पाकिस्तान ने एक बार फिर इतिहास दौहराया, इस बार सेना ने नही विपक्ष ने कर दिया तख्ता पलट

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पाकिस्तान ने एक बार फिर इतिहास दौहराया, इस बार सेना ने नही विपक्ष ने कर दिया तख्ता पलट

-पाकिस्तान में नई सरकार के लिए कम नही होंगी चुनौतियां, भारत को भी सतर्क रहने की जरूरत
-नई सरकार के लिए चीन व अमेरिका में से एक को चुनने की होगी चुनौती
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- पाकिस्तान में आखिर जिसका डर था वही एकबार फिर हो गया। पाकिस्तान में आज तक कोई सरकार अपना कार्यकाल पूरा नही कर पाई, हरबार सेना ने उसका तख्ता पलट कर सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ली। लेकिन इस बार सेना पाक में घटे इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम से दूर रही फिर भी पाकिस्तान में इमरान सरकार का तख्ता पलट हो गया लेकिन इस बार सेना ने नही बल्कि विपक्ष ने सरकार का तख्ता पलट कर दिया।
               अब देखना यह है कि विपक्ष किसे पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनाता है। हालांकि अभी तक पीएमएल-एन नेता शहबाज शरीफ का नाम सबसे आगे है। बिलावल भूट्टो व मरियम नवाज भी उनके नाम की घोषणा कर चुके है। वहीं पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बेटे मखदूम जैन हुसैन कुरैशी ने उनके नाम का प्रस्ताव पेश किया है। आज के पाक के हालात को देखते हुए जो भी पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनेगा उसके पास कुछ ज्यादा विकल्प नही होंगे। नई सरकार की सबसे बड़ी चुनौती चीन व अमेरिका में से किसे चुनेंगी और भारत से उसके संबंध कैसे होंगे। भारत को भी पाक की नई सरकार से सतर्क रहना होगा क्योंकि शहबाज शरीफ पहले की कह चुके है कि कश्मीर के हल के बिना भारत से रिश्ते सामान्य नही हो सकते, वहीं जाते-जाते इमरान ने भारत की तारीफ के कसीदे पढ़ दिये जिसे लेकर भी पाकिस्तान में बवाल मचा हुआ है।
               पाकिस्तान में इस समय जो हालात हैं, वह नई सरकार के लिए भी चुनौती हैं। यहां महंगाई चरम पर है। मुद्रा भंडार खाली हो चुका है। विदेशी कर्ज बढ़ता जा रहा है और आर्थिक चुनौतियां सामने हैं। ऐसे में नई सरकार को आगे बहुत ही सूझबूझ से कदम बढ़ाने होंगे। दरअसल, नई सरकार के लिए एफएटीएफ की ग्रे सूची से भी बाहर निकलना एक चुनौती होगी, वहीं विश्व बैंक से भी पाकिस्तान ने काफी कर्ज ले रखा है। हालांकि, इमरान सरकार जाने के बाद नई सरकार के लिए अमेरिका बड़े पैकेज खोल सकता है। लेकिन इसके लिए उसे चीन से निपटना होगा।
              इस अविश्वास प्रस्ताव को लेकर देर रात नेशनल असेंबली में जमकर ड्रामेबाजी हुई। स्पीकर और डिप्टी स्पीकर ने पद से इस्तीफा दे दिया। सत्तापक्ष ने वॉकआउट कर दिया। आखिरकार, मतदान हुए और विपक्ष ने बहुमत साबित किया। ऐसे में क्या इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के पास अभी भी कुछ विकल्प बचे हैं? क्या सुप्रीम कोर्ट अभी भी कोई रास्ता निकाल सकता है? क्या फौज इसमें दखलंदाजी कर सकती और नए चुनावों की घोषणा पूरे समीकरण को बदल सकती है? आइए जानते हैं…
              सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार रात 12 बजे से पहले प्रस्ताव पर मतदान कराया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। कैसर और सूरी पर अदालती अवमानना की तलवार लटक रही थी। ऐसे में 12 बजे से ठीक पहले कैसर ने यह कहते हुए इस्तीफा देने की घोषणा कर दी कि, वह विदेशी साजिश का हिस्सा नहीं बन सकते और उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद स्पीकरों के पैनल से अयाज सादिक को सदन का संचालन करने के लिए आमंत्रित किया गया। सादिक ने पीठासीन अधिकारी का पद संभालने के बाद मतदान प्रक्रिया शुरू की। रात 11.58 बजे मतदान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। पीटीआई के सदस्य सदन छोड़कर चले गए। हालांकि इसके बाद फिर दो मिनट के लिए सदन स्थगित करना पड़ा क्योंकि कानूनन रात 12 बजे के बाद पिछले दिन का सत्र जारी नहीं रह सकता। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर सत्ता पक्ष की अनुपस्थिति में प्रस्ताव बहुमत से पारित हुआ। अब जानते हैं पाकिस्तान में आगे क्या?
