वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव पर जयशंकर का बड़ा बयान

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October 8, 2026

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-पुणे में दीक्षांत समारोह के दौरान दिया संदेश

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-     विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि दुनिया आज एक बड़े आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। पुणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वैश्विक व्यवस्था पहले जैसी नहीं रही, जहां एक या दो देश अपनी मर्जी पूरी दुनिया पर थोप सकें। उनके मुताबिक, आज की दुनिया बहुध्रुवीय (मल्टी-पोलर) बन चुकी है, जहां ताकत के कई केंद्र उभर कर सामने आए हैं।

अब किसी एक देश की नहीं चलती मनमानी
जयशंकर ने कहा कि चाहे कोई देश कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, वह अब सभी मुद्दों पर अपनी शर्तें थोपने की स्थिति में नहीं है। वैश्विक मंच पर देशों के बीच स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जो अपने आप में एक संतुलन पैदा करती है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति को पहले से कहीं अधिक जटिल बना रहा है।

शक्ति की परिभाषा अब बहुआयामी
विदेश मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि आज शक्ति को केवल सैन्य ताकत से नहीं आंका जा सकता। व्यापार, ऊर्जा, संसाधन, तकनीक, प्रतिभा (टैलेंट) और औद्योगिक क्षमता भी शक्ति के अहम घटक बन चुके हैं। इन्हीं विविध कारकों के कारण वैश्विक शक्ति संतुलन को समझना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

वैश्वीकरण ने बदला सोचने का तरीका
जयशंकर ने कहा कि वैश्वीकरण ने देशों के सोचने और काम करने के तरीके को बुनियादी रूप से बदल दिया है। अब कोई भी वैश्विक शक्ति खुद को पूरी तरह सार्वभौमिक नहीं मान सकती। सभी देशों को एक-दूसरे पर निर्भर रहते हुए आगे बढ़ना पड़ रहा है।

भारत के लिए तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
अपने संबोधन में उन्होंने भारत के भविष्य की दिशा पर भी बात की। जयशंकर ने कहा कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था को तकनीक के साथ कदम मिलाकर चलने के लिए आधुनिक और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर विकसित करना होगा। इससे न केवल आर्थिक मजबूती आएगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका भी और सशक्त होगी।

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