अनीशा चौहान/- गंगा दशहरा और विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर आरजेएस पीबीएच और आरजेएस पॉजिटिव मीडिया का 368वाँ कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने संस्कृत श्लोक के साथ किया। हिंदी महिला समिति, नागपुर के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को समर्पित कई सारगर्भित प्रस्तुतियाँ दी गईं।
कार्यक्रम की शुरुआत समिति की अध्यक्ष रति चौबे की भावनात्मक कविता से हुई, जिसमें उन्होंने स्वार्थ में लिप्त मानवता की विनाशकारी प्रवृत्तियों को उजागर करते हुए प्रश्न उठाया – “जब अगली पीढ़ी सवाल करेगी, तो तुम क्या जवाब दोगे?” उन्होंने प्रो. रामदेव मिश्रा को भारत में पर्यावरण विज्ञान का जनक बताया।
डॉ. छाया श्रीवास्तव, एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, ने एक पेड़ के दृष्टिकोण से एक मार्मिक कविता सुनाई, जिसमें वनों की अंधाधुंध कटाई रोकने की अपील की गई। चंद्रकला भारतीया की कविता “सुनो धरा की करुण पुकार” ने पर्यावरणीय क्षरण की गंभीर स्थिति का चित्रण किया और प्लास्टिक से सौर प्लेटें बनाने का समाधान प्रस्तुत किया।
मलेशिया से जुड़ी लेखिका अपजिता राजौरिया ने अपने अनुभव और कविताओं के माध्यम से सूखती नदियों, सिकुड़ते महासागरों और गायब होते जंगलों के प्रति चेताया और परिवर्तन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
पाॅजिटिव मीडिया सेशन
त्रिपुरा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेषज्ञ सदस्य प्रो. चंदन घोष ने प्लास्टिक प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताते हुए रेलवे द्वारा अपनाई गई भस्मीकरण प्रणाली का उदाहरण दिया, जो “शून्य अपशिष्ट” सिद्धांत पर कार्य करती है। उन्होंने जल स्रोतों में प्लास्टिक और माइक्रोप्लास्टिक के दुष्प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
राजस्थान के पर्यावरणविद् कान सिंह निरवान ने कहा, “जल, गाय, प्रकृति और पृथ्वी एक हैं।” उन्होंने नंगे पाँव चलने, बैल-चालित चक्की जैसे पारंपरिक और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया।
प्रकृति भक्त फाउंडेशन के संस्थापक राजेश शर्मा ने कहा, “मेरा शरीर 100% प्राकृतिक है।” उन्होंने आंतरिक और बाहरी दोनों रूप से प्रकृति से जुड़ने की आवश्यकता बताई और “विचारों के प्रदूषण” को भी मानवता के लिए खतरनाक बताया।
कला, कविता और पर्यावरण का संगम
मधुबाला श्रीवास्तव ने हरित गीत प्रस्तुत किया। डॉ. कविता परिहार ने एक बच्चे के दृष्टिकोण से पर्यावरण की रक्षा का आह्वान किया। गार्गी जोशी, रश्मि मिश्रा, रश्मि अवस्थी, लक्ष्मी वर्मा, भगवती पंत, सुषमा अग्रवाल, निशा चतुर्वेदी, विमलेश चतुर्वेदी और सरिता कपूर सहित अनेक रचनाकारों ने कविता और गीतों के माध्यम से पर्यावरणीय संदेश साझा किए।
सभी ने वृक्षों, जल, वायु, ध्वनि और पृथ्वी के संरक्षण की अनिवार्यता पर बल दिया। कार्यक्रम में “पाँच तत्वों” और “धरती की पुकार” जैसे विषयों पर केंद्रित प्रस्तुतियाँ रहीं जो दर्शकों के दिलों को छू गईं।
भविष्य की पहलें
उदय कुमार मन्ना ने 14 और 15 जून को ‘बुजुर्गों’ पर कार्यक्रम, 22 जून को विश्व योग दिवस समारोह, तथा आगामी पुस्तक “ग्रंथ 5” के अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन की घोषणा की, जिसे 25 देशों और मंत्रालयों में भेजा जाएगा।
उन्होंने “टीफा” (टीम इंडिपेंडेंस डे फंक्शन अगस्त 2025) के अंतर्गत 78वाँ स्वतंत्रता दिवस भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ मनाने की योजना बताई, जिसमें माउंट आबू की संभावित आध्यात्मिक यात्रा भी शामिल होगी।
यह कार्यक्रम सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक हरित क्रांति की ओर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आह्वान था – जिसमें कविता, विचार, नवाचार और संकल्प के माध्यम से प्रकृति को बचाने का साझा प्रयास झलकता है।


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