मानसी शर्मा /- हाल ही में केंद्र सरकार ने पांच भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मराठी, बंगाली, पाली, प्राकृत और असमिया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है। जिसके बाद बिहार की भोजपुरी भाषा को भी आधिकारिक दर्जा देने की मांग उठने लगी है। बता दें कि बिहार में सबसे ज्यादा भोजपुरी बोली जाती है।
अब महागठबंधन के दल राजद, कांग्रेस और भाकपा ने कहा कि वो संसद में भोजपुरी को आधिकारिक भाषा देने की मांग करेंगे। बता दें कि भोजपुरी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग बहुत पहले से चली आ रही है। तमिल, संस्कृत, तेलगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिशा को पहले ये दर्जा मिल चुका है। अब ऐसी भाषाओं की संख्या 11 हो गई है।
बिहार में खूब बोली जाती है भोजपुरी
बता दें कि बिहार के भोजपुर, रोहतास, कैमूर, बक्सर, सारण, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान और जहानाबाद जैसे जिलों तथा झारखंड के कई हिस्सों में व्यापक रूप से भोजपुरी बोली जाती है। ये बातें भाकपा माले के लोकसभा सांसद सुदामा प्रसाद ने कही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले पर चुप है। संविधान की आठवीं सूची में अब 22 भाषाएं है। सुदामा प्रसास ने कहा कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार को भोजपुरी भाषा को दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट भेजनी चाहिए।
राजद का गंभीर आरोप
वहीं बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह ने केंद्र सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी को संविधान की आठवीं सूची में शामिल करनी चाहिए। इससे पहले हमने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था लेकिन नीतीश कुमार की सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी ने कहा कि यह भोजपुरी बोलने वाले लोगों की सबसे पुरानी मांगों में से एक है। उन्होंने कहा कि आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने से किसी भी भाषा को लाभ पहुंचता है।


More Stories
उत्तराखंड: विकास परियोजनाओं की सौगात के साथ 28वीं यात्रा
नोएडा में बेकाबू हुआ मजदूरों का गुस्सा, कई गाड़ियों में आगजनी
आरजेएस पीबीएच का 538वां राष्ट्रीय वेबिनार संपन्न
अंतरराज्यीय ऑटो-लिफ्टर गैंग का पर्दाफाश, 6 बाइक बरामद
द्वारका जिले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, शातिर वाहन चोर गिरफ्तार
250 CCTV खंगालकर चेन स्नैचिंग करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार