कश्मीर में जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ जागो पार्टी का प्रदर्शन

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कश्मीर में जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ जागो पार्टी का प्रदर्शन

-यूपी के बाद अब कश्मीर में भी सामने आया मुस्लिम जेहाद का मामला

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- यूपी में अभी मुस्लिम जेहाद व जबरन धर्म परिवर्तन का मामला शांत भी नही हुआ था कि अब कश्मीर से भी जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आने से बवाल मच गया है। हालांकि सरकार इन मामलों में जांच करा रही है लेकिन फिर भी जागो पार्टी ने इसके खिलाफ आवाज उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से इस मामले की जांच कराने की मांग की।
                   यहां बता दें कि बडगाम जिले की एक 18 वर्षीय सिख लड़की को बहला-फुसलाकर जबरन धर्म परिवर्तन कर देने का मामला सामने आया है। जिसे देखते हुए जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ जागो पार्टी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके के नेतृत्व में सिख धर्म के लोगों ने राजधानी दिल्ली के मानसिंह रोड पर जोरदार प्रर्दशन किया। बताया जा रहा है कि बीते दिनों कश्मीर से दो सिख लड़कियों का कथित तौर पर अपहरण कर उनका धर्म परिवर्तित कर दिया गया था। इनमें से एक लड़की की शादी मुस्लिम लड़के से कर दी गई थी जो अभी लापता है।
                    26 जून को जम्मू-कश्मीर से जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया था.जागो पार्टी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके का कहना है कि धर्मांतरण के खिलाफ भारत सरकार सख्त कानून बनाए। साथ ही जम्मू के सिखों को अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा दे. राज्य में मैरिज एक्ट लागू करे. क्योंकि जम्मू-कश्मीर में लगातार इस्लाम धर्म के लोगों की ओर से सिख समुदाय की बहन-बेटियों को अपहरण करके उनसे शादी किया जा रहा है और धर्म परिवर्तन भी कराया जा रहा है जोकि समाज और कानून की दृष्टि से गलत है। इसका वे लोग पुरजोर विरोध करते हैं। मनजीत सिंह जीके ने कहा कि कश्मीर में मोदी सरकार मैरिज एक्ट लागू करे तथा जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्ता कानून बनाए।
                    उन्होने कहा कि इस मामले में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। अगर भारत सरकार इस पर कानून नहीं बनाती तो उन लोगों का आंदोलन सड़कों पर अनवरत जारी रहेगा क्योंकि जुल्म अब सहन से बाहर हो रहा है और यह बीते 30 सालों से लगातार चल रहा है। मनजीत सिंह का कहना है कि साल 2018 में उन्होंने देश के तत्कालीन गृहमंत्री से मुलाकात करके कश्मीरी सिखों की परेशानियों के बारे में ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन अभी तक उसमें कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद भी सिखों को आज तक कश्मीरी शरणार्थियों के बराबर सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। जीके का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में सिखों की कुल आबादी करीब 5 लाख है और कश्मीर घाटी में कुल 32 सौ सिख रहते हैं. हालांकि उन लोगों की बड़ी उम्मीद थी कि धारा 370 हटने के बाद कश्मीर के सिखों का कुछ भला होगा. लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। उन्होने कहा कि शासन और प्रशासन बाहरी आतंकवाद से तो लड़ रहा है लेकिन अंदर-अंदर कश्मीर में जो चल रहा है इस पर ध्यान देने के लिए तैयार नहीं है।

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