गंगूबाई ने दिया था प्रधानमंत्री को शादी का प्रस्ताव

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September 23, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

गंगूबाई ने दिया था प्रधानमंत्री को शादी का प्रस्ताव

-गंगूबाई काठियावाड़ी की कहानी हुई वायरल


नजफगढ़ मेट्रो न्यूज़ /बॉलीवुड /मानसी शर्मा-आज हम आपको इस खबर में गंगूबाई काठियावाड़ी से जुड़ी हर एक कहानी बताएंगे जैसे कि आप जानते हैं कि बॉलीवुड आए दिन रियलिटी बेस्ड मूवी बनाता रहता है लेकिन कई बार मूवी बनाने के चक्कर में अक्सर किरदार के पहलू दर्शकों से छुप जाते हैं । क्योंकि फिल्म को दिलचस्प बनाने के लिए उसमें थोड़ा मिर्च मसाला डालकर कहानी में थोड़ी हेरफेर की जाती है। आज हम इस खबर में आपको गंगूबाई काठियावाड़ी से जुड़े हर एक सच से रूबरू करवाएंगे।  

यह कहानी 16 साल की एक लड़की की हैं जो कि मुंबई की चकाचौंध के बीच एक रेड लाइट सिगनल पर फस गई थी । जिसने बड़ी दबंग तरीके से मुंबई के एक बड़े डॉन की कलाई पर राखी बांध डाली। आपको बता दें ,कि कमाठीपुरा में हर एक सेक्स वर्कर के पास गंगूबाई की तस्वीर आपको देखने को मिलेगी । हर एक सेक्स वर्कर गंगूबाई काठियावाड़ी को अपनी पूजनीय मां के समान मानते हैं । गंगूबाई काठियावाड़ी सेक्स वर्कर के अधिकारों के लिए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के पास जा पहुंची थी । साथ ही हम आपको बता दें, कि गंगूबाई काठियावाड़ी के ऊपर अनेक किताबें भी लिखी गई है ।

गंगूबाई काठियावाड़ी का असली नाम गंगा हरजीवनदास काठियावाड़ी था । वह साधारण लड़कियों की तरह एक आम जिंदगी व्यतीत कर रही थी।  गंगूबाई के माता-पिता उन्हें खूब पढ़ाना लिखना चाहते थे । लेकिन गंगूबाई का शुरू से पढ़ाई लिखाई में थोड़ा दिमाग कम चलता था।  लेकिन वह दिन रात मुंबई जाकर हीरोइन बनने का सपना देखती थी उनको फिल्में देखना काफी ज्यादा पसंद था ।

 वह एक्ट्रेस हेमा मालिनी और आशा पारेख जैसा बनना चाहती थी।  अपनी अदाओं से सबको घायल करना चाहती थी उनके जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया जब वह प्यार में पूरी तरह से डूब गई थी । केवल इतना ही नहीं वह रमणीत के लिए अपना घर तक छोड़ने को तैयार हो गई थी ।

गंगूबाई के घर वाले इस रिश्ते के खिलाफ थे। इसके बाद गंगूबाई और रमणीत ने घर से भागकर शादी करने का फैसला कर लिया। प्यार में पागल गंगूबाई रातों रात घर से भाग निकली और वह दोनों मुंबई नगरी में आ पहुंचे किस्मत की मारी गंगूबाई को क्या पता था कि जिससे उसने बेइंतहा प्यार किया वह ₹500 के खातिर उसकी बोली लगाकर उसको बेच डालेगा । 16 साल की गंगूबाई ₹500 में बेची गई थी और ₹500 की खातिर गंगूबाई को काठियावाड़ी के सिग्नल पर बैठा दिया गया था ।

गंगूबाई की किस्मत रातों-रात बदल गई हर एक रात को गंगूबाई वहशी दरिंदों का सामना करती थी।  गंगूबाई के जीवन में एक रात ऐसी भी आई की शौकत नाम का एक व्यक्ति गंगूबाई के कोठे पर आया उस शक्स ने गंगूबाई के साथ क्रूरता और अत्याचार की हर एक सीमा लाग दी थी । कुछ समय बाद वही शख्स गंगूबाई के कोठे पर फिर आया और इस बार गंगूबाई सीधा हॉस्पिटल जा पहुंची ।

 उस दिन के बाद साहसी और बहादुर गंगूबाई ने अपनी कहानी खुद लिखने का फैसला किया गंगूबाई ने सेक्स वर्कर के साथ हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने और लड़ने का फैसला कर लिया । उस दिन के बाद गंगूबाई हॉस्पिटल से निकलते ही उस आदमी की पूछताछ में जुट गई हर एक व्यक्ति से गंगूबाई ने शौकत खान के बारे में पूछताछ की ।

पूछताछ में पता चला कि शौकत खान मशहूर डॉन करीम लाला के यहां पर काम करता है निडर और साहसी गंगूबाई डॉन के घर जा पहुंची करीम लाला ने गंगूबाई को देखते ही अपने घर की छत पर जाकर बैठने को कहा । थोड़ी देर बाद डॉन करीम लाला गंगूबाई की हालत देखते हुए अपने घर के रसोई से कुछ खाना ले आए और गंगूबाई को भोजन ग्रहण करने को कहा लेकिन गंगूबाई ने जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की और कहा आपने मुझे अपने घर की छत पर बैठाया है । इसका कारण मैं भली-भांति जानती हूं मैं जानती हूं कि एक वैश्या को आप अपने घर में नहीं बुलाएंगे क्योंकि शायद एक वैश्या को अपने घर में बुलाने से आपका घर अपवित्र हो जाएगा ।

