रनहौला कंमाडर अस्पताल हादसे की पीड़िता ने पुलिस व अस्पताल पर लगाये आरोप

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930  
April 6, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

रनहौला कंमाडर अस्पताल हादसे की पीड़िता ने पुलिस व अस्पताल पर लगाये आरोप

-पति और बेटे के जाने के बाद अब तो कटोरा लेकर भीख मांगकर ही पेट भरना होगा

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- रनहौला स्थित कमांडर अस्पताल में बीते शुक्रवार दोपहर बाप बेटे समेत तीन की करंट लगने से मौत हो गई थी। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। तीनों की पहचान रमन, कंवरपाल और सर्वेश के रूप में हुई। रमन कंवरपाल का बेटा है। जिनके परिवार वालों ने शवों को सडक़ पर रखकर पुलिस और अस्पताल के खिलाफ प्रदर्शन किया। परिवार ने पुलिस पर अस्पताल वालों से मिलीभगत का आरोप लगाकर मामले में समझौता करने का आरोप लगाया। परिवार की मांग है कि उनको मुआवजा और रमन के छोटे भाई को सरकारी नौकरी दी जाए। उनका आरोप है कि अस्पताल प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने उनसे मिलने की भी नहीं सोची। बस उनको सडक़ से उठाने की प्लानिंग ही करती रही।

24 घंटे बाद भी नहीं पता चला कि कैसे हुई मौत-पत्नी
कंवरपाल की पत्नी राजकुमारी ने बताया कि 24 घंटे बाद भी उनको नहीं पता कि उनके पति और बेटे की करंट से मौत हुई है या फिर डूबने से या फिर उनको साजिश के तहत मार डाला है। कोई कुछ बताने को राजी रही हैं। हम गरीब इंसान इंसाफ के लिये कहां पर जाए। इंसाफ करने वाले ही अस्पताल अधिकारियों से ही बातचीत कर रहे हैं। घर के कमाने वाले चले गए। अब तो कटोरा लेकर भीख ही मांगनी पड़ेगी। छोटा बेटा विपिन को किसी तरह से पढाई करवा रहे थे पति। उसको बोल रखा था कि तू बस पढ़ाई कर और अच्छी
नौकरी करके हमारे बुढापे की लाठी बन जाना। रमन भी घर की आर्थिक स्थिति देखकर पढ़ाई छोडक़र काम सीखकर अपने पिता का साथ दे रहा था। अब कैसे घर चलेगा,नहीं पता।

जब फोन आया तो सोचा पापा बात करेंगे, लेकिन बताया हादसे के बारे में-बेटी
कंवरपाल की बेटी अर्चना ने बताया कि शाम को मां ने फोन कर हादसे की जानकारी दी थी। जब आए तो पता चला कि दोनों खत्म हो गए हैं। सुबह तो मैने बात भी की थी। उस वक्त नाश्ता कर रहे थे। वह पिता से शाम को जरूर फोन पर हाल चाल पूछती थी। जब शाम को फोन आया। उसको लगा कि पापा बात करेगें। लेकिन मां ने हादसे की जानकारी दी। जिसके बाद वह अस्पताल आई। सुबह मां को उत्तम नगर बाइक से छोडक़र पापा और भाई अस्पताल काम करने चले गए थे। पिता करीब  चार साल से अस्पताल में काम कर रहे थे। लेकिन अस्पताल मालिक पूरे पैसे नहीं दिया करता था। मालिक से कितने रुपये लेने हैं उसको नहीं पता, ये सब पिता को ही पता था। लेकिन कई हजार रुपये लेने थे।

बेटे को बचाने के लिये पिता और फिर जानकार टैंक के अंदर घुसे!
कंवरपाल के रिश्तेदारों ने बताया कि उनको किसी ने सही सही नहीं बताया है। लेकिन अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने बताया कि जब तीनों काम कर रहे थे। फायर वाटर टैंक में रमन सबसे पहले घुसा था,काम करने के लिये। उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर कंवरपाल रमन को बचाने के लिये घुसा,जैसे ही रमन का हाथ पकड़ा,उनको भी करंट लग गया। यह देखकर जब इलैक्ट्रिशियन सर्वेश कंवरपाल को बचाने के लिये उनको पकडऩे लगा। वह भी करंट की
चपेट में आ गया था। जिससे तीनों की वहीं पर मौत हो गई थी। कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर लाईट बंद की थी। मगर जब इस बारे में पुलिस अधिकारियों से पूछा,उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox