-नाराज आजम खान सपा अध्यक्ष की बात मानने को तैयार नही, डैमेज रोकने को अखिलेश हुए एक्टिव
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- चुनावों के बाद से चाचा-भतीजे में चल रहा मनमुटाव अब सामने आने लगा है। शिवपाल यादव का पहले भाजपा नेताओं से मिलना और अब आजम खान से मुलाकात के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) में खलबली मच गई है। हालांकि अभी तक सपा अध्यक्ष इसे हलके में ले रहे थे लेकिन अब आजम खान के नाराजगी के बयान सामने आने और स्वामी प्रसाद मोर्या के भतीजे द्वारा सपा से इस्तीफा देने के बाद अब अखिलेश यादव डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। बुरे समय में दरकिनार किए जाने की वजह से आहत आजम खान की सुध लेने के लिए अखिलेश यादव ने अपने कई दूत भेज दिए हैं। रविवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के कहने पर विधायक रविदास मल्होत्रा पार्टी के कई विधायकों के साथ सीतापुर जेल पहुंचे। हालांकि, उनकी आजम खान से मुलाकात नहीं हो पाई। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने का हवाला देकर आजम ने मुलाकात के लिए सहमति नहीं दी।
इससे पहले 10 अप्रैल को आजम खान के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खान उर्फ सानू ने अचानक अखिलेश यादव पर आजम खान की उपेक्षा का आरोप लगाकर यूपी की सियासत में खलबली मचा दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश ने ना तो आजम को जेल से बाहर निकालने के लिए कोई प्रयास किया और ना ही उनसे मिलने गए। आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम इस पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके कई करीबी नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा देकर मंशा जाहिर कर दी है। वहीं शिवपाल यादव ने भी अपने बयान में यह कहकर खलबली मचा दी कि अगर अखिलेश व मुलायम सिंह यादव चाहते तो आजम खान आज बाहर होते। उनके इस बयान ने एक तरह से आग में घी डालने का काम किया है जिसके चलते अब आजम खान भी सपा छोड़ने का मन बना चुके हैं।
इस बीच, अखिलेश से नाराज चल रहे चाचा शिवपाल यादव ने आजम खान से सीतापुर जेल में जाकर एक घंटे से अधिक देर तक बातचीत की है। अटकलें हैं कि शिवपाल यादव आजम खान के साथ कोई नया मोर्चा बना सकते हैं। अब तक शिवपाल की नाराजगी को हल्के में लेते आ रहे अखिलेश यादव की परेशानी चाचा के नए दांव से बढ़ गई है। उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं को आजम परिवार को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
पिछले दिनों सपा गठबंधन के साथी और राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत चौधरी ने रामपुर जाकर आजम परिवार से मुलाकात की थी। इसे भी नाराज परिवार को मनाने की कोशिश का हिस्सा बताया गया। हालांकि, खुद अखिलेश यादव ने कहा था कि उन्होंने जयंत को वहां नहीं भेजा था। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आजम खान की जिस तरह मुसलमानों के बीच लोकप्रियता है, यदि वह पार्टी से अलग होते हैं तो अगले लोकसभा चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इसको ध्याम में रखकर आजम खान को मनाने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं।
वहीं अखिलेश यादव से तल्खी के बीच शिवपाल यादव शुक्रवार की सुबह सीतापुर जेल में बंद सपा नेता मोहम्मद आजम खान से मिलने पहुंचे। करीब एक घंटे 20 मिनट की मुलाकात के बाद जेल से निकले शिवपाल यादव ने अखिलेश यादव के साथ पहली बार सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव पर भी हमला बोला है। उन्होंने कहा कि नेताजी और अखिलेश यादव चाहते तो आजम खान जेल से बाहर होते। नेताजी ने कुछ नहीं किया, लोकसभा में भी मामला नहीं उठाया। वह चाहते तो धरना कर सकते थे। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट करने की बात कही है।
शिवपाल यादव ने साफ कहा है कि आजम साहब बड़े नेता है, उनकी पीड़ा को समझा जा सकता है। वह मुख्यमंत्री से मिलकर पीड़ा साझा करेंगे। उन्होंने कहा कि समय आने पर वह सभी खुलासे करेंगे। वक्त का इंतजार कीजिए।
उधर स्वामी प्रसाद मौर्या के खेमे ने भी अखिलेश का झटका दे दिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) में बगावत की आग फैलती ही जा रही है। शिवपाल यादव और आजम खान की बागवत के बीच अब स्वामी प्रसाद मौर्य के भतीजे प्रमोद मौर्य ने भी सपा से इस्तीफा दे दिया है। सपा के प्रदेश सचिव प्रमोद मौर्य ने पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेजे इस्तीफे में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सपा में मौर्य, कुशवाहा, शाक्य, सैनी, समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या देर सबेर स्वामी प्रसाद मौर्य भी अखिलेश यादव का साथ छोड़ देंगे?
प्रमोद मौर्य ने कहा है, ’’जब मैं सपा में शामिल हो रहा था तो कुछ लोगों ने कहा था कि सपा केवल एक जाति विशेष के लोगों की पार्टी है, लेकिन फिर भी मैंने आपसे प्रभावित होकर सपा की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी में काम करते हुए हमने यह महसूस किया है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी केवल अपनी जाति को बड़ी जाति मानते हैं। पार्टी की बैठकों में अक्सर मौर्य, कुशवाहा, शाक्य, सैनी, पटेल व अन्य पिछड़ी जातियों को छोटा दिखाने की कोशिश करते हैं। सपा में 75 जिलों में एक भी जिलाध्यक्ष मौर्य, कुशवाहा, शाक्य, सैनी समाज का नहीं है।’’


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