नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- सस्पेंस और इमोशनल ड्रामा से भरपूर फिल्म ‘वध 2’ उन चुनिंदा फिल्मों में शामिल है, जो दर्शकों को शुरुआत से ही कहानी के साथ जोड़ लेती हैं और अंत तक उत्सुकता बनाए रखती हैं। पहली नजर में कहानी का अंदाजा लगाना आसान लगता है, लेकिन जैसे-जैसे घटनाएं आगे बढ़ती हैं, फिल्म पूरी तरह नया मोड़ लेती है। संजय मिश्रा, नीना गुप्ता, कुमुद मिश्रा और शिल्पा शुक्ला जैसे अनुभवी कलाकारों की मौजूदगी इसे अभिनय के स्तर पर बेहद मजबूत बनाती है। निर्देशक जसपाल सिंह संधू ने सधी हुई पटकथा और संतुलित निर्देशन के जरिए फिल्म को गंभीर और प्रभावशाली ट्रीटमेंट दिया है।

कहानी 1994 के दौर से शुरू होती है, जहां मंजू देवी को दोहरे हत्याकांड के आरोप में लंबी सजा सुनाई जाती है। वर्षों से जेल में बंद मंजू की जिंदगी में जेल गार्ड शंभुनाथ मिश्रा का खास स्थान है, जो हर परिस्थिति में उसका साथ देता है। इसी दौरान जेल में नए अधीक्षक की नियुक्ति होती है और एक अन्य कैदी के गायब होने की घटना पूरी कहानी को रहस्य में बदल देती है। मामले की जांच के लिए पुलिस अधिकारी की एंट्री होती है और यहीं से घटनाओं की परतें खुलने लगती हैं। फिल्म प्यार, विश्वास, लालच, हिंसा और बदले जैसी भावनाओं को बारीकी से दर्शाती है।
फिल्म की रफ्तार भले ही शुरुआत में थोड़ी धीमी लगे, लेकिन यही धीमापन कहानी की गहराई को मजबूत करता है। इंटरवल के बाद सस्पेंस तेज हो जाता है और क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते दर्शक पूरी तरह चौंक जाते हैं। अभिनय की बात करें तो नीना गुप्ता ने अपने शांत लेकिन प्रभावी अभिनय से किरदार में जान डाल दी है, वहीं संजय मिश्रा की सादगी भरी अदाकारी दिल छू लेती है। कुमुद मिश्रा और अन्य कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।
कुल मिलाकर ‘वध 2’ एक गंभीर और सोचने पर मजबूर करने वाली फिल्म है, जो बिना अनावश्यक मसाले के भी दमदार सिनेमा पेश करती है। सिनेमा प्रेमियों के लिए यह एक बेहतरीन अनुभव साबित हो सकती है।


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