नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- करनाल बाइपास स्थित गोपीनाथ सावित्री देवी फार्म हाउस में आयोजित भिवानी परिवार मैत्री संघ (बीपीएमएस) के वार्षिक ‘वनभोज-12’ कार्यक्रम ने सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रप्रेम की अनूठी मिसाल पेश की। हजारों परिवारों की भागीदारी से यह आयोजन किसी लघु भारत की झलक जैसा प्रतीत हुआ, जहां हर आयु वर्ग के लोगों ने कला, अध्यात्म, परंपरा और मनोरंजन के रंगों में डूबकर दिनभर उत्सव का आनंद लिया। कार्यक्रम की थीम ‘संघ की सौ वर्ष की यात्रा’ रही, जिसमें संगठन के मूल्यों और विचारधारा को जनमानस तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।
धार्मिक अनुष्ठानों से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ, गायत्री यज्ञ और गोपूजन से हुई। तिरंगा ध्वजारोहण और सैन्य बैंड की प्रस्तुति ने माहौल को देशभक्ति से भर दिया। शहीदों की स्मृति में युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जबकि यजमानों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया।
कला और सेवा गतिविधियों ने खींचा ध्यान
इस आयोजन में सामाजिक सरोकारों को भी प्रमुखता दी गई। मेगा मेडिकल कैंप, रक्तदान शिविर और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता की गई। संस्कार भारती के 26 कलाकारों ने देशभक्ति विषय पर चित्र प्रदर्शनी लगाई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। वहीं युवाओं ने तिरंगा टैटू बनाकर राष्ट्रप्रेम का संदेश फैलाया।

मनोरंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम
दिनभर चले कार्यक्रम में कविता, संगीत, एंकरिंग, खेलकूद और विभिन्न प्रतियोगिताओं ने लोगों को जोड़े रखा। तंबोला, क्विज, लकी ड्रा, अंताक्षरी और बच्चों के खेलों में भारी उत्साह देखने को मिला। प्रसिद्ध कवि-साहित्यकार मनोज मुंतशिर द्वारा प्रस्तुत डॉक्यूमेंट्री ने संगठन से जुड़ी भ्रांतियों पर तथ्यात्मक प्रकाश डाला। बीपीएमएस अध्यक्ष राजेश चेतन की प्रभावशाली मंच संचालन शैली ने माहौल को ऊर्जावान बनाए रखा, जबकि वरिष्ठ पदाधिकारी प्रमोद शर्मा ने भी बहुमुखी प्रतिभा से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

सदस्यता अभियान का आह्वान
संस्था के अध्यक्ष राजेश चेतन ने संबोधन में कहा कि संगठन की विचारधारा, संस्कार और राष्ट्रीय मूल्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए व्यापक सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि दिल्ली सहित अन्य क्षेत्रों में भी संघ की गतिविधियों को विस्तार दिया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना से जुड़ सके।
विशिष्ट अतिथियों और गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में यह कार्यक्रम सामाजिक सौहार्द, सेवा और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनकर उभरा, जिसने सभी प्रतिभागियों को एक सूत्र में बांध दिया।


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