नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- दिल्ली पुलिस की द्वारका साउथ थाना टीम ने एक ऐसे संगठित वाहन ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर लोन वाले वाहनों को असली बताकर बेचने का धंधा बना रखा था। इस कार्रवाई से एक पूर्व सैनिक को तीन साल बाद इंसाफ मिला, जो इस गिरोह की धोखाधड़ी का शिकार होकर आर्थिक और कानूनी परेशानियों से गुजर रहा था। पुलिस ने लंबे समय तक तकनीकी निगरानी, मैनुअल ट्रैकिंग और कई राज्यों में दबिश देकर मुख्य आरोपी हरदीप सिंह रंधावा को उत्तर प्रदेश के पीलीभीत इलाके से गिरफ्तार किया।
पूर्व सैनिक के साथ ठगी की कहानी
शिकायतकर्ता संजीव कुमार, जो भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद सेकेंड हैंड कारों का कारोबार करते हैं, वर्ष 2023 में दो व्यक्तियों के झांसे में आ गए। आरोपियों ने खुद को सगे भाई बताकर एक इनोवा क्रिस्टा कार बेचने का सौदा किया। कागजी कार्रवाई और भुगतान के बाद गाड़ी खरीद ली गई, लेकिन बाद में पता चला कि वाहन पर बैंक का लोन बकाया था और कागजात फर्जी थे। इस वजह से खरीदार के साथ विवाद बढ़ा और संजीव कुमार व उनके पिता को जेल तक जाना पड़ा। अंततः उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाकर समझौता करना पड़ा।
जांच में खुला फर्जीवाड़े का नेटवर्क
मामले की जांच संभालने वाले पुलिस अधिकारियों ने पाया कि आरोपियों ने असली मालिक के आधार कार्ड से छेड़छाड़ कर नकली पहचान बनाई और फर्जी बैंक एनओसी तैयार कर वाहन को क्लियर दिखाया। आरटीओ रिकॉर्ड में भी हेरफेर कर गाड़ी को वैध साबित किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बदलकर इसी तरह लोन वाली गाड़ियों को बेचते थे।
1200 किलोमीटर पीछा, जंगलों में ऑपरेशन
आरोपियों की तलाश में पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश और पंजाब के कई जिलों में लगातार छापेमारी की। पीलीभीत टाइगर रिजर्व और शिवालिक की तराई वाले दुर्गम इलाकों में भी पुलिस ने अभियान चलाया। कड़ाके की ठंड, घने जंगल, मोबाइल नेटवर्क की कमी और जंगली जानवरों के खतरे के बावजूद टीम ने हिम्मत नहीं हारी। करीब 1200 किलोमीटर तक ट्रैकिंग के बाद नेपाल सीमा के पास देर रात छापेमारी कर हरदीप सिंह रंधावा को दबोच लिया गया।
आरोपी का आपराधिक इतिहास
पूछताछ में आरोपी ने अपने साथी सतेंद्र पाल सिंह के साथ मिलकर कई राज्यों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए वाहन बेचने की साजिश कबूली। दोनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी, जालसाजी और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। हरदीप पिछले तीन साल से फरार चल रहा था, जबकि उसका साथी अब भी पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा है।
पुलिस की सराहनीय कार्रवाई
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी न केवल एक बड़े गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने में सफल रही है, बल्कि एक पूर्व सैनिक को न्याय दिलाने की दिशा में भी अहम कदम है। फरार आरोपी की तलाश में छापेमारी जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही पूरे गिरोह का सफाया कर दिया जाएगा।


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