
1 अक्टूबर को रक्षा लेखा विभाग दिवस मनाते।
इस विभाग में कार्य कर देश के प्रति कर्तव्य को निभाते।।
250 वर्ष पुरातन विभाग से जुड़कर स्वयं को गौरवान्वित पाते।
वित्त का उचित प्रबंधन कर हम राष्ट्र की समस्याओं को घटाते।।
समय-समय पर ऑडिट एवं वित्त सम्बन्धी चुनौतियों से टकराते।
पर कार्य की सफलतापूर्वक पूर्णता पर हम सुकून पाते।।
सेना के वित्त सम्बन्धी कार्यों को पूर्ण करने में नहीं घबराते।
इस विभाग में कार्य कर देश-भक्ति का कर्म निभाते।।
कभी-कभी वित्त नियमों और योजनाओं से हम है जूझते।
पर आपसी सहयोग और उचित ज्ञान से निराकरण भी बुझते।।
इस विभाग में कार्य कर हम सैन्य सेवाओं के लिए उचित परामर्श बताते।
प्रत्येक कार्य की उन्नति पर हम स्वयं को राष्ट्र का सेवक पाते।।
रक्षा सेवाओं के वार्षिक लेखों की जानकारी को हम बताते।
रक्षा बजट के संयुक्त व्यय के सही लेखा-जोखा से अवगत कराते।।
रक्षा लेखा विभाग की कर्म स्थली को हम पूजते।
सदैव, शीघ्र एवं सरल वित्त प्रबंधन प्रदान करने हेतु अग्रसर रहते।
वेतन-भत्ते, पेंशन का समय पर भुगतान करने जैसे कार्यों में हम नहीं घबराते।
वेतन लेखाओं के अनुरक्षण को भी हम समय-समय पर दर्शाते।।
लेखा परीक्षा, लेखांकन जैसे कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते।
डॉ. रीना कहती, इस विभाग में अपनी सेवाएँ देकर स्वयं को धन्य पाते।।
डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका)





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