नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- केंद्र सरकार ने नए लेबर कोड्स के तहत श्रम कानूनों में ऐतिहासिक बदलाव किया है। इसके अंतर्गत पहले 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को 4 नए लेबर कोड्स में समाहित किया गया है। इन नए नियमों का सबसे बड़ा असर ग्रेच्युटी और बेसिक सैलरी पर देखा जा रहा है।
बेसिक सैलरी का नया नियम
नए कानून के अनुसार, अब कर्मचारियों की बेसिक सैलरी उनके कुल CTC का कम से कम 50% होनी चाहिए या सरकार द्वारा भविष्य में नोटिफाई की जाने वाली प्रतिशतता के अनुसार तय की जाएगी। इसका सीधा असर पेंशन, PF और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा।
ग्रेच्युटी में बड़ा बदलाव
सबसे अहम बदलाव ग्रेच्युटी को लेकर हुआ है। पहले ग्रेच्युटी केवल 5 साल की नौकरी पूरी होने पर मिलती थी, लेकिन नए नियम के तहत इसे सिर्फ 1 साल की नौकरी के बाद भी दिया जाएगा। इससे कर्मचारियों को जल्दी फायदा मिलेगा और लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा भी बढ़ेगी।
ग्रेच्युटी कैलकुलेशन का तरीका
ग्रेच्युटी कैलकुलेशन का फॉर्मूला काफी आसान है। इसे निकालने के लिए कर्मचारियों की बेसिक सैलरी, वर्किंग यर्स और 15/26 का गुणक लगाया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है और उसने 1 साल काम किया है, तो उसके ग्रेच्युटी का अनुमानित रकम निकल जाएगी।
सरकार ने कहा है कि नए नियम से कर्मचारी लाभान्वित होंगे और कंपनियों को भी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। नए लेबर कोड्स कर्मचारियों के लिए अधिक पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।


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