गुमशुदगी से हत्या तक: द्वारका पुलिस ने सुलझाई सनसनीखेज वारदात

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September 7, 2026

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-दोस्त ही निकला कातिल

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके में दर्ज एक गुमशुदगी की शिकायत ने कुछ ही दिनों में दिल दहला देने वाली हत्या की गुत्थी का रूप ले लिया। दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल, द्वारका जिला और स्थानीय थाना टीम की सतर्कता व तकनीकी जांच के चलते इस अंधी हत्या का पर्दाफाश हुआ। मामले में मृतक के करीबी परिचित ने ही लालच और धन की हवस में अपने साथियों के साथ मिलकर साजिश रची और वारदात को अंजाम दिया।

23 फरवरी को दर्ज हुई गुमशुदगी
23 फरवरी 2026 को थाना पुलिस थाना द्वारका नॉर्थ में एक व्यक्ति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उनका भाई अनूप गुप्ता, जो द्वारका सेक्टर-13 स्थित छत्तीसगढ़ सदन की कैंटीन चलाता था, 18 फरवरी से लापता है। उसकी सफेद रंग की किआ सेल्टोस कार भी गायब थी। परिजनों ने किसी तरह की दुश्मनी या विवाद से इनकार किया था।

सीसीटीवी और तकनीकी विश्लेषण से खुली परतें
मामले की गंभीरता को देखते हुए द्वारका जिला पुलिस उपायुक्त के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से वाहन की जानकारी जुटाई गई, जिससे पता चला कि कार 19-20 फरवरी की रात यमुना एक्सप्रेसवे पर देखी गई थी। टोल प्लाजा और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। फुटेज में कार को वृंदावन की ओर जाते और कुछ घंटों बाद वापस लौटते देखा गया।

मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड के विश्लेषण से एक रैपिडो चालक तक पुलिस पहुंची, जिसने बताया कि उसने अनूप को मटियाला एक्सटेंशन स्थित एक मकान पर छोड़ा था। आसपास के कैमरों में अनूप को इमारत में प्रवेश करते देखा गया, लेकिन वह बाहर निकलता नहीं दिखा। कुछ अन्य संदिग्ध लोगों की गतिविधियां भी रिकॉर्ड हुईं।

दोस्ती के नाम पर रची साजिश
जांच में सामने आया कि हैप्पी उर्फ सूरज नामक युवक ने पहले अनूप से दोस्ती की और उसके सोने के आभूषणों व पारिवारिक अलगाव की जानकारी हासिल की। उसने अपने साथियों भूपेंद्र, बलराम, नीरज और राखी के साथ मिलकर अनूप से धन और आभूषण लूटने की योजना बनाई। 18 फरवरी को पार्टी के बहाने अनूप को किराए के मकान पर बुलाया गया।

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पहले उससे कार की चाबी छीनी और वाहन मंगवाकर उसमें रखे आभूषण निकाले। इसके बाद पैसे की मांग को लेकर मारपीट की गई। विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी गई।

साक्ष्य मिटाने की कोशिश
वारदात के बाद आरोपियों ने शव को टुकड़ों में काटकर तीन प्लास्टिक बैग में भर दिया और उन्हें उत्तर प्रदेश के वृंदावन के पास यमुना नदी में फेंक दिया। मृतक का मोबाइल फोन उसकी कार में ही छोड़ दिया गया ताकि पुलिस भ्रमित रहे। यहां तक कि आरोपियों ने उसके फोन से कैंटीन कर्मचारियों और परिवार को संदेश भेजकर यह जताने की कोशिश की कि वह गोवा घूमने जा रहा है।

संयुक्त कार्रवाई में बरामद हुए अवशेष
दिल्ली पुलिस ने मामले की जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस को दी। थाना जमुना पार, जिला मथुरा क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों से नदी से तीनों बैग बरामद किए गए। मुख्य आरोपी हैप्पी उर्फ सूरज, भूपेंद्र, बलराम और राखी को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया गया है। फरार आरोपी नीरज की तलाश जारी है।

आरोपियों की पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार सभी आरोपी हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के निवासी हैं और अब तक उनके खिलाफ कोई पूर्व आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। प्राथमिकी संख्या 138/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस की तत्परता से सुलझी गुत्थी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी और मैदानी जांच नहीं की जाती तो मामला लंबे समय तक अनसुलझा रह सकता था। तीन दिनों तक लगातार सीसीटीवी फुटेज खंगालने, मोबाइल डेटा विश्लेषण और संदिग्धों से पूछताछ के बाद यह सफलता मिली। पुलिस ने इसे समन्वित जांच और सूझबूझ का परिणाम बताया है।

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