इस्कॉन द्वारका में गीता जयंती महोत्सव, आओ भगवान श्री कृष्ण के प्रिय बन जाएँ

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इस्कॉन द्वारका में गीता जयंती महोत्सव, आओ भगवान श्री कृष्ण के प्रिय बन जाएँ

-23 दिसंबर को हवन यज्ञ में गीता के 700 श्लोकों द्वारा दी जाएगी आहुति -मोक्षदा एकादशी गीता जयंती यज्ञ समारोह में 5000 भक्तों की भागीदारी

द्वारका/शिव कुमार यादव/- जो लोग जीवन के सत्य को जानना, अपनी बुद्धि को परिष्कृत करना और अपनी चेतना को जगाना चाहते हैं, उनके लिए भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को कही गई ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ जीवन की एक मानक संदर्भ पुस्तिका यानी ‘लाइफ मैनुअल’ है। हमारी दिनचर्या में मन को वश में करना, ध्यान, संयम, आसक्ति, विरक्ति आदि गुण ऐसी बातें हैं, जो हमें सीखनी पड़ती हैं और उसी के अनुरूप हमारे व्यक्तित्व का निर्माण होता है। अनेक ऐसी बातों, नियम-संस्कारों को आत्मसात करती इस श्रीमद्भगवद्गीता की जयंती को बहुत धूमधाम से 23 दिसंबर को इस्कॉन द्वारका द्वारा गीता जयंती के रूप में मनाया जा रहा है।

इस बार यह इसलिए भी खास है क्योंकि मोक्षदा एकादशी के दिन यह तिथि मनाई जा रही है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसलिए हम सब भगवान द्वारा कहे गए इस श्लोक रूपी गीत को सुनते हैं, आहुति देते हैं। मंदिर परिसर में 4 से 5 हवन कुंड स्थापित किए जाएँगे, जिसमें दिल्ली व एनसीआर के लगभग 5000 भक्तगण हिस्सा लेंगे।
        हवन के साथ-साथ गीता के 700 श्लोकों का उच्चारण भी किया जाएगा और उनका अनुवाद भी उच्चारित किया जाएगा, हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में, ताकि भक्तगण अपनी-अपनी सुविधानुसार इसे समझ पाएँ। इसके अतिरिक्त द्वारका के आसपास के क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक का मंचन होगा, जिसमें इस्कॉन यूथ फोरम के युवा भाग लेंगे।

दिसंबर माह के आरंभ से शुरू हुए गीता मैराथन के अंतर्गत जागरूकता अभियान में लगभग 200 स्थानों में जैसेदृ द्वारका की विभिन्न मार्केट में, मॉल्स में, सोसाइटीज़ में व आसपास के क्षेत्रोंदृ नजफगढ़, जनकपुरी, हरि नगर आदि दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्रों में लगभग दस हज़ार भक्त लोग सामूहिक रूप से श्रीमद्भगवद्गीता का वितरण करेंगे। यह जागरूकता अभियान नए साल 2024 के आरंभ तक चलेगा ताकि अधिक से अधिक संख्या में लोग गीता को पढ़ें और जीवन के संकल्प के लिए प्रतिबद्ध हों।  
           मंदिर की सजावट में भी इस बार खास होगी। आपको इस बार यहाँ 5000 साल पुराना पारंपरिक ग्रामीण परिदृश्य देखने को मिलेगा। भगवान के विग्रह स्थल को गीता थीम पर सजाया जाएगा, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण साक्षात गीता का ज्ञान देते नज़र आएँगे। गीता जयंती पर ‘सेल्फी प्वाइंट’ भी बैलून वाला होगा। इस दिन तुला दान की भी बहुत महत्ता बताई जाती है। जो लोग भगवद्गीता प्रायोजित करना चाहते हैं, वे अपना  या बच्चों का या परिवार के किसी भी सदस्य के भार के अनुरूप गीता का तुला दान कर सकते हैं। मंदिर प्रांगण में तुला दान की व्यवस्था की गई है।    
कई वर्षों से मंदिर की अनेक गतिविधियों से जुड़े कुछ बच्चों के द्वारा गीता के श्लोकों का उच्चारण किया जाएगा। ये बच्चे निश्चित तौर पर अन्य बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत होंगे, जो यह बताएँगे कि नियमित गीता पढ़ने से उनके जीवन में क्या बदलाव आया, सदाचार के गुण विकसित हुए और दिन-प्रतिदिन इसके संचय में बढ़ोतरी हो रही है। आप भी इस गीता जयंती यज्ञ में भाग लें, तुला दान करें, इस अमूल्य निधि को अपने जीवन में अपनाएँ, लोगों को बताएँ और इस छोटे से प्रचार के माध्यम से भगवान के प्रिय बन जाएँ।

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