तो मैं आपके घर के इन बर्तनों में अगर भोजन ग्रहण करूंगी तो आपके घर के बर्तन गंदे हो जाएंगे डॉन इस बात को सुनकर भावुक हो उठा और उसने गंगूबाई से उसकी परेशानी का कारण पूछा गंगूबाई ने उस पर हो रहे अत्याचारों और शौकत खान के बारे में सब कुछ बता दिया।

 डॉन गंगूबाई की यह बात सुनकर आग बबूला हो उठा और उसे कहा कि आप बेफिक्र होकर अपने घर जाइए अगर फिर कभी शौकत खान आपके कोठे पर आता है तो इस बात की खबर मुझे कर देना इतना सुनकर ही गंगूबाई की आंखों में पानी आ गया । गंगूबाई ने कहा कि इतना सुरक्षित मैंने आज तक महसूस नहीं किया भावुक गंगूबाई ने अपने थैले में से धागा निकालकर डॉन की कलाई पर बांध दिया । उस दिन के बाद गंगूबाई को अपना एक भाई मिल गया था।

करीम लाला को शौकत खान के कोठे पर आने की खबर डॉन को दी गई बस तो फिर क्या था डॉन ने शौकत खान को रोड पर लाकर पीटा और उसे मार- मार कर अधमरा कर दिया ।

इसके बाद काठियावाड़ी में गंगूबाई का खौफ हो गया गंगूबाई की जिंदगी जैसे बदल सी गई थी डॉन ने पूरी काठियावाड़ी के सामने यह ऐलान कर दिया था कि गंगूबाई उनकी बहन है और अगर कोई भी उन्हें दुख पहुंचाने की कोशिश करेगा तो उसे पहले डॉन का सामना करना पड़ेगा । इसके बाद गंगूबाई ने कमाठीपुरा के चुनावों में हिस्सा लिया और वह भारी वोटों से विजय हुई और हमेशा की तरह डॉन का साथ गंगूबाई पर बन रहा । गंगू सेक्स वर्कर से एक गंगूबाई काठियावाड़ी बन चुकी थी पहली बार गंगूबाई को अपना नाम लेने में गर्व महसूस हुआ ।

इलेक्शन में विजय होने के बाद गंगूबाई जैसे सेक्स वर्कर्स के लिए भगवान बन चुकी थी । गंगूबाई ने हर एक वह लड़ाई लड़ी जो कि काठियावाड़ी से जुड़ी थी।  केवल इतना ही नहीं सेक्स वर्कर्स की लड़ाई लड़ते-लड़ते गंगूबाई भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से भी जा मिली । गंगूबाई ने वहां जाकर प्रधानमंत्री को शादी का प्रस्ताव भी दे डाला दरअसल,  प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने गंगूबाई को समझाते हुए कहा कि वह राजनीति और सेक्स वर्कर्स से जुड़े विवादों को अपनी जिंदगी से निकाल अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करें और किसी भले व्यक्ति से विवाह कर ले।

गंगूबाई ने प्रधानमंत्री को ही अपने साथ शादी करने को कह दिया यह बात सुनते ही पंडित जवाहरलाल नेहरू गुस्से से आगबबूला हो गए गंगूबाई ने हंसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी यह सुनकर आपको इतना गुस्सा लगा तो सोचिए जब कोई मुझे सलाह देता है और समझाने की कोशिश करता है लेकिन असलियत में किसी की भी मुझे अपनाने की हिम्मत नहीं होती तो मुझे कैसा लगता होगा??

गंगूबाई की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद काठियावाड़ी को मुंबई से हटाने की बात दब सी गई थी। उस दिन के बाद से गंगूबाई को काठियावाड़ी में मां के समान देखा जाने लगा और अब तक भी वहां के लोग उन्हें माँ ही मानते है । आप जानकर हैरान होंगे कि मुंबई में हर एक सेक्स वर्कर के पास गंगूबाई की तस्वीर देखने को मिलती है ।

गंगूबाई के जीवन से हर एक उस लड़की को प्रेरणा मिलती है जो कि अत्याचार का शिकार होती है । गंगूबाई के जीवन से हमें काफी कुछ सीखने को मिलता है कि किस तरह एक 16 साल की लड़की ने अपने जीवन में हो रहे अत्याचार और जुल्म का सामना बेबाकी से किया और गंगूबाई ने समाज में प्रताड़ित और मजलूम महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से न केवल आंखों में आंख डाल कर बात की बल्कि उनको इन महिलाओं की मजबूरियों से भी अवगत कराया इसके बाद जब प्रधानमंत्री ने काठियावाड़ को मुंबई से अलग करने के फैसले को स्थगित कर दिया तो गंगूबाई कि पूरे देश में एक अलग पहचान बन गई और लोग उन्हें इज्जत की नजरों से देखने लगे।

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