सोशल मीडिया पर दोस्ती के जाल में फंसाकर ठगी करने वाला अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह 

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930  
April 6, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-नाइजीरियन सरगना समेत चार गिरफ्तार

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    राजधानी दिल्ली के उत्तर जिले की साइबर पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए नाइजीरिया के एक विदेशी नागरिक सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह सोशल मीडिया के जरिए अकेले और भावनात्मक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाकर पहले उनसे दोस्ती करता था और फिर महंगे गिफ्ट, विदेशी करेंसी और पार्सल भेजने का लालच देकर कस्टम ड्यूटी, क्लियरेंस फीस और अन्य बहानों से लाखों रुपये ऐंठ लेता था। पुलिस की तकनीकी जांच और लगातार छापेमारी के बाद इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ।

दोस्ती से शुरू होता था ठगी का खेल
मामले की शुरुआत बुराड़ी निवासी 40 वर्षीय महिला की शिकायत से हुई, जिसने बताया कि एक व्यक्ति ने खुद को “नितिन पटेल” बताकर व्हाट्सऐप पर उससे संपर्क किया और कुछ दिनों तक बातचीत कर भरोसा जीता। बाद में उसने महिला को महंगे तोहफे, बैग, जूते और विदेशी मुद्रा भेजने का झांसा दिया। इसके बाद एयरपोर्ट से पार्सल छुड़ाने के नाम पर अलग-अलग शुल्क मांगे गए। महिला से किस्तों में करीब 4.20 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। जब संदेह हुआ तो उसने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

तकनीकी जांच से खुली परतें
साइबर थाने की विशेष टीम ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, व्हाट्सऐप डाटा, आईपी लॉग्स और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की। करीब 200 से अधिक मोबाइल नंबरों और कई बैंक खातों की जांच के बाद पुलिस को गिरोह के दिल्ली में सक्रिय होने के सुराग मिले। लगातार निगरानी और ट्रैकिंग के आधार पर सागरपुर, नजफगढ़ और बुराड़ी इलाके में छापेमारी की गई।

नाबालिग समेत तीन स्थानीय सहयोगी पकड़े गए
कार्रवाई के दौरान एक किशोर को पकड़ा गया, जिसने खुलासा किया कि वह दो युवकों—अंश और कुनाल—के लिए काम करता था। ये दोनों फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड जुटाकर विदेशी सरगना को बेचते थे। पूछताछ में पता चला कि इन खातों और सिम कार्डों का इस्तेमाल ठगी की रकम मंगाने और व्हाट्सऐप कॉल के लिए किया जाता था। इसके बाद पुलिस ने अंश और कुनाल को भी गिरफ्तार कर लिया।

नाइजीरियन मास्टरमाइंड गिरफ्तार
पुलिस ने आरोपियों के जरिए जाल बिछाकर विदेशी सरगना को फंसाया। जैसे ही वह एक तय स्थान पर पार्सल लेने पहुंचा, पुलिस टीम ने उसे दबोच लिया। उसकी पहचान कुलीबाली अमारा नामक नाइजीरियन नागरिक के रूप में हुई, जो पिछले कई वर्षों से दिल्ली में किराए के मकानों और चर्चों में रहकर इस ठगी नेटवर्क को चला रहा था।

भारी मात्रा में सामान बरामद
छापेमारी के दौरान 22 मोबाइल फोन, 14 सिम कार्ड (जिनमें तीन विदेशी सिम), एक डेबिट कार्ड, नोटबुक और कई फर्जी सोशल मीडिया व मैट्रिमोनियल प्रोफाइल से जुड़ा डाटा बरामद किया गया। पुलिस को अलग-अलग देशों के व्हाट्सऐप अकाउंट और कई नकली फेसबुक-इंस्टाग्राम प्रोफाइल भी मिले हैं, जिनका इस्तेमाल लोगों को फंसाने में किया जाता था। जांच में 10 और इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं।

ऐसे चलता था ठगी का तरीका
गिरोह पहले सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाता, फिर लोगों से दोस्ती कर भावनात्मक रिश्ता कायम करता था। इसके बाद गिफ्ट या विदेशी करेंसी भेजने का दावा कर कस्टम और क्लियरेंस फीस के नाम पर पैसे वसूले जाते थे। कई बार खुद को पुलिस अधिकारी बताकर डराया-धमकाया भी जाता था। रकम मिलने के बाद सिम और अकाउंट बदल दिए जाते थे, ताकि कोई सुराग न मिले।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से सावधान रहें और किसी भी प्रकार की ऑनलाइन मांग पर पैसे ट्रांसफर करने से पहले सत्यापन जरूर करें।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox