– कहा- पैरामिलिट्री फोर्सेस के कैडर आफिसर्स के पदोन्नति के अवसर पर पड़ेगा असर
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- कॉनफैडरेसन आफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियरस वेलफेयर एसोसिएशन जो कि पिछले 7 सालों से पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर संबंधित मुद्दों को लेकर सड़क से लड़ाई जारी रखें हैं ने आईपीएस अधिकारीयों के लिए कमांडेंट पद खोलने पर ऐतराज जताया है तथा सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध करने की बात भी कही है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए महासचिव रणबीर सिंह द्वारा जारी प्रैस विज्ञप्ति में कहा कि इससे हमारे कैडर आफिसर्स यानी सहायक कमांडेंट के कमांडेंट पदों पर पदोन्नति के अवसर कम हो जाएंगे और साथ ही कमांडेंट लेवल के पदों पर आईपीएस अधिकारी फोर्सेस हैडक्वार्टर, सैक्टर या फ्रंटियर एचक्यू में सभी सुविधाओं से लाभ उठायेंगे। इससे खासकर कमांडेंट व निचले स्तर के कैडर आफिसर्स में कुंठा का आभास एवं मनोबल आत्म सम्मान में कमी महसूस होगी। अभी पहले ही डीआईजी स्तर के 40 पर्सेंट पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं भले ही पद खाली पड़े हों।
रणबीर सिंह आगे कहते हैं कि आईपीएस प्रोबेशनरी पीरियड यानी ट्रेनिंग के बाद 3 साल के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सहायक कमांडेंट के तौर डेपुटेशन पर रखा जा सकता है। बजाय हैड क्वार्टर पोस्टिंग के नक्सल बहुल इलाकों, उत्तरी पूर्वी राज्यों, लाइन ऑफ कंट्रोल यानी बॉर्डर आउट कम्पनी पोस्ट,15 से 20 हजार फीट ऊंचाइयों वाले हिमवीरों आईटीबीपी के बर्फीले कम्पनी पोस्ट, सुबरबन, रण-कच्छ, जैसलमेर, बाड़मेर जैसे इलाकों में तैनात कम्पनियों की कमान सौंपी जाए ताकि आइपीएस अधिकारी जवानों की दिनचर्या, ड्युटी, होने वाली कठिनाइयों से रुबरु हो सके।
उन्होने कहा कि पैरामिलिट्री फोर्सेज में आइपीएस डीआईजी, आईजी, एडीजी या डीजी लेवल के पदों पर सुरक्षा बलों में इंट्री तभी हो जब आइपीएस अधिकारी द्वारा शुरुवाती दौर में सहायक कमांडेंट के तौर पर 3 साल सुरक्षा बलों में कम्पनी आउट-पोस्ट पर कमांड की हो।


Posting IPS officers in Paramilitary Force as Commandant is not advisable.The Commandant is carrying Regiment feelings and always feel that he is the guardian of entire unit. The IPS officers always feel as a guest to the Paramilitary Force and never carried Regimental feelings. I worked as in CRPF for more than 34 years and never saw an lPS officer who was carrying the Regimental feelings. They are deputationists and enjoying the facilities available in CPMF and leaving the force without doing much. CPMF cadre Officers are Master of the field where as IPS officers are paper tigers and they can’t be a good Commandant in the field. It is better to maintain the Status quo.