तू है तो मुझे क्या चाहिए!प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो

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तू है तो मुझे क्या चाहिए!प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो

ट्विंकल आडवाणीबिलासपुर, छत्तीसगढलास्ट/ – ईयर वैलेंटाइन डे पर मेरे बेटे ने जो 7 साल का है एक कार्ड बनाकर दिया उसमें लिखा था आई लव यू मां। देते समय वह बहुत खुश था और उत्साहित था मानो कोई नया और अलग काम कर रहा हो, उसकी खुशी देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही थी। मैंने उसे बहुत प्यार किया।

प्यार.. कहते हैं दुनिया प्यार और विश्वास पर ही टिकी है जो हर रिश्ते की नींव है। जब हम किसी से प्यार करते हैं तो उसका सम्मान करते हैं। प्यार हर रिश्ते में होता है चाहे वह मां बच्चे का हो, पति-पत्नी का हो, प्रेमी प्रेमिका का हो ,एक दोस्त का हो,गुरु शिष्य का हो , प्यार के बिना कोई रिश्ता नहीं, प्यार बयां करने का सब का अपना तरीका है। कोई आपको गिफ्ट देगा ,तो कोई फूल, कोई आपकी बातें मानेगा, कोई खाना खिलाएगा तो कोई घूमने ले जाएगा कहने का मतलब सामने वाला आपको अहमियत देगा, सम्मान देगा, समय देगा और यही प्यार है।
प्यार लोगों को बांधे रखता है जब हम एक संगठन में होते हैं एक दूसरे के प्रति सम्मान, आदर रखते हैं तो यह एक तरह का प्यार ही है। जब समाज में हम प्यार की भावना रखते हैं किसी की छोटी-छोटी गलतियों को माफ करते हैं तो समाज और संगठन आगे बढ़ता है। प्यार हर जगह हर रूप में है ,प्रकृति भी एक प्यार है ईश्वर का।
हमें प्यार के रूप में तोहफा मिला है प्रकृति का नदिया, पशु पक्षी और खाने के लिए हजारों करोड़ों चीजें ।
वास्तव में प्यार में हर कोई सुधरता है। जब दो लोगों में आपस में प्यार होता है तो वो उसे आगे बढ़ाते हैं, सुधारते हैं। हम गलत आदतों को रोकते हैं जीवन को प्यार एक नई दिशा प्रदान करता है।
कई खबरें देखी सुनी होगी आपने जिसमें आजीवन कारावास काट रहे कैदियों को आध्यात्मिक प्यार से जोड़कर उनके जीवन को बदला गया ऐसी कहानी हमारे समाज में आसपास है और सिर्फ प्यार से ही परिवर्तन किया गया।
प्रेम एक ऐसा भाव है भावना है एहसास है जिसे दिल से महसूस किया जा सकता है और प्रेम स्वीकार्यता सिखाता है। प्रेम समर्पणता सिखाता है। प्रेम त्याग सिखाता है प्रेम एक साधना है, प्रेम व अलौकिक अदभुत आनंदत्तम अनुभूति है जो हमें दिल की खुशी देता है और उस खुशी में सर्वस्व समाया रहता है।
आज डिप्रेशन ,हार्ट अटैक के कई मरीज है। मानसिक शाररिक कई ऐसी बीमारियां जिसका कारण प्यार का अभाव है , ओवरथिंकिंग है। प्यार एक टॉनिक की तरह है जो आपको स्वस्थ रखता है। मां जब अपने बच्चों को छोड़कर जाए तो वह रोता है उसके आते ही हंसते लगता है । घर के बड़े अपने बच्चों को देखकर लाड जताते हैं खुश होते हैं यही तो प्यार है। प्यार जब प्रेमी प्रेमिका के बीच हो और राधा कृष्ण का नाम ना हो तो ऐसा हो ही नहीं सकता। राधा ने कृष्ण से कहा कि आप मुझसे शादी क्यों नहीं करते तो कृष्ण कहते हैं क्या कोई अपनी आत्मा से शादी करता है कृष्ण राधा के प्यार अद्भुत था आज भी कृष्ण का नाम राधा के बिना अधूरा है राधा आजीवन कृष्ण के प्रति समर्पित रही।
प्यार शब्द बहुत ही पॉजिटिव है। प्यार पर न जाने कितनी कहानियां , गाने ,शायरियां फिल्में बनी सभी 99% प्यार पर आधारित है।
पवित्रतम शुद्ध सच्चा शाश्वत प्यार आकर्षण से परे समर्पण भाव में होता है, ईश्वर और उनके द्वारा रचित सृष्टि से प्यार , जो कभी बदले नहीं बल्कि निरंतर बढ़ता ही रहे..जैसे मां का वात्सल्य भरा प्रेम, शिष्य का गुरु से प्रेम।जब प्यार ईश्वर से होता है तो आध्यात्मिक प्यार है हमारे सारे अवगुण मिट जाते हैं। प्यार व्यक्ति को आंतरिक रूप से मजबूत बनाता है, बदलता है अक्सर बीमार व्यक्ति को लोग प्यार से ही ठीक कर सकते हैं क्योंकि प्यार में एक का समर्पण होता है तो सामने वाले की जीने की चाहत बढ़ती है ।
कुछ सालों से प्यार शब्द सिर्फ प्रेमी प्रेमिका तक सीमित होने लगा है। जब प्यार भौतिक सुख आकर्षण के रूप में हो तो कुछ समय तक ही रहता है आजकल ज्यादातर कपल देखेंगे जो कुछ समय बाद में रिश्ता तोड देते हैं ज्यादातर प्रेमी प्रेमिका होते हैं उनका जल्दी ब्रेकअप हो जाता है।
ऐसा प्यार सिर्फ आकर्षण है जिसमें ना समर्पण होता है न अपनत्व शायद इसलिए ज्यादातर रिशते टूटने लगे हैं ।
हमारी संस्कृति में मीरा का कृष्ण से प्रेम सर्वोच्च प्रेम की परिभाषा बयां करता है परंतु विडंबना यह है कि आजकल प्रेम की अभिव्यक्ति एक छलावा मात्र है… हमारी संस्कृति में प्रेम मात्र एक दिवसीय नहीं जन्मो जन्मो तक युगों युगों तक गायन योग्य नमन योग्य रहा है, और रहेगा,जिनका उल्लेख शास्त्र किया करते हैं और जब प्यार में सिर्फ स्वार्थ और दिखावा हो तो एक विकृति का जन्म होता है जो वर्तमान में देख रहे है। एक तरफा प्यार है किसी पर एसिड अटैक कर दिया तो किसी ने मर्डर कर दिया किसी ने अपने ही प्रेमिका के टुकड़े करके फ्रीजर में रखे प्यार में ऐसी विकृति हो ही नहीं सकती। जहां प्यार का अभाव और स्वार्थ हो वहां विकृति का जन्म होता है।
जब मां बच्चे का प्यार कम होता है और मां का समर्पण कम होता है तो बच्चे चिड़चिड़े और आक्रामक हो जाते हैं। संवेदना उनके अंदर कम होती है ।जब बच्चों का मां-बाप के प्रति प्यार कम होता है तो मां बाप वृद्ध आश्रम पहुंचते हैं, जब पति पत्नी का प्यार कम होता है तो परिवार टूटता है ।जब प्रेमी प्रेमिका का प्यार कम होता है स्वार्थ होता तो हवस का रूप होता है। बदले की भावना होती है और जब अपने ईश्वर और गुरु के प्रति प्यार कम होता है तो व्यक्तिगत पथभ्रष्ट होता है।
प्यार हर समय हर रिश्ते में होता है प्यार से हर रिश्ता खूबसूरत बनता है हर रिश्ते में एक मर्यादा हो तो रिश्ता लंबे समय तक चलता है।

