राम मंदिर ध्वजारोहण: पीएम मोदी, योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत ने जताया गौरव और प्रेरणा

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October 8, 2026

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अयोध्या/उमा सक्सेना/-    अयोध्या में ऐतिहासिक राम मंदिर ध्वजारोहण के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने उपस्थित जनमानस और मेहमानों को संबोधित किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि यह सपना वर्षों का प्रतीक है और सदियों के घाव अब भर रहे हैं। उन्होंने समाज में गरीबी और पीड़ा को समाप्त करने का संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि यह भगवा ध्वज युगों-युगों तक श्रीराम के संदेश और प्रेरणाओं को हर मानव तक पहुंचाएगा। उन्होंने दानवीरों, श्रमवीरों, कारीगरों, योजनाकारों और वास्तुकारों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया और बताया कि अयोध्या वह नगरी है, जहां से श्रीराम ने अपना जीवन पथ प्रारंभ किया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए समाज की सामूहिक शक्ति आवश्यक है। उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित सप्त मंदिरों, निषाद राज के मंदिर और जटायु जी तथा गिलहरी की मूर्तियों का महत्व बताते हुए कहा कि ये प्रतीक हर छोटे प्रयास को बड़े संकल्प की सिद्धि से जोड़ते हैं।

इस अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि यह दिन सभी के लिए सार्थक है। जिन्होंने प्राण न्योछावर किए, उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी। आज मंदिर का ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ और वह भगवा ध्वज, जो कभी अयोध्या में फहराता था, आज फिर से फहरा। उन्होंने बताया कि इस ध्वज पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष अंकित है, जो रघुकुल की सत्ता और सेवा भाव का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि सूर्य भगवान इस संकल्प का प्रतीक हैं और मंदिर का स्वरूप वही है जो वर्षों पहले देखा गया था, बल्कि इससे भी भव्य।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि मंदिर के शिखर पर फहरा यह केसरिया ध्वज नए भारत का प्रतीक है। 500 वर्षों के संघर्ष के बावजूद आस्था कभी झुकी नहीं। उन्होंने याद दिलाया कि जब आरएसएस ने नेतृत्व संभाला, तब केवल यही संदेश गूंजता रहा: “रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।” उनके शब्दों में मंदिर निर्माण की श्रद्धा, आस्था और नए भारत की ऊर्जा झलक रही थी।

इस प्रकार, राम मंदिर ध्वजारोहण न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का दिन था, बल्कि यह भारत की आस्था, संकल्प और सामूहिक शक्ति का प्रतीक भी बन गया।

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