नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- अगले महीने की 18 तारीख को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए अब एनडीए व विपक्ष ने कमर कस ली है। अभी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर नामांकन प्रक्रिया चल रही है और 29 जून को पर्चा भरने की आखिरी तारीख है। इस बीच भाजपा ने विपक्ष के
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के सामने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है।
विपक्ष ने दो दिन पहले ही अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी थी लेकिन भाजपा ने बुधवार को द्रौपदी मुर्मू के नाम की घोषणा का सबको चौंका दिया है। भाजपा शुरू से ही राष्ट्रपति पद के लिए एक महिला उम्मीदवार की तलाश कर रही थी जिसे देखते हुए पिछले एक सप्ताह से भाजपा में तीन महिलाओं के नाम पर विचार किया जा रहा था, जिसमें झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके और यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के नाम पर चर्चा चल रही थी।
यहां बता दें कि द्रौपदी मुर्मू ओडिशा से आनेवाली आदिवासी नेता हैं। 64 साल की द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को उड़ीसा के मयूरभंज जिले में हुआ। करियर की शुरुआत एक शिक्षक से शुरू करने वाली मुर्मू 1997 में पार्षद भी रह चुकी है। द्रौपदी मुर्मू रायरंगपुर सीट से 2 बार भाजपा की विधायक और एक बार मंत्री रह चुकी ह।ै 6 मार्च 2000 से 6 अगस्त 2002 तक वाणिज्य परिवहन विभाग में स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री रही। 6 अगस्त 2002 से 16 मई 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री रही। 2006 से 2009 तक वे उड़ीसा भाजपा की अनुसूचित जनजाति मोर्चा की अध्यक्ष आ रही। 2007 में उन्हें ओडिशा के सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ अवार्ड से सम्मानित किया गया। 18 मई 2015 से 18 मई 2020 तक झारखंड की पहली महिला और आदिवासी गवर्नर रही। मुर्मू उड़ीसा की पहली महिला नेता हैं जिन्हें गवर्नर बनाया गया और अब राष्ट्रपति प्रत्याशी बनी है। भाजपा की यह तैयारी लोकसभा के 2024 के चुनावों को लेकर भी है। क्योंकि लोकसभा की 543 सीटों में से 47 सीट एससी श्रेणी की है।
गौरतलब है कि लोकसभा की 543 सीटों में से 47 सीट एसटी श्रेणी के लिए आरक्षित हैं। 60 से अधिक सीटों पर आदिवासी समुदाय का प्रभाव है। मध्य प्रदेश, गुजरात, झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में आदिवासी वोटर निर्णायक स्थिति में हैं। ऐसे में आदिवासी के नाम पर चर्चा चल रही थी। इससे भाजपा को चुनाव में भी फायदा मिल सकता है, क्योंकि गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अगले डेढ़ साल के भीतर विधानसभा चुनाव होंगे, जिसका सियासी तौर पर लाभ भाजपा को मिलने की संभावना जताई जा रही है। इस उम्मीदवारी में एक सबसे बड़ी बात यह भी है कि भाजपा ने ओडिसा के बीजद के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से भी समर्थन मांगा था लेकिन नवीन पटनायक ने समर्थन के लिए अपनी शर्त रखी थी। अब ओडिसा की द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी से नवीन पटनायक को ना चाहते हुए भी अपना समर्थन देना पड़ेगा जिससे भाजपा की स्थिति चुनाव में काफी मजबूत हो गई है।
विपक्ष से पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा का नाम
इससे पहले राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार को लेकर विपक्ष की तरफ से ठश्रच् के पूर्व दिग्गज और ज्डब् से इस्तीफा दे चुके यशवंत सिन्हा का नाम आगे बढ़ाया गया। वहीं भाजपा में महामहिम की रेस में महिला, मुस्लिम, दलित या दक्षिण भारत की किसी हस्ती के नाम पर विचार किया जा रहा था, ताकि 2022-23 में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों को साधने में आसानी हो सके।