प्रेम करना गलत नहीं मगर नैतिकता परिवार के विरुद्ध जाकर अपने प्रेम को पाने का जतन करना गलत है। कुछ वर्षों से ऐसे कई किस्से सुनाने में आते हैं कि शादीशुदा व्यक्ति ने दूसरी शादी कर लिया पत्नी भाग गई पति का किसी से अफेयर है यह समाज को गलत संदेश देते हैं।स्वार्थ है अगर प्यार होता तो बाकी हजारों रिश्तों से जुड़े हैं उनसे भी प्यार होता और सम्मान की भावना होती खुद को सिर्फ अहमियत देना गलत है।
प्रेम बहुत ही सुंदर और गहरा शब्द है इसे एक दिन मनाकर अगर खुशी मिलती है तो वैलेंटाइन डे मनाइए। इस दिन को मातृ-पितृ दिवस के रूप में मनाया जाता है।
मुझे एक गाना याद आ रहा है जो मेरा बहुत फेवरेट है तू है तो मुझे क्या चाहिए …. प्यार करने वाले आसपास लोग हो तो जीवन में कहीं कुछ नहीं चाहिए होता क्योंकि प्यार में व्यक्ति इतना समर्थ पॉजिटिव होता है कि सब कुछ पा लेता है।
प्रेम काम वासना नहीं एक ऊर्जा है जो आनंद की ओर बहती है….
हैप्पी वैलेंटाइन डे
तू है तो मुझे क्या चाहिए।

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