नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उससे पहले प्रदेश की सियासत उफान पर है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह बंगाल दौरे पर हैं, जहां शनिवार 31 जनवरी 2026 को उन्होंने एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रदेश की टीएमसी सरकार पर जमकर हमला बोला है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार 31 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल में आयोजित एक जनसभा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार की विदाई तय है और वर्ष 2026 राज्य की राजनीति में बदलाव का साल होगा। शाह ने कहा कि बंगाल की जनता ने कभी वामपंथियों से छुटकारा पाने के लिए टीएमसी को सत्ता सौंपी थी, लेकिन आज वही सरकार भ्रष्टाचार, कट मनी, पुलिस के दुरुपयोग और घुसपैठ को बढ़ावा देकर राज्य को पीछे ले जा रही है। अमित शाह ने कहा कि साल 2026 टीएमसी को टाटा-टाटा बाय-बाय कहने का साल है।
अमित शाह ने हाल ही में आनंदपुर वेयरहाउस में हुए अग्निकांड का उल्लेख करते हुए इसे दुर्घटना नहीं, बल्कि राज्य सरकार के भ्रष्टाचार का परिणाम बताया। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। अमित शाह ने कहा कि ऐसी घटनाएं शासन की विफलता को उजागर करती हैं और आम लोगों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता नहीं रह गई है। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। शाह ने कहा कि आजादी की लड़ाई में शहीदों के अंतिम शब्द ‘वंदे मातरम’ थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने इसके 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में समारोह आयोजित करने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार घुसपैठियों को बचाने के लिए ‘वंदे मातरम’ का विरोध कर रही है, जो बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय पहचान के खिलाफ है। शाह ने सवाल किया कि क्या बंगाल की जनता इस विरोध को स्वीकार करेगी।
घुसपैठ का उठाया मुद्दा
घुसपैठ के मुद्दे पर गृह मंत्री ने कहा कि बंगाल में अवैध प्रवेश केवल राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराती, जिससे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को अपना काम करने में बाधा आती है। शाह ने बताया कि हाई कोर्ट ने इस मामले में बीएसएफ के पक्ष में फैसला दिया है, लेकिन इसके बावजूद जमीन नहीं दी जा रही क्योंकि घुसपैठिए सत्तारूढ़ दल के वोट बैंक हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के सत्ता में आते ही 45 दिनों के भीतर सीमा बाड़बंदी पूरी कराई जाएगी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
अमित शाह ने मतुआ समुदाय के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी मतुआ समाज को डराने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन भाजपा और केंद्र सरकार उनके साथ खड़ी है। शाह ने शांतनु ठाकुर का उल्लेख करते हुए कहा कि समुदाय को डरने की जरूरत नहीं है और उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकता से जुड़े कानूनों को तय नियमों के अनुसार लागू किया जाएगा, चाहे राज्य सरकार कितना भी विरोध क्यों न करे। टीएमसी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए शाह ने कहा कि राज्य में कट मनी, भतीजे की दबंगई, पुलिस का दुरुपयोग और घुसपैठ एक उद्योग बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल की जनता अब इस व्यवस्था से तंग आ चुकी है और बदलाव चाहती है। शाह ने कार्यकर्ताओं से आगामी चुनाव में पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया और कहा कि इस बार भाजपा का वोट शेयर 50 प्रतिशत से अधिक होगा और पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।
रावण से तुलना
अमित शाह ने अपने भाषण में ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जब भगवान श्रीराम ने राम सेतु का निर्माण किया था, तब रावण को भी लगता था कि उसे कोई हरा नहीं सकता, लेकिन अंत में सत्य की जीत हुई। इसी तरह, बंगाल में भी परिवर्तन तय है। शाह ने कहा कि 2026 टीएमसी को बाय-बाय कहने का वर्ष होगा और राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी। शाह ने कहा कि इस बार बंगाल में सरकार बनाना केवल राज्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि जनता भ्रष्टाचार, घुसपैठ और तुष्टीकरण की राजनीति से ऊपर उठकर विकास और सुरक्षा को प्राथमिकता देगी। अंत में उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने और बंगाल में बदलाव की शुरुआत करने का आह्वान किया।


More Stories
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, SIR केस में बंगाल हाईकोर्ट को दिशा-निर्देश
धार्मिक भावनाओं के मामले में रणवीर सिंह को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत
मोदी की यात्रा से रक्षा सहयोग होगा और गहरा, आयरन डोम पर नजर
PF धारकों के लिए खुशखबरी, EPFO ने जोड़ी नई सुविधा
लखनऊ यूनिवर्सिटी में धार्मिक आयोजन को लेकर विवाद, दो गुट आमने-सामने
साउथ अफ्रीका से शिकस्त, टीम इंडिया के लिए करो या मरो की स्थिति