राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज नई दिल्ली में प्रगति मैदान में पुस्तकालय महोत्सव का किया उद्घाटन

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज नई दिल्ली में प्रगति मैदान में पुस्तकालय महोत्सव का किया उद्घाटन

-संस्कृति मंत्रालय अपनी नई पहल के साथ कर रहा है दो दिवसीय पुस्तकालय महोत्सव का आयोजन

नई दिल्ली/- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज नई दिल्ली में प्रगति मैदान में पुस्तकालय महोत्सव का उद्घाटन किया। इसका आयोजन संस्कृति मंत्रालय ने किया है। दो दिन के इस महोत्सव में दुनियाभर के प्रसिद्ध पुस्तकालयों की विशेषताओं को दर्शाया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत में पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण और डिजीकरण पर चर्चा की शुरुआत करना है।

महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि पुस्तकालयों का विकास समाज और संस्कृति के विकास से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह सभ्यता और संस्कृति की प्रगति का पैमाना भी होता है। राष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तकालय विकसित सभ्यताओं के बीच सेतु का काम करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण और डिजीकरण के प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग के कारण अब पुस्तकालय अधिक सुलभ हो गए हैं। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र एक डिजिटल लाइब्रेरी के स्वपन को साकार करने के लिए राष्ट्रीय वर्चुअल लाइब्रेरी का विकास किया जा रहा है। राष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन की सफलता से पुस्तकालयों से जुड़ने और पुस्तक पढ़ने की संस्कृति मजबूत होगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पुस्तकालयों को सामाजिक विमर्श, अध्ययन और चिंतन के केन्द्र बनाना होगा।

संस्कृति मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन ने बताया कि विश्वविद्यालयों की तर्ज पर संस्कृति मंत्रालय पुस्तकालयों की रैंकिंग शुरू करने जा रहा है। इसमें 42 मापदंड तैयार किये गए हैं। महोत्सव के दौरान इसकी घोषणा की जाएगी। इसमें पंचायतों के ग्रामीण पुस्तकालय, मोबाइल पुस्तकालय, जिला पुस्तकालय से लेकर राष्ट्रीय पुस्तकालय भाग ले सकेंगे। इस रैंकिंग के आधार पर पाठकों को पता चलेगा कि कौन सा पुस्तकालय किस स्तर का है। इस रैंकिंग से इंफ्रास्ट्रक्चर, पाठकों, किताबों की संख्या समेत अन्य सुविधाओं की जानकारी आम लोगों को मिलेगी।

रैंकिंग में जगह बनाने के लिए पुस्तकालय सुविधाओं में इजाफा करेंगे और आम लोगों को सीधे इसका लाभ मिलेगा। पुस्तकालय भावनात्मक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक हैं इसलिए लोगों में पढ़ने की आदतों को पुनर्जीवित करना महत्वपूर्ण है। पुस्तकालयों और संग्रहालयों में गहरा संबंध है।

यह आयोजन पुस्तकालयों के विकास और डिजीकरण को बढ़ावा देने तथा देश में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप है। इसका उद्देश्य देश में ग्रामीण और सामुदायिक स्तर तक आदर्श पुस्तकालयों के विकास के लिए कार्योन्मुखी नीतियां तैयार करना है।

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