               इमरान खान ने पहले तीन महीने में चुनाव कराने का आह्वान किया था। हालांकि, चुनाव आयोग पहले ही कह चुका है कि, तीन महीने में नए सिरे से चुनाव कराना संभव नहीं है। इस प्रक्रिया में कम से कम छह महीने का समय लगेगा। डॉन अखबार की खबर के मुताबिक, चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, हाल ही में निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन, खास तौर पर खैबर पख्तूनख्वा, जहां 26वें संशोधन के तहत सीटों की संख्या में वृद्धि की गई थी वहां मतदाता सूची में मिलान बड़ी चुनौती है। इस काम को पूरा होने में कम से कम तीन महीने का समय लगना है। इसके अलावा चुनाव सामग्री, बैलेट पेपर की व्यवस्था भी एक चुनौती है। दरअसल, वाटरमार्क और बैलेट पेपर्स देश में उपलब्ध ही नहीं हैं, जिनका आयात करना पड़ेगा।
               इमरान खान के पास कोर्ट जाने का विकल्प अभी भी खुला है। दरअसल, अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले नेशनल असेंबली के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर ने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद स्पीकर पैनल से अयाज सादिक को स्पीकर बनाकर सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई और उन्होंने ही मतदान प्रक्रिया शुरू की। स्पीकर का चयन विपक्ष की ओर से ही किया गया था। ऐसे में संवैधानिकता पर सवाल खड़े हो सकते हैं और पीटीआई कोर्ट का रुख कर सकती है। इससे पहले अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से बचने के लिए इमरान खान की पार्टी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका भी दायर की गई थी।
               पाकिस्तान में इमरान खान जनवरी से बदली सियासी हवा को भांप नहीं पाए। यह उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक विफलता मानी जा रही है। अब जब पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार गिर चुकी है। यहां नए प्रधानमंत्री का चुनाव होना है, लेकिन विपक्ष पहले से ही नवाज शरीफ के भाई और पीएमएल-एन नेता शहबाज शरीफ के नाम को आगे करती आई है। उनके नाम पर पूरा विपक्ष एकमत है और बिलावल भुट्टो व मरियम नवाज पीएम पद के लिए उनके नाम की घोषणा भी कर चुकी हैं।
               पाकिस्तान में घटे सियासी घटनाक्रम में सेना की दखल कराने की पूरी कोशिश की गई। हालांकि, अब तक सेना ने पूरे मामले से दूरी बना रखी है। खुद सेनाध्यक्ष कमर जावेद बाजवा कह चुके हैं कि, देश में घट रहे राजनीतिक घटनाक्रम से सेना का कोई लेना देना नहीं है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इमरान ने सेनाध्यक्ष कमर जावेद बाजवा के पास रक्षामंत्री परवेज खटक को दूत बनाकर मिलने भेजा था। सूत्रों ने बताया कि इमरान ने प्रधानमंत्री पद छोड़ने के लिए शर्त रखी थी कि इस्तीफे के बाद उन्हें या उनके किसी मंत्री को गिरफ्तार नहीं किए जाने की गारंटी सेना की तरफ से दी जानी चाहिए। इसके बावजूद अगर देश में अराजकता का माहौल बनता है तो सेना सत्ता को अपने हाथ में ले सकती है। यह पाकिस्तान में आम बात भी है।
                  पाकिस्तान में बदलती सियासत से भारत को सतर्क होने की जरूरत है। दरअसल, इमरान खान जब सत्ता में आए थे तो उन्होंने भारत से अच्छे रिश्ते बनाने की पेशकश की थी। हालांकि, बाद में कश्मीर मुद्दे पर इमरान खान ने भी वही पुराना राग अलापा था, लेकिन सत्ता जाते-जाते इमरान खान भारत की तारीफ में कसीदे पढ़ते देखे गए और विदेश नीति की काफी प्रशंसा की। अब तक उनकी सरकार गिर चुकी है और संभावना है कि शहबाज शरीफ के नेतृत्व में विपक्ष सत्ता में आ सकता है, तो इससे समीकरण बदलेंगे।
                बदली हुई सियासत पर अमेरिका और चीन भी नजरें लगाए बैठे हैं। दरअसल, इमरान खान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान के रिश्ते चीन से ज्यादा अच्छे हुए हैं और चीन ने यहां पर भारी निवेश भी किया है। उसकी कई परियोजनाएं पाकिस्तान में लंबित हैं। वहीं जब इमरान खान अमेरिका पर साजिश रचने का सीधे तौर पर आरोप लगा चुके हैं। अब अगर नई सरकार अमेरिका की तरफ एक कदम बढ़ाती है, तो चीन निवेश रोक सकता है। वहीं चीन की तरफ जाती है, तो उसे अमेरिका के गुस्से का भी शिकार होना पड़ सकता है।

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