नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- राजधानी दिल्ली में मेट्रो नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी योजना सामने आई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के फेज-4 विस्तार के तहत ग्रे लाइन को ढांसा स्टैंड से आगे बढ़ाकर हरियाणा के झज्जर जिले स्थित बाढसा AIIMS तक जोड़ा जाएगा। यह परियोजना दिल्ली और हरियाणा के सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।
6 नए स्टेशन और 20 किलोमीटर लंबा रूट
प्रस्तावित इस कॉरिडोर की लंबाई करीब 18 से 20 किलोमीटर बताई जा रही है, जिसमें कुल 6 नए मेट्रो स्टेशन बनाए जाने की संभावना है। इनमें ढांसा विलेज, रावता मोड़, ईसापुर, सारंगपुर, लोहारहेड़ी और बाढसा AIIMS जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। इस रूट पर रावता मोड़ को एक अहम जंक्शन के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे आसपास के गांवों को सीधा मेट्रो कनेक्शन मिलेगा।
ग्रामीण इलाकों को पहली बार मिलेगी मेट्रो सुविधा
इस परियोजना के शुरू होने से नजफगढ़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों—जैसे ईसापुर, लोहारहेड़ी और ढांसा—के हजारों लोगों को पहली बार मेट्रो की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर होगी।
AIIMS कनेक्टिविटी से बनेगा ‘मेडिकल कॉरिडोर’
इस मेट्रो विस्तार का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यह दिल्ली के AIIMS और हरियाणा के बाढसा स्थित AIIMS-2 को आपस में जोड़ेगा। इससे डॉक्टरों, मरीजों और मेडिकल स्टाफ के लिए आवाजाही आसान होगी और यह पूरा रूट एक ‘मेडिकल कॉरिडोर’ के रूप में विकसित हो सकता है।
2027-28 तक निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद
सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना पर फिलहाल व्यवहार्यता रिपोर्ट (फिजिबिलिटी स्टडी) और जमीन अधिग्रहण को लेकर शुरुआती चर्चा चल रही है। यदि केंद्र, दिल्ली और हरियाणा सरकार के बीच फंडिंग को लेकर सहमति बन जाती है, तो 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक निर्माण कार्य शुरू हो सकता है।
जमीन अधिग्रहण और योजना पर फोकस
इस मेट्रो कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण का काम हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और दिल्ली सरकार के समन्वय से किया जाएगा। चूंकि यह लाइन मुख्य रूप से एलिवेटेड (ऊपर से) बनने की संभावना है, इसलिए सीमित जमीन की जरूरत होगी, लेकिन डिपो के लिए बड़े भूखंड की तलाश जारी है।
रियल एस्टेट और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना के लागू होने से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण रियल एस्टेट सेक्टर में उछाल आने की संभावना है, साथ ही स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।


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