कमजोर पड़ा पश्चिमी विक्षोभ, दिल्ली में पहाड़ों से ज्यादा ठंड,

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कमजोर पड़ा पश्चिमी विक्षोभ, दिल्ली में पहाड़ों से ज्यादा ठंड,

-फिर बढ़ेगी सर्दी, आने वाला है सर्दी का दूसरा दौर

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- दिल्ली में बीते नौ दिन तक पारा लगातार न्यूनतम स्तर पर बना हुआ है। हालांकि बुधवार से मौसम विभाग ने सर्दी की ठिठूरन से राहत के संकेत दिये थे लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ जाने से दिल्ली एनसीआर में सर्दी का एक और दौर आने की संभावना जताई जा रही है। वही इस साल सर्दी ने पिछले 10 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। दिल्ली-एनसीआर में पिछले 10 दिन से सबसे लंबी शीत लहर चली है। सर्दी का आलम यह है कि शिमला, मसूरी सरीखे पहाड़ पर बसे शहरों से कम तापमान दिल्ली-एनसीआर का रिकॉर्ड किया जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो पहाड़ों से आने वाली हवाओं के दिल्ली-एनसीआर के स्थानीय मौसमी दशाओं से मिलने के बाद सर्दी ज्यादा मारक साबित हुई है। इन दिनों में पश्चिमी विक्षोभ का कमजोर रहना इसको और भी ज्यादा गंभीर बना रहा है।
                 मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के लगातार कमजोर रहने से नवंबर के बाद से दिल्ली में बारिश नहीं हुई है। वहीं, पहाड़ों से लगातार उत्तर पश्चिमी ठंडी हवाएं आती रहीं। पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव कम होने से मौसम में खास उतार-चढ़ाव नहीं आए और सर्दी बढ़ती रही। बादल भी उस तरह से नहीं हैं। वहीं, ठंड के मौसम और घने कोहरे के कारण यहां शीत लहर का ज्यादा असर देखने को मिला। दिन होते-होते यह धुंध 100-300 मीटर ऊपर उठकर हल्के बादल बना लेती है। ऐसे में जमीन पर तापमान कम ही रहता है और धूल के कण के साथ नमी भी बनी रहती है। आसमान में फैले ये हल्के बादल सूरज की किरणों को धरती तक आने से रोकते हैं। इस वजह से जमीन पर धूप नहीं आ पाती है और तापमान कम हो जाता है। साथ ही ठंड हमेशा बनी रहती है। आसिफ का कहना है कि जो चीज जितनी देर में ठंडी होती है, वह उतनी देर से गरम होती है।
             कई बार दिन में भी इसका असर रहता है। इससे सूर्य की तपिश हल्की हो जाती है। जबकि पहाड़ों पर ऐसा नहीं होता। वहां धूप खिलने पर तापमान बढ़ जाता है। यही वजह है कि सर्दियों में कई बार दिल्ली-एनसीआर का तापमान पहाड़ के शहरों से भी ज्यादा कम हो जाता है।

आने वाला है सर्दी का दूसरा दौर
कुलदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि अभी जो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है उसका असर 13 जनवरी तक रहेगा। इसी कारण से दिल्ली में शीत लहर से राहत मिलेगी। तापमान में गिरावट भी नहीं होगी। 14 जनवरी के बाद तापमान में फिर गिरावट होनी शुरु हो जाएगी। वह कितनी होगी, यह कहना मुश्किल है। मालूम हो कि मंगलवार को भी दिल्ली से ज्यादा न्यूनतम तापमान शिमला व देहरादून में 7.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

पूरे उत्तर भारत में रहता है असर
विशेषज्ञ बताते हैं कि दिल्ली जैसा हाल ही राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा के इलाकों में रहता है, क्योंकि पश्चिमी हवा का असर यहां भी होता है। पहाड़ों से आने वाली हवाएं काफी सर्द होती है। सर्द हवाएं ही दिल्ली में ठंड लेकर आती है। फिर, दिल्ली के आस-पास कई पहाड़ी क्षेत्र हैं और उन पहाड़ी क्षेत्रों के मौसम का दिल्ली के मौसम पर भी काफी असर पड़ता है।

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