नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में आयोजित जनसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सत्तारूढ़ दल पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति से किसी भी राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है। अपने संबोधन में उन्होंने दावा किया कि राज्य पर लगभग आठ लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, जो वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
तृणमूल सरकार की नीतियों पर सवाल
रैली में उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर विकास की अनदेखी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि मौजूदा प्रशासनिक नीतियों के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने मदरसों को दी जा रही आर्थिक सहायता और अन्य योजनाओं की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए।
परिवारवाद और नेतृत्व पर टिप्पणी
गृह मंत्री ने विपक्षी दलों की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए विभिन्न राज्यों में परिवारवाद के मुद्दे को उठाया। उन्होंने संकेत दिया कि यदि वर्तमान सरकार दोबारा सत्ता में आती है तो निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ सीमित व्यक्तियों तक सिमट सकती है। इस संदर्भ में उन्होंने राज्य के नेतृत्व और प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर आरोप लगाए।
‘परिवर्तन यात्रा’ का जिक्र
अपने भाषण में उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन यात्रा का उद्देश्य राज्य में प्रशासनिक सुधार और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीमावर्ती राज्य होने के बावजूद अवैध घुसपैठ पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रखा गया। उनका दावा था कि यदि उनकी पार्टी को अवसर मिला तो सीमाई सुरक्षा को सख्ती से लागू किया जाएगा।
कर्मचारियों और शरणार्थियों को आश्वासन
रैली में उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन देने का वादा दोहराया। साथ ही यह भी कहा कि किसी भी वैध शरणार्थी के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। उनके अनुसार राज्य में सुशासन और पारदर्शिता लाने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली आगामी चुनावों से पहले बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकती है।


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