दिल्ली के कई स्थानों पर वायु की गुणवत्ता खराब से बेहद खराब

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दिल्ली के कई स्थानों पर वायु की गुणवत्ता खराब से बेहद खराब

नजफगढ मैट्रो न्यूज/- सरकारों के तमाम प्रयासों के बावजूद दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। जिसका सीधा असर दिल्ली के प्रदूषण स्तर पर पड़ा है। और नासा की तस्वीरों से यह साफ पता चलता है। मंगलवार को दिल्ली के कई स्थानों पर वायु की गुणवत्ता खराब से बेहद खराब स्तर की रही। कई जगहों पर पार्टिकुलेट मैटर यानी च्ड 2.5 का स्तर 350 के आंकड़े को भी पार करता दिखा जिसके कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी महसूस हुई। राजधानी के प्रमुख इलाके आईटीओ, इंडिया गेट, लोधी रोड पर वायु की गुणवत्ता काफी खराब रही। धूल से अपेक्षाकृत मुक्त समझे जाने वाले दूतावासों के क्षेत्र में भी वायु की गुणवत्ता काफी खराब रही।
पीएम 2.5 का स्तर 350 के पार
एयर क्वालिटी इंडेक्स से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक आनंद विहार में च्ड 2.5 का लेवल 359 तक पहुंच गया, हालांकि पूरे दिन में इसका औसत स्तर 237 के आसपास बना रहा। इसी प्रकार आईटीओ पर वायु प्रदूषण सूचकांक 305 तक पहुंच गया था। इसके अलावा जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम पर च्ड 2.5 का लेवल 312, लोधी रोड पर 307 और मंदिर मार्ग पर 313 तक पहुंच गया।
पीएम 10 का स्तर भी ज्यादा
वायु गुणवत्ता के दूसरे प्रमुख सूचक च्ड 10 का स्तर भी काफी ऊपर रहा। पूर्वी दिल्ली के आनंद विहार इलाके में पीएम 10 का स्तर बेहद खतरनाक स्तर 369 तक पहुंच गया। हालांकि अन्य इलाकों में यह अपेक्षाकृत कम रहा। आंकड़ों के मुताबिक पूसा क्षेत्र में च्ड 10 का स्तर 199, लोधी रोड पर 162, आईटीओ पर 140, मंदिर मार्ग पर 204 और जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम के इलाके में 227 पर पहुंच गया।
कितना स्तर सुरक्षित
वायु गुणवत्ता को इन नंबरों पर समझा जा सकता है। पीएम 2.5 के स्तर को विभिन्न स्तरों पर अच्छा, खराब और गंभीर स्तरों में बांटा गया है। मानकों के मुताबिक वायु के 0 से 50 सूचकांक को अच्छा माना जाता है। इसके बाद 51 से 100 – सन्तोषजनक, 101 से 200 – मध्यम स्तर, 201 से 300 को खराब, 301 से 400 – बेहद खराब और 401 से 500 को गंभीर माना जाता है।
पराली पर राजनीति जारी
दिल्ली सरकार और विपक्ष के बीच पराली जलाने के कारण राजधानी के प्रदूषण स्तर पर पड़ने वाले असर को लेकर राजनीति जारी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि किसानों को पराली जलाने से पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। काफी प्रयास के बाद भी पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके कारण दिल्ली का प्रदूषण स्तर खराब बना हुआ है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण से निबटने के लिए मास्क बांटे जा रहे हैं। प्रमुख इलाकों में पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है।
वहीं विपक्ष ने कहा कि पराली के कारण दिल्ली के प्रदूषण स्तर पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है। भाजपा नेता मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली के प्रदूषण के लिए स्थानीय कारक ज्यादा जिम्मेदार होते हैं। सरकार को दूसरे राज्यों पर अपनी जिम्मेदारी टालने की बजाय प्रदूषण स्तर कम करने का सटीक प्रयास करना चाहिए।

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