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February 28, 2026

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किसानों को खेती में आधुनिक तकनीक का करना चाहिए समावेश- अश्विनी कुमार

-संयुक्त सचिव कृषि मंत्रालय ने केंद्र सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं की दी जानकारी -कृषि मेले में करीब 500 किसानों ने लिया भाग, कृषि उत्पादों से जुड़ी कंपनियों ने लगाये किसानों के लिए स्टॉल

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- कृषि विज्ञानं केंद्र राष्टींय बागवानी अनुसन्धान विकास प्रतिष्ठान उजवा ने कृषि विज्ञानं केंद्र के परिसर में एक दिवसीय किसान मेला का आयोजन भारत सरकार की परियोजना फसल अवशेष का स्व-स्थान प्रबंधन के अंतर्गत किया गया। जिसमे लगभग 500 कृषक, प्रसार कार्यकर्त्ता, उद्यमी, सरकारी, संस्थान बीज एवं खाद बनाने वाली कंपनियों ने भागेदारी की। इस मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि “माननीय श्री अश्विनी कुमार, संयुक्त सचिव, कृषि एव किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. बिजेन्द्र सिंह, अध्यक्ष, राष्टींय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, दिल्ली ने की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रुप डॉ. अशाक कुमार सिंह, निदेशक, भारतीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, पूसा, नई दिल्ली, भारत सरकार एवं श्री पवन कुमार एवं श्री राहुल राज विशेषज्ञ भारतीय मानक ब्यूरों, नई दिल्ली उपस्थित हुए।

कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर डॉ. पी. के. गुप्ता, अध्यक्ष, कृषि विज्ञानं केंद्र एवं निदेशक, एन.एच आर. डी. एफ., नई दिल्ली, ने मुख्य अतिथि सहित माननीय अतिथिगण, कृषक बंधु, मीडिया कर्मी व प्रदर्शनी लगाने वाली संस्थानों व कम्पनियों का स्वागत करते हुए कृषि विज्ञानं केंद्र के द्वारा किसान मेला के आयोजित करने के उद्देश्य के बारे मे ंविस्तृत जानकारी दी। मेले का उद्धघाटन करते हुए मुख्य अतिथि श्री अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि भारत सरकार की यह योजना चार राज्य पंजाब, उत्तरप्रदेश, हरियाणा एवं दिल्ली में संचालित हो रही है जिसमें किसानों को व्यक्गित रुप से मशीनें खरीदने पर 50 प्रतिशत का अनुदान एवं कस्टम हाइरिंग सेन्टर स्थापित करने के लिए 80 प्रतिशत का अनुदान केंद्र सरकार दे रही है। इससे किसानों ने काफी मात्रा में पराली प्रबंधन करने वाले यंत्रों का इस्तेमाल किया जिससे पराली की समस्या कम हुई है। उन्होनें कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्रों के द्वारा विभिन्न सुचना एवं संचार गतिविधियॉ जैसे जागरुकता कार्यक्रम, किसान मेला, किसानों के प्रक्षेत्र पर प्रदर्शन एवं विधार्थियों के द्वारा भी जन जन तक पराली के जलाने से होने वाले नुकसान के संदेश दे रहे है।

श्री कुमार नें भारत सरकार की विभिन्न योजनाएं जैसे जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, मिनी सीड कीट, किसान सम्मान निधि योजना, सिचाई योजना आदि के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाई एवं उन्होनें कहा कि किसान भाईयों को खेती की आधुनिक तकनिकी से जुड़कर अपनी लागत में कमी लाकर आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते है। श्री अश्विनी कुमार जी ने केन्द्र की सभी गतिविधियॉ का भ्रमण करके विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हुए कहा कि केन्द्र राष्टींय राजधानी क्षेत्र में काफी अच्छा कार्य कर रहा है व यहा पर स्थापित सोलर फार्म प्रदर्शन इकाई सोलर के साथ खेती को नई दिशा प्रदान करेगी।

डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कृषि़ विज्ञान केन्द्र के द्वारा राष्टींय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को पर्यावरण के प्रदूषण से मुक्त करने की पहल की प्रशंसा की एवं किसानो को धान की पराली जलाने से मृदा, पर्यावरण एवं प्रदुष़ण से स्वास्थ्य पर होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दीं एवं भारतीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो का कृषि के आनुवंशिक सुधारों एवं फसलों की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसी क्रम मेंभारतीय मानक ब्यूरों, नई दिल्ली के पदाधिकारी पवन कुमार द्वारा कृषि यंत्रों के मानकीकरण, अंकन एवं गुणवत्ता प्रमाणन के बारे में विस्तृत जानकारी दी एवं बताया कि किसानों को किस प्रकार से नकली कृषि आदानों एवं उपकरण से बचना चाहिए एवं किस प्रकार मानकीकरण व गुणवत्ता युक्त उत्पादों की पहचान करें। इसके साथ ही उन्होंने ब्यूरो द्वारा बनाए गए बी.आई.एस. केयर एप के बारे में तकनिकी जानकारी दी।

डि-हुमिफाइड बीज भंडारण इकाई एवं जैविक खेती प्रशिक्षण का उद्धाटन माननीय श्री अश्विनी कुमार जी केन्द्र में एकीकृत बागवानी विकास मिशन, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की वित्तीय सहायता से स्थापित डि-हुमिफाइड बीज भंडारण इकाई का उद्धाटन किया। इस इकाई का मुख्य उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता युक्त बीज उपलब्ध करवाना है एवं श्री कुमार ने केन्द्र के द्वारा 21 दिवसीय जैविक खेती विषय पर व्यवसायिक प्रशिक्षण का शुम्भारम किया एवं सफलता की कामना करते युवाओं को जैविक खेती से जुडनें का आहवान किया। ़

तकनीकी सत्र के दौरान केन्द्र के विशेष़ज्ञ श्री कैलाश, विशेष़ज्ञ कृषि़ प्रसार ने कहा कि विगत 04 वर्षों से कृषि विज्ञान केंद्र, दिल्ली के विभिन्न प्रयासो से दिल्ली मे ंपराली जलाने के शून्य मात्र परिणाम सामने आये है एव ंकिसानों ने पराली प्रबंधन वाली मशीनों जैसे हैप्पी सीडर, सुपर सीडर एवं जीरो-सीड-कम-फर्टिलाइजर डिंल आदि से गेहूं की सीधी बुवाई का अभिग्रहण किया है जिससे किसानों को अनेक लाभ प्राप्त हुए। डॉ. समरपाल सिंह विशेष़ज्ञ सस्य विज्ञान ने धान की सीधी बुवाई एवं जैविक खेती करने के बारें में विस्तृत जानकारी साझा की एवं डॉ. जय प्रकाश विशेषज्ञ पशुपालन ने किसानो ंको पशु आहार, प्रबंधन एवं टीकाकरण एवं ग्रीष्म कालीन पशुओं के रखरखाव की विस्तृत जानकारी दी। श्री राकेश कुमार विशेष़ज्ञ बागवानी ने छत एवं गृह वाटिका के बारे विस्तृत जानकारी साझा की। कार्यक्रम के शुरुआत में माननीय अतिथिगणों ने केन्द्र की विभिन्न इकाई का भ्रमण एवं अवलोकन किया एव ंकेन्द्र की विभिन्न प्रसार पत्रिकाओं जैसे सोलर फार्म प्रदर्शन इकाई, पशुओं का आहार प्रबंधन एवं कृषि़ वाहिनी का विमोचन करवाया। कार्यक्रम के दौरान माली एवं सहायक माली वर्कर कौशल विकास प्रशिक्षण, मधुमक्खी पालन एवं फल एवं सब्जियों का प्रसंस्करण एवं परिरक्षण के प्रशिक्षुकों को प्रमाण पत्र दिया गया एवं किसान मेला के सभी प्रतिभागियों को छत एव ंगृह वाटिका के लिए किचन गार्डन किट का वितरण किया गया।

इस कार्यक्रम को सफल करने में डॉ ऋतू सिंह,, डॉ. डी.के. राणा, डॉ. समर पाल सिंह, डॉ. जय प्रकाश, श्री बृजेश कुमार, श्री. सुबेदार पाण्डे, श्रीमति मन्जु, श्री आत्माराम, श्री विशाल, श्री सुधीर सिंह, श्री संजय सिंह, डॉ. शरद तिवारी एवं श्री सुभाष तिवारी का सहयोग सहरानीय रहा। इस कार्यक्रम नजफगढ़, अलीपुर, बवाना, नरेला, बिजवसान मंडलों के किसानों ने भारी संख्या में भाग लिया।

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