन ट्रेल रन पूरी की। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल BRG का नाम रोशन किया, बल्कि यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे उम्र कोई मायने नहीं रखती।

बद्रीनाथ धाम से हुई चुनौती की शुरुआत
इस विशेष अभियान का शुभारंभ 16 अप्रैल को पवित्र बद्रीनाथ धाम से हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में की गई। हिमालय की ऊंची वादियों और बर्फ से ढके रास्तों के बीच आयोजित यह प्रतियोगिता केवल दौड़ नहीं थी, बल्कि शारीरिक और मानसिक क्षमता की सबसे कठिन परीक्षा मानी जा रही थी।

इस ट्रेल रन में भाग लेने वाले धावकों को ऐसे रास्तों से गुजरना था, जहां कभी संत-महात्मा और तीर्थयात्री बद्रीनाथ से केदारनाथ तक पैदल यात्रा किया करते थे। ऊंचे पहाड़, खतरनाक मोड़, फिसलन भरे रास्ते और लगातार बदलता मौसम इस चुनौती को और भी कठिन बना रहा था।

तीन दिनों में 113 किलोमीटर का सफर
यह प्रतियोगिता तीन चरणों में आयोजित की गई थी। पहले दिन धावकों को मंडल से कालगोट तक लगभग 36 किलोमीटर की दूरी तय करनी थी। दूसरे दिन कालगोट से वापस मंडल तक करीब 39 किलोमीटर का रास्ता तय किया गया। तीसरे और अंतिम दिन मंडल से ऊखीमठ तक लगभग 38 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण दूरी पूरी करनी थी।

कुल मिलाकर 113 किलोमीटर की यह कठिन यात्रा बेहद संकरे पहाड़ी रास्तों, ऊंची चढ़ाइयों और बर्फीले ट्रेल से होकर गुजरी। कई स्थानों पर धावकों को तेज ठंड और कम ऑक्सीजन जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ा।

पहली ट्रेल रन में ही कर दिखाया कमाल
महेश चंद के लिए यह केवल एक और दौड़ नहीं थी, बल्कि उनकी जिंदगी की पहली ट्रेल रन थी। इसके बावजूद उन्होंने अद्भुत साहस और आत्मविश्वास का परिचय दिया। उन्होंने यह पूरी 113 किलोमीटर की दूरी 32 घंटे 38 मिनट 10 सेकंड में पूरी कर ली। खास बात यह रही कि उन्होंने निर्धारित समय सीमा से पहले यह कठिन लक्ष्य हासिल किया।

55 वर्ष से अधिक आयु में इतनी कठिन और जोखिम भरी ट्रेल रन पूरी करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। BRG के सदस्यों का कहना है कि महेश चंद की मेहनत, अनुशासन और फिटनेस हर किसी के लिए प्रेरणा है।

दीपक छिल्लर का मार्गदर्शन बना ताकत
इस पूरे अभियान के दौरान BRG के संस्थापक और वरिष्ठ धावक दीपक छिल्लर की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने लगातार टीम का उत्साह बढ़ाया और धावकों को इस चुनौती के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार किया। महेश चंद समेत सभी प्रतिभागियों ने माना कि दीपक छिल्लर के मार्गदर्शन और प्रेरणा ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की ताकत दी।

सेना की व्यवस्था ने जीता दिल
इतनी कठिन परिस्थितियों में प्रतियोगिता को सफल बनाना आसान नहीं था, लेकिन भारतीय सेना ने इस आयोजन में पानी, भोजन, सुरक्षा और रेस्क्यू की बेहतरीन व्यवस्था की। रास्ते में जगह-जगह सहायता केंद्र बनाए गए थे। रात के समय अगर कोई धावक थक जाता या तबीयत खराब होने लगती, तो सेना की टीम तुरंत उसकी मदद के लिए पहुंच जाती।

सेना की यह तैयारी और समर्पण इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। प्रतिभागियों ने भी सेना की व्यवस्था की जमकर सराहना की।

श्रीनगर में हुआ भव्य समापन
इस ऐतिहासिक इवेंट का समापन 20 अप्रैल को श्रीनगर में स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय परिसर में हुआ। समापन समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री उपस्थित रहे और उन्होंने विजेताओं तथा प्रतिभागियों को सम्मानित किया। इस मौके पर महेश चंद की उपलब्धि को विशेष रूप से सराहा गया।

BRG ने फिर दिया प्रेरणा का संदेश
महेश चंद की इस शानदार उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती। BRG ने एक बार फिर दिखा दिया कि यह समूह केवल दौड़ने का नाम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, फिटनेस और समाज को प्रेरणा देने का प्रतीक है।

55+ आयु वर्ग में महेश चंद की यह सफलता युवाओं के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि जुनून और लगन से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।

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