इस्कॉन द्वारका में राधाष्टमी उत्सव में ‘नौका विहार’

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

December 2025
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
293031  
December 8, 2025

हर ख़बर पर हमारी पकड़

इस्कॉन द्वारका में राधाष्टमी उत्सव में ‘नौका विहार’

—राधाष्टमी उत्सव का विशेष आकर्षण ‘बोट फेस्टिवल’ —नौका विहार में चरितार्थ होगी मानसी गंगा की लीला —पुष्पों से होगा भगवान का अभिषेक

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज़ /नई दिल्ली / मानसी शर्मा – रंग-बिरंगे, देसी-विदेशी फूलों की सुगंध के बीच महकते माहौल में भरपूर आनंद और उल्लास के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाने के बाद अब इस्कॉन के भक्तगण राधाष्टमी उत्सव की तैयारियों में जुटे हैं। श्री श्री रुक्मिणी द्वारकाधीश मंदिर इस्कॉन द्वारका दिल्ली में यह उत्सव उसी उल्लास और उमंग के साथ 23 सितंबर शनिवार की शाम को 5 बजे से मनाया जाएगा। इस बार उत्सव का विशेष आकर्षण है ‘बोट फेस्टिवल’ यानी ‘नौका विहार उत्सव’, जिसमें श्रीकृष्ण और श्रीमती राधारानी के प्रिय तालाब यानी कुंड और नौका को रंग-बिरंगे सुगंधित फूलों और गुब्बारों से सजाया जाएगा।
इस्कॉन द्वारका मंदिर के मुख्य विग्रह श्री श्री रुक्मिणी द्वारकाधीश इस विशेष सुसज्जित नौका में विराजमान होकर मानसी गंगा की लीला को चरितार्थ करते हुए नौका विहार करेंगे। श्रीकृष्ण की अनेक लीलाओं में से उनकी यह नौका विहार लीला भगवान को अत्यंत प्रिय है, जिसका वर्णन श्रील जीव गोस्वामी अपने ग्रंथ ‘गोपाल चंपू’ में करते हैं। वह बताते हैं कि एक बार सभी गोपियाँ दही और मक्खन से भरे बर्तन लेकर मानसी नदी के तट पर गईं। नदी को पार करने की इच्छा से वे एक नाव में बैठ गईं और नाविक से चलने को कहा। थोड़ी दूर चलने पर वह रुक गया। गोपियों ने पूछा तो उसने कहा कि मैं भूखा हूँ। मुझे दही और मक्खन चाहिए। गोपियों ने उसे वह दे दिया। लेकिन थोड़ी देर बाद जाकर वह फिर रुक गया। और कहा कि मैं आराम करना चाहता हूँ। तब गोपियों ने उसे डराया कि वह नौकायन नहीं करेगा तो वे उसे नाव से फेंक देंगी। तभी आकाश में बादल छा गए, हवाएँ चलने लगीं और नाव हिलने-डुलने लगी और इसी बीच श्रीमती राधारानी की नजर नाविक पर पड़ी। उन्होंने उसे पहचान लिया कि वह उनके प्रिय श्रीकृष्ण ही हैं। यह जानकर गोपियाँ अत्यंत प्रसन्न हुईं। यह लीला भगवान और भक्तों के बीच परस्पर प्रेम का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।
श्रीमती राधारानी और गोपियाँ भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त हैं और इस प्रेममयी लीला को दिव्य दृष्टि से ही समझा जा सकता है। इससे पहले हमें यह समझना होगा कि राधा और कृष्ण एक ही हैं।
कृष्ण कविराज द्वारा लिखित चैतन्य चरितामृत में वर्णन करते हैं किः

राधाकृष्ण एक आत्मा, दुइ देह धरि।
अन्योन्ये विलसे रस आस्वादन करि।। (चै.च. आदि.ली. अ– 4.56)

अर्थात राधा तथा कृष्ण एक ही हैं, किंतु उन्होंने दो शरीर धारण कर रखे हैं। इस प्रकार वे प्रेम-रस का आस्वादन करते हुए एक-दूसरे का उपभोग करते हैं।
श्रीकृष्ण शक्तिमान हैं और श्रीमती राधारानी अंतरंगा शक्ति हैं। इसी कारण वे श्रीकृष्ण के आनंद को बढ़ाती रहती हैं। जैसा कि उनके नाम ‘राधा’ नाम से ही स्पष्ट है कि वे श्रीकृष्ण के विलास की शाश्वत रूप से सर्वोच्च स्वामिनी हैं। इस दृष्टि से वे प्रत्येक जीव की सेवा को श्रीकृष्ण तक पहुँचाने की माध्यम हैं। इसीलिए वृंदावन सहित अनेक भक्त श्रीमती राधारानी की कृपा चाहते हैं, जिससे वे श्रीकृष्ण के प्रिय भक्त के रूप में स्वीकृत हो सकें।
राधाष्टमी के इस पावन अवसर पर भगवान का महाभिषेक किया जाएगा। भगवान को एक सजी हुई सुंदर नाव पर बैठे हुए नौका विहार का दृश्य भक्तों के लिए परम आनंददायक रहेगा। इस शुभ अवसर को सभी एक साथ परम आनंद के साथ मनाएँ। इसी कामना से सभी को इस उत्सव के लिए आमंत्रित किया जाता है जहाँ उन्हें भगवान की नौका के साथ ‘सेल्फी प्वाइंट’ पर सेल्फी लेने का अवसर मिलेगा।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox