मानसी शर्मा /- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को “शांति का राष्ट्रपति” घोषित करते हुए दावा किया कि उन्होंने सात महीनों में दुनिया के सात प्रमुख संघर्षों को समाप्त कर दिया। वहीं तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने अपनी स्पीच में भारत-पाकिस्तान तनाव और कश्मीर मुद्दे को फिर से वैश्विक मंच पर उठाया।
ट्रंप का दावा: “7 युद्ध, 7 महीनों में खत्म”
डोनाल्ड ट्रंप ने UNGA के मंच से दावा किया कि उन्होंने कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया, कांगो-रवांडा, पाकिस्तान-भारत, इजराइल-ईरान, मिस्र-इथियोपिया और आर्मेनिया-अजरबैजान जैसे सात अस्थायी संघर्षों को समाप्त किया। उन्होंने विशेष रूप से भारत-पाकिस्तान के अप्रैल संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी मध्यस्थता से सीमा पर तनाव कम हुआ और युद्धविराम संभव हो सका।
ट्रंप ने कहा, “मैंने यह सब बिना किसी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की मदद के किया। इसलिए मैं खुद को सम्मानित महसूस करता हूं।” व्हाइट हाउस ने इसे “संप्रभुता की विजय” करार दिया और कहा कि यह अमेरिका की स्वतंत्र विदेश नीति का परिणाम है। हालांकि, न्यूयॉर्क टाइम्स और पोलिटिफैक्ट जैसी संस्थाओं ने इन दावों को ‘अस्थायी युद्धविराम’ बताते हुए ट्रंप की भूमिका को विवादास्पद बताया।
एर्दोगन का कश्मीर फोकस
ट्रंप की स्पीच के बाद तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने भारत-पाकिस्तान तनाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अप्रैल में हुआ युद्धविराम सकारात्मक कदम है, लेकिन कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुसार हल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि कश्मीर में रहने वाले लोगों को न्याय मिले और भारत-पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करें।” एर्दोगन ने गाजा और कश्मीर की स्थिति को जोड़ते हुए इसे मानवाधिकार का मुद्दा बताया।
भारत सरकार ने फिलहाल इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अतीत में ऐसे मुद्दों पर भारत तुर्की की टिप्पणी को आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार देता रहा है।


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