अमेरिका का नया फार्मा टैरिफ: भारतीय शेयर बाजार में हलचल, जेनेरिक सेक्टर सुरक्षित

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April 17, 2026

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अमेरिका का नया फार्मा टैरिफ: भारतीय शेयर बाजार में हलचल, जेनेरिक सेक्टर सुरक्षित

मानसी शर्मा /- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी ट्रेड वॉर रणनीति को तेज करते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि 1 अक्टूबर 2025 से ब्रांडेड या पेटेंटेड फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स पर 100% टैरिफ लागू किया जाएगा, जब तक कि कोई कंपनी अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट न बनाए।

इस घोषणा का असर भारतीय शेयर बाजार पर तुरंत दिखा। सेंसेक्स 412.67 अंक गिरकर 80,747.01 पर और निफ्टी 115 अंक गिरकर 24,776 पर कारोबार कर रहा है। फार्मा सेक्टर के स्टॉक्स में भी भारी गिरावट देखी गई।

भारत के फार्मा निर्यात पर असर सीमित

विशेषज्ञों का कहना है कि यह टैरिफ भारत के लिए घातक साबित नहीं होगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवाओं का उत्पादक है और अमेरिका को फार्मा निर्यात का लगभग एक तिहाई हिस्सा भेजता है। वित्त वर्ष 2025 में भारत का अमेरिका को फार्मा निर्यात करीब 10.5 अरब डॉलर रहा, लेकिन यह मुख्य रूप से सस्ती जेनेरिक दवाओं पर आधारित है, जो टैरिफ के दायरे में नहीं आती।

ब्रांडेड या पेटेंटेड दवाओं का हिस्सा भारत के निर्यात का मात्र 5.3% है, जबकि आयरलैंड (30%), स्विट्जरलैंड (8.8%) और जर्मनी (7.8%) जैसे देश ब्रांडेड दवाओं के बड़े निर्यातक हैं।

अमेरिका में भारतीय कंपनियों की स्थिति

अधिकांश बड़ी भारतीय फार्मा कंपनियों के पास अमेरिका में पहले से ही मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और सब्सिडियरीज हैं। उदाहरण के लिए सन फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज अमेरिकी बाजार में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। ट्रंप के ऐलान के अनुसार, जो कंपनियां अमेरिका में प्लांट बना रही हैं, उन्हें छूट मिलेगी।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट पंकज पांडे का कहना है कि नजदीकी समय में इसका असर सीमित रहेगा, क्योंकि भारत का फोकस जेनेरिक्स पर है। हालांकि, भविष्य में कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स और बायोसिमिलर्स पर असर पड़ने की संभावना है।

विशेषज्ञों की राय

सीटीआई वेल्थ के केन पेंग का कहना है कि यह टैरिफ मुख्य रूप से ब्रांडेड दवाओं पर असर डालेगा, जबकि जेनेरिक सप्लाई सुरक्षित रहेगी। डॉ. रेड्डीज के सीईओ एरेज इजरायली ने कहा कि कंपनी अमेरिका में विस्तार के लिए खुली है, जिसमें अधिग्रहण भी शामिल हो सकता है।

शेयर बाजार में हलचल के बावजूद विशेषज्ञ इसे शॉर्ट-टर्म रिएक्शन मान रहे हैं।

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