नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- उत्तर दिल्ली के बुराड़ी इलाके से लापता हुए 14 वर्षीय किशोर को दिल्ली पुलिस ने तत्परता और सूझबूझ से ढूंढकर उसके परिवार से मिला दिया। यह पूरा घटनाक्रम ‘ऑपरेशन मिलाप’ के तहत अंजाम दिया गया। दरअसल, पढ़ाई के बजाय सोशल मीडिया और यूट्यूब में करियर बनाने की इच्छा को लेकर घर में हुए विवाद के बाद किशोर नाराज होकर घर से निकल गया था। परिवार को आशंका थी कि उसका अपहरण हो गया है, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
पिता की शिकायत पर तुरंत दर्ज हुआ मामला
11 जनवरी 2026 की सुबह बुराड़ी निवासी मोहन सिंह ने थाना बुराड़ी पहुंचकर अपने बेटे के अचानक गायब होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनका बेटा सुबह से घर पर नहीं है और किसी अनहोनी की आशंका है। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तुरंत गुमशुदगी और अपहरण की आशंका के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों ने मामले को संवेदनशील मानते हुए बिना देरी विशेष टीम गठित की।
विशेष टीम बनाकर शुरू की गई तकनीकी और फील्ड जांच
इंस्पेक्टर जसपाल के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों की एक समर्पित टीम बनाई गई, जिसमें पीएसआई प्रशांत, एएसआई प्रमोद, हेड कॉन्स्टेबल सुरेंद्र और हेड कॉन्स्टेबल संदीप को शामिल किया गया। टीम ने बच्चे के घरवालों से विस्तृत जानकारी जुटाई। जांच में पता चला कि किशोर अपने पिता का मोबाइल फोन साथ ले गया है और ऑनलाइन गेम्स व इंटरनेट का अधिक इस्तेमाल करता था। मोबाइल फोन कभी चालू तो कभी बंद मिल रहा था, जिससे अंदेशा हुआ कि वह लगातार सफर में है।
तकनीकी निगरानी के दौरान पिता के यूपीआई खाते से लेन-देन की जानकारी मिली, जिससे पुष्टि हुई कि मोबाइल का इस्तेमाल हो रहा है। लोकेशन ट्रैक करते-करते पुलिस को महाराष्ट्र और फिर कर्नाटक की दिशा में संकेत मिले।
रेलवे नेटवर्क की मदद से मिली अहम सफलता
मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने रेलवे मार्गों की पड़ताल की और जीआरपी व आरपीएफ से संपर्क साधा। ट्रेनों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। लगातार साझा की जा रही लोकेशन के जरिए पता चला कि किशोर ट्रेन के जरिए दक्षिण भारत की ओर बढ़ रहा है। आखिरकार 15 जनवरी की सुबह बेंगलुरु रेलवे स्टेशन पर रेलवे पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित हालत में ट्रेस कर लिया और अपनी निगरानी में रखा।
इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम और किशोर के पिता बेंगलुरु पहुंचे और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर बच्चे को सुरक्षित दिल्ली वापस लाया गया।
पूछताछ में सामने आई घर छोड़ने की वजह
पुलिस पूछताछ में किशोर ने बताया कि वह यूट्यूबर बनना चाहता था और मोबाइल से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करता था। माता-पिता द्वारा डांटने और मोबाइल छीन लेने से वह नाराज हो गया। इसी गुस्से में वह पिता का फोन लेकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचा और ट्रेन में बैठ गया। सफर के दौरान वह फोन ऑन करके ऑनलाइन भुगतान और वीडियो बनाता रहा। बेंगलुरु पहुंचने के बाद वह आगे तमिलनाडु जाने की योजना बना रहा था, लेकिन इससे पहले ही रेलवे पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
परिवार से मिलते ही भावुक हुआ माहौल
सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद किशोर को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। बच्चे के सकुशल मिलने पर परिवार ने राहत की सांस ली और दिल्ली पुलिस का आभार जताया। जांच में किसी आपराधिक या संदिग्ध गतिविधि के संकेत नहीं मिले, जिसके चलते केस को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
दिल्ली पुलिस की तेज कार्रवाई, तकनीकी सर्विलांस और अन्य राज्यों की पुलिस के सहयोग से यह रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा। अधिकारियों का कहना है कि समय पर उठाए गए कदमों से किसी भी अनहोनी को टाला जा सका और एक परिवार फिर से एकजुट हो पाया।


More Stories
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, SIR केस में बंगाल हाईकोर्ट को दिशा-निर्देश
धार्मिक भावनाओं के मामले में रणवीर सिंह को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत
मोदी की यात्रा से रक्षा सहयोग होगा और गहरा, आयरन डोम पर नजर
PF धारकों के लिए खुशखबरी, EPFO ने जोड़ी नई सुविधा
लखनऊ यूनिवर्सिटी में धार्मिक आयोजन को लेकर विवाद, दो गुट आमने-सामने
साउथ अफ्रीका से शिकस्त, टीम इंडिया के लिए करो या मरो की स्थिति