नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/बिहार/शिव कुमार यादव/- बिहार के मधुबनी से गुजरने वाला नेशनल हाईवे-227 इन दिनों सुर्खियों में है। इसकी वजह यह है कि हाइवे पर सड़क कम गड्ढे ज्यादा हैं। सबसे बड़ा गड्ढा तो 100 फीट का है। इस सड़क से छोटी गाड़ियों समेत ट्रक और डंपर जैसे बड़े वाहन भी गुजरते हैं, जिससे हादसों का डर बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 7 सालों से सड़क की ऐसी ही हालत है, लेकिन किसी को कुछ फर्क नहीं पड़ता। वहीं, सड़क बनाने वाला ठेकेदार फरार है।
यह हालत कलुआही-बासोपट्टी-हरलाखी से गुजरने वाले मुख्य मार्ग की है। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। ड्रोन से बने इस वीडियो को देखकर लोग तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं। एक यूजर ने पूछा कि सड़क कहां है? सभी जगह सिर्फ गड्ढे ही दिख रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि 2015 के बाद से ही यह सड़क पूरी तरह से जर्जर हालत में है। इसे बनाने के लिए अब तक तीन बार टेंडर जारी किया जा चुका है, लेकिन सभी ठेकेदारों ने कुछ दूर सड़क बनाने के बाद काम छोड़ दिया और फरार हो गए। इस हाईवे से कई बड़े राजनेताओं का आना-जाना लगा रहा, लेकिन किसी ने भी इसकी बदहाली पर ध्यान नहीं दिया। सरकार और विभागीय अधिकारियों ने भी इसकी अनदेखी की।

स्थानीय भाजपा विधायक अरुण शंकर प्रसाद ने सदन के जरिए तीन बार अलग-अलग सत्रों में सवाल उठाया, लेकिन नेशनल हाईवे के अधिकारियों को कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष परशुराम पूर्वे ने बताया कि बारिश में 500 दुकानों के मालिकों और 15 हजार परिवार को काफी परेशानी होती है। वहीं स्थानीय लोगों ने बताया कि बारिश के बाद सड़क पर बने गड्ढों में पानी भर जाता है। कई बार पानी घरों में भी घुस जाता है। जब पानी कम होता है तो कीचड़ की समस्या से जूझना पड़ता है। हर 20 फीट पर एक गड्ढा है। आलम यह है कि आधे घंटे का सफर पूर करने में दो घंटे का समय लग जाता है। व्यापारी वर्ग का कहना है कि सड़क की दुर्दशा के कारण व्यापार काफी प्रभावित हो रहा है। बाहर से सामान लेकर आने वाले चालक मना कर देते हैं, क्योंकि यहां सड़क में गड्ढे नहीं, गड्ढों में सड़क है। वहीं, एक स्थानीय होटल संचालक जीवछ महतो ने बताया कि सड़क जर्जर होने के कारण दुकान पर ग्राहक भी कम आते हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सबसे पहले सड़क बनाने के लिए आरसीडी ने टेंडर निकाला था। निर्माण कार्य एजेंसी ने कुछ किलोमीटर तक सड़क बनाई फिर काम बंद कर दिया। इसके बाद विभाग ने 6 बार सड़क की मरम्मत कराई। साल 2020 में यह सड़क छभ् जयनगर के अंदर आ गई। इसका टेंडर उसी साल करीब 28 करोड़ रुपए में हुआ। ठेकेदार ने समय-सीमा के अंदर काम नहीं किया। इस पर छभ्।प् ने उसे हटा दिया। मामला अब कोर्ट में चल रहा है।
सड़क निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार रवींद्र कुमार ने बताया कि मटेरियल का रेट बढ़ गया है। साथ ही विभाग द्वारा पेमेंट भी लंबित है। इस कारण सड़क अधूरी छूटी हुई है। वहीं, पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि मामला संज्ञान में आते ही जांच टीम का गठन किया गया है। अधिकारियों को जांच का आदेश दिया गया है।


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