श्री गुरु गोबिंद सिंह त्रिशताब्दी विश्वविद्यालय में दो दिवसीय वैश्विक सम्मेलन का आगाज़

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October 9, 2026

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-अंतरराष्ट्रीय सहयोग और राष्ट्रीय आत्मविश्वास के लिए सशक्त नैरेटिव की अहमियत

गुरुग्राम/उमा सक्सेना/-   गुरुग्राम स्थित श्री गुरु गोबिंद सिंह त्रिशताब्दी विश्वविद्यालय  (एसजीटीयू) में ‘चेंजिंग डायनेमिक्स ऑफ इंडियाज़ नैरेटिव’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रथम दिन गहन वैचारिक विमर्श देखने को मिला। देश-विदेश से पहुंचे शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की विदेश नीति, वैचारिक आधार, रणनीतिक प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय अपेक्षाओं पर व्यापक चर्चा की। यह आयोजन फैकल्टी ऑफ ह्यूमैनिटीज, सोशल साइंसेज एंड लिबरल आर्ट्स द्वारा भारतीय विश्व मामलों की परिषद के सहयोग तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के प्रायोजन में संपन्न हुआ।

नैरेटिव डिप्लोमेसी: सिद्धांत से व्यवहार तक
सम्मेलन की शुरुआत ‘नैरेटिव डिप्लोमेसी: थ्योरी एंड प्रैक्टिस’ विषयक पैनल चर्चा से हुई, जिसने आगे की चर्चाओं के लिए मजबूत बौद्धिक आधार तैयार किया। सत्र का संचालन डॉ. नंदिनी बसिष्ठ ने किया। वक्ताओं ने 21वीं सदी की कूटनीति में कथानक निर्माण, धारणा-निर्माण और रणनीतिक संप्रेषण की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उनका मत था कि आज राष्ट्र केवल सैन्य या आर्थिक शक्ति से नहीं, बल्कि डिजिटल मंचों और वैचारिक विमर्श के माध्यम से भी वैश्विक प्रभाव स्थापित कर रहे हैं। कहानियां, प्रतीक और सांस्कृतिक विरासत अंतरराष्ट्रीय जनमत को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, शैक्षणिक संस्थान, प्रवासी भारतीय समुदाय और मानवाधिकार विमर्श वैश्विक छवि निर्माण के प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। भारत की प्राचीन सभ्यतागत धरोहर और सांस्कृतिक पूंजी को उसकी विशेष ताकत बताते हुए यह भी कहा गया कि प्रभावी प्रस्तुति के लिए विश्वसनीयता, लचीलापन और नैतिक आधार अनिवार्य हैं।

उद्घाटन सत्र: विचार और गरिमा का समन्वय
कार्यक्रम का शुभारंभ ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में डॉ. विजय चौथाईवाले, डॉ. अन्वेषा घोष और डॉ. अरविंद कुमार ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वैश्विक राजनीति के तेजी से बदलते दौर में स्पष्ट और सुसंगत नैरेटिव ही अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को सुदृढ़ कर सकता है और राष्ट्रीय मनोबल को मजबूती दे सकता है। मीडिया नैतिकता और सभ्यतागत आत्मविश्वास को भारत की वैश्विक छवि के निर्माण का प्रमुख आधार बताया गया।

इस अवसर पर “स्टोरीज, सॉफ्ट पावर एंड स्ट्रेटेजी: इंडियाज नैरेटिव डिप्लोमेसी इन द 21st सेंचुरी” शीर्षक संपादित पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया, जिसने कूटनीति के अध्ययन को बहुआयामी दृष्टिकोण से समृद्ध करने की प्रतिबद्धता को दर्शाया।

‘परसेप्शन की शक्ति’ और समकालीन रणनीति
‘द पावर ऑफ परसेप्शन: नैरेटिव डिप्लोमेसी एंड ऑपरेशन सिंदूर’ विषयक विशेष सत्र में वडोदरा से भाजपा सांसद हेमांग जोशी और प्रो. (डॉ.) हेमंत वर्मा के बीच संवाद हुआ। चर्चा में बताया गया कि आधुनिक रणनीतिक कदम सैन्य और डिजिटल दोनों स्तरों पर समानांतर रूप से संचालित होते हैं। “ऑपरेशन सिंदूर” को सुरक्षा पहल के साथ-साथ प्रतीकात्मक दृष्टि से प्रभावशाली उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि नामकरण और प्रस्तुति जनधारणा को किस प्रकार प्रभावित करती है। सत्र में श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए।

नैरेटिव संप्रभुता और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी
चर्चा के दौरान ‘नैरेटिव संप्रभुता’ की अवधारणा पर बल देते हुए कहा गया कि प्रत्येक राष्ट्र के लिए अपनी दृष्टि को प्रभावी ढंग से वैश्विक मंच पर रखना आवश्यक है। राजनीतिक नेतृत्व, मीडिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे पारदर्शिता और रणनीतिक संप्रेषण के बीच संतुलन बनाए रखें। इसके बाद विषय से जुड़े तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।

विशेष व्याख्यान: सॉफ्ट पावर और वैचारिक स्वतंत्रता
विशेष सत्र में एसीटी के कुलाधिपति पद्मश्री एवं पद्मभूषण राम बहादुर राय ने ‘नैरेटिव’ और ‘सॉफ्ट पावर’ की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने कहा कि विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी सशक्त लोकतंत्र का मूल आधार है। विभिन्न ऐतिहासिक और समकालीन संदर्भों का उल्लेख करते हुए उन्होंने जवाबदेही, नीति-निर्माण और वैचारिक स्पष्टता की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

समग्र रूप से सम्मेलन के पहले दिन की चर्चाओं ने यह स्थापित किया कि आज की कूटनीति में धारणा-निर्माण एक प्रभावशाली रणनीतिक साधन बन चुका है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के लिए सुसंगत, विश्वसनीय और मूल्य-आधारित नैरेटिव का निर्माण अंतरराष्ट्रीय सहयोग और राष्ट्रीय आत्मविश्वास दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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