द्वारका-नजफगढ़ ग्रे मैट्रो कॉरीडोर परिचालन के लिए तैयार

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June 14, 2026

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द्वारका-नजफगढ़ ग्रे मैट्रो कॉरीडोर परिचालन के लिए तैयार

पत्रकारों से रूबरू होते हुए डीएमआरसी के कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नजफगढ़/ – नजफगढ़ देहात के लिए बहुप्रतिक्षित द्वारका-नजफगढ़ मैट्रो कॉरीडोर न केवल बनकर तैयार हो गया है बल्कि परिचालन के लिए भी पूरी तरह से तैयार है।

शानिवार को द्वारका इंटरसेक्षन पर पत्रकारों से रूबरू होते हुए डीएमआरसी के कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल ने बताया कि कॉरीडोर की लंबाई 4.295 किलोमीटर है। जिसपर द्वारका, नंगली व नजफगढ़ डिपों के नाम से तीन स्टेशन बनाये गये है। सभी स्टेशनों व पूरे कॉरीडोर में यात्रियों को आधुनिक सुविधायें उपलब्ध कराने के साथ-साथ सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। लोगों की स्टेशनों से कनेक्टीविटी के लिए ई-रिक्षा, ऑटो रिक्षा और बसों की व्यवस्था के साथ-साथ विस्तृत मल्टीमोडल एकीकरण का प्रावधान किया गया है। इस खंड पर द्वारका व नंगली स्टेशन एलिवेटेड व नजफगढ़ स्टेशन अंडर ग्राउंड बनाया गया है। उन्होने बताया कि द्वारका-नजफगढ़ मैट्रो कॉरीडोर को ग्रे कलर कोड का नाम दिया गया। इस कॉरीडोर का विस्तार ढांसा स्टैंड तक किया जाना है जहां स्टेशन का निर्माण चल रहा है और जिसके दिसंबर 2020 मे पूरा होने की संभावना है। इस स्टेशन पर भूमिगत कार पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है। नजफगढ़ व नंगली स्टेशनों पर कार पार्किंग की कोई व्यवस्था नही है। द्वारका में इस खंड के लिए 2000 वर्ग मीटर की अतिरिक्त कार पार्किंग बनाई गई है।

पीक ऑवर में साढें सात मिनट के अंतराल पर दौड़ेगी मैट्रो

श्री दयाल ने बताया कि द्वारका-नजफगढ़ सेक्षन पर पीक ऑवर में साढ़े सात मिनट के अंतराल पर ट्रेन सेवा उपलब्ध होगी। इस सेक्षन पर कुल 6 मिनट 20 सेकेंड का यात्रा का समय रहेगा। इस रूट पर मैट्रो का परिचालन सुबह 6 बजे से रात्रि 11 बजे तक होगा।

डम्बेल के आकार का होगा नजफगढ़ स्टेशन

मानचित्र के जरिए दिखाया गया डम्बेल के आकार का नजफगढ़ स्टेशन

नजफगढ़ स्टेशन अति व्यस्त मार्ग पर होने के कारण इसकी चौड़ाई एक समान नही है जिसकारण इसे डम्बेल का आकार दिया गया है। इसके बगल में कई सरकारी विद्यालय व बाजार भी है। जिसकारण सभी पहलुओं पर ध्यान देते हुए कार्य पूरा किया गया है।

इस कॉरीडोर के तीनों स्टेशन होंगे सोलर उर्जा से प्रबंधित

सौलर सिस्टम के जरिए जलती हुए एलईडी लाईटें

द्वारका, नंगली सकरावती व नजफगढ़ मैट्रों स्टेशन का लाईट का प्रबंधन पूरी तरह से सोलर उर्जा से जुड़ा होगा। जिसके लिए द्वारका स्टेशन पर 175 केडब्ल्यूपी, नजफगढ़ डिपों स्टेशन पर 182 केडब्ल्यूपी व नंगली स्टेशन पर 240 केडब्ल्यूपी के सोलर पावर प्लांट लगाये गये हैं।

मैट्रो के सबसे छोटे कॉरीडोर को बनने में लग गये चार साल

देश में मैट्रो के सबसे छोटे कॉरीडोर को बनने में पूरे चार साल लग गये। इसकी वजह चाहे जो भी रही हो फिर भी इतना ज्यादा समय किसी भी कॉरीडोर में नही लगा। हालांकि इस पर जवाब देते हुए मैट्रो के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुज दयाल ने बताया कि यह कॉरीडोर सबसे चुनौतियों भरा था। इसके निर्माण को लेकर कई दिक्कते व समस्याऐं थी जिनको दूर किये बगैर इसका निर्माण नही हो सकता था। लेकिन फिर भी मैट्रों के इंजिनियरों ने यह कारनामा कर दिखाया।

स्टेशनों को सुसज्जित करने के लिए आर्ट वर्क पर दिया गया जोर

स्टेशनों पर सुसज्जित आर्ट वर्क व हरियाली की एक झलक

नजफगढ़ व द्वारका स्टेशनों को सुसज्जित करने के लिए आर्ट वर्क का इस्तेमाल किया गया है। जिसमें ग्रामीण अंचल की झलक से लेकर खेल, म्यूजिक उपकरण, व आधुनिक परिधान वाली, मैट्रों में सफर करते यात्रियों की तथा मार्डन डिजायन वर्क की कलाकृतियां बनाई गई हैं। स्टेशनों को प्रकृति व हरियाली से जोड़ने के लिए गमलों का इस्तेमाल किया गया है।

द्वारका नजफगढ़ कोरिडोर का द्वारका मेट्रो स्टेशन दो सतह वाला बनाया गया

नजफगढ़ स्टेशन को दो भागों में बांटा गया पहले कोनकोर्स फिर प्लेटफार्म

14 मीटर उंचाई पर बने प्लेटफार्म की सुंदरता के लिए जगह जगह आर्ट वर्क भी लगाए गए हैं। वहीं नजफगढ़ स्टेशन को दो भागों में बांटा गया है। जिसमें पहले कोनकोर्स फिर प्लेटफार्म बनाया गया है जिसकी उंचाई 14 मीटर रखी गई है। द्वारका-नजफगढ़ मेट्रो कॉरिडोर खुलने के बाद दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क 274 स्टेशनों के साथ 377 किलोमीटर लंबा हो जाएगा। जो देश की सबसे बड़ा मेट्रो कॉरिडोर हो होगा। जिसमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा की एक्वा लाइन भी शामिल है।

प्लास्टिक से मुक्त होगी मेट्रो

अनुज दयाल ने कहा कि मेट्रो स्टेशन पर जितनी भी दुकानें हैं वहां पर अबसे प्लास्टिक की थैलियां नहीं मिलेगी। कोई भी दुकानदार प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेगा। जो ऐसा करते पाया गया उस दुकानदार के खिलाफ कारवाई भी होगी।

आरक्षित सीटों का रंग होगा गहरा

बुजुर्गों व महिलाओं की सीट का गहरा रंग

ऐसे तो महिलाओं के लिए मेट्रो की पहली बॉगी आरक्षित है। लेकिन ग्रे लाइन के इस मेट्रो में महिलाओं की सीट का रंग गहरा कर दिया गया है। इसी के साथ बुजुर्गों के बैठनेवाली आरक्षित सीट के रंग को भी गहरा कर दिया गया है। यहां पर लगे बोर्ड भी काफी नीचे लगाये गये हैं ताकि आसानी से दिख सके।

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