दिल्ली/सिमरन मोरया/- दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा इन दिनों सुर्खियों में हैं, क्योंकि उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सरकार कायम है। इसी क्रम में लोकसभा स्पीकर ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।
कमेटी में कौन-कौन होंगे शामिल?
इस कमेटी में एक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, एक हाई कोर्ट के न्यायाधीश और एक वरिष्ठ कानूनविद शामिल होंगे। स्पीकर ने बताया कि कमेटी अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजे जाने वाले महाभियोग प्रस्ताव से पहले तैयार करेगी। जस्टिस वर्मा के परिसर में आग लगने की घटना के बाद नगदी बरामद हुई थी, जिसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक की थी। कमेटी में न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति मनिंदर मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य को शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की
जस्टिस वर्मा को एक और झटका तब लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने अपने आवास से जला हुआ कैश मिलने के मामले की जांच समिति की रिपोर्ट को अमान्य घोषित करने की मांग की थी। साथ ही, उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी गई पद से हटाने की सिफारिश को भी चुनौती दी थी।


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