आदिवासी : देश में अब तक आदिवासी समुदाय का कोई व्यक्ति राष्ट्रपति नहीं बन पाया है। महिला, दलित, मुस्लिम और दक्षिण भारत से आने वाले लोग राष्ट्रपति बन चुके हैं, लेकिन आदिवासी समुदाय इससे वंचित रहा है। ऐसे में यह मांग उठती रही है कि दलित समाज से भी किसी व्यक्ति को देश के सर्वोच्च पद पर बैठाया जाए। जिसे देखते हुए भाजपा ने आदीवासी समाज की महिला नेता को इस पद से सम्मानित करने का फैसला किया है। क्योंकि देश में भाजपा महिलाओं का स्तर उठाने का अपना संकल्प पुख्ता रखना चाहती है जिसके लिए द्रौपदी मुर्मू भाजपा की पहली पंसद बन गई। महिलाएं भाजपा के लिए कोर वोट बैंक बन चुकी हैं। इस वोट बैंक को साधने की भाजपा की कोशिश जारी है। पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनने से भाजपा एक तीर से दो निशाने लगाएगी। पहला आदिवासी समाज को साधने में मदद मिलेगी। साथ ही महिला वोट बैंक में भी मजबूत पकड़ बनी रहेगी।
25 जुलाई को ही खत्म होता है राष्ट्रपति का कार्यकाल
नीलम संजीव रेड्डी ने देश के 9वें राष्ट्रपति के तौर पर 25 जुलाई 1977 को शपथ ली थी। तब से हर बार 25 जुलाई को ही नए राष्ट्रपति कार्यभार संभालते आए हैं। रेड्डी के बाद ज्ञानी जैल सिंह, आर वेंकटरमन, शंकरदयाल शर्मा, केआर नारायणन, एपीजे अब्दुल कलाम, प्रतिभा पाटिल, प्रणब मुखर्जी और रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को शपथ ले चुके हैं।
ममता के तीन पसंदीदा चेहरों का इनकार
विपक्ष ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के नेता यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तय किया है। इसके बाद सिन्हा ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। कई दिनों से विपक्ष को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी नहीं मिल रहा था। विपक्ष के ऑफर को एनसीपी प्रमुख शरद पवार, नेशनल कांफ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के बाद अब महात्मा गांधी के पौत्र और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी ने भी राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनने का ऑफर को ठुकरा दिया है।
बीजद के समर्थन देने से एनडीए की वोट वैल्यू 5.63 लाख तक पहुंची, यानी मुर्मू की जीत तय
एनडीए द्वारा मुर्मू को प्रत्याशी बनाने से यशवंत सिन्हा की उम्मीदें खत्म हो गई हैं। बीजद ने मुर्मू को समर्थन दे दिया है। उधर, विपक्ष के 18 दलों की वोट वैल्यू 3,81,051 ही है। वहीं, बीजद के आने से एनडीए की वोट वैल्यू 5,63,825 हो गई है, जबकि जीत के लिए 5.4 लाख से ज्यादा चाहिए थे।
यूं समझें विपक्ष की उम्मीदें क्यों टूट रहीं…
18 विपक्षी दलों के 219 सांसदों की वोट वैल्यू = 1,53,300
18 दलों के कुल 1550 विधायकों की वोट वैल्यू = 2,27,751
दोनों को जोड़ें तो कुल आंकड़ा = 3,81,051
18 दल, जो विपक्ष में हैंः कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, एनसीपी, सपा, सीपीआई (एम), आईयूएमएल, सीपीआई, आरएसपी, जेडीएस, आरएलपी, झामुमो आदि।
3 दल, जो अभी साथ नहीं आएः टीआरएस, शिअद और आप।
27 सांसदों का वेटेज = 18,900
261 विधायकों का = 28,194
कुल वोट वैल्यू = 47,094
इनका पाला तय नहींः वाईएसआर, बसपा और एआईएमआईएम।
37 सांसदों का वेटेज = 25,900
170 विधायकों का = 26,703
कुल वोट वैल्यू = 52,603
24 दलों के कुल 283 सांसदों और 1981 विधायकों के वोट की कुल वैल्यू = 4,80,748, जबकि जीत के लिए 5,40,065 से ज्यादा चाहिए।


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