नई दिल्ली, 26 जनवरी/-
मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा 77वें गणतंत्र दिवस एवं श्री विभुजी महाराज के जन्मोत्सव के अवसर पर सद्भावना सम्मेलन का आयोजन कृष्ण जन्माष्टमी मैदान पंजाबी बाग, श्री हंस सत्संग भवन के निकट किया गया। इस अवसर पर सुविख्यात समाजसेवी एवं आध्यात्मिक गुरु श्री सतपाल जी महाराज ने राष्ट्रध्वज फहराया तथा राष्ट्रगान के पश्चात मानव सेवा दल के स्वयंसेवकों और स्वयंसेविकाओं की परेड की सलामी ली।
गुरु परंपरा और शिक्षा पर विचार
अपने उद्बोधन में श्री महाराज जी ने कहा कि भारतवर्ष में गुरु परंपरा का अत्यंत महत्व रहा है। भौतिक शिक्षा के लिए शिक्षक आवश्यक हैं, किंतु अध्यात्म की विद्या, जिसे हम विद्यालयों में नहीं पढ़ते, उसके लिए सद्गुरु की आवश्यकता होती है। उन्होंने आग्रह किया कि ज्ञान और विज्ञान को एक ही मंच पर लाकर शिक्षकों द्वारा शिक्षा दी जाए, ताकि भावी पीढ़ी समाज और देश के लिए आदर्श स्थापित कर सके।

संस्कार और संस्कृति पर बल
श्री महाराज जी ने चिंता व्यक्त की कि आज बच्चों में संस्कारों की कमी हो रही है। उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे स्कूली शिक्षा के साथ बच्चों को अच्छे संस्कार दें। मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से हमारी पुरातन संस्कृति प्रभावित हो रही है, अतः इसका उपयोग सीमित करना आवश्यक है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
पर्यावरण पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का उपयोग कम करना चाहिए क्योंकि इसके घातक रसायन न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि मानव स्वास्थ्य को भी प्रभावित करते हैं।

शुभकामनाएं और आशीर्वाद
कार्यक्रम के अंत में श्री सतपाल जी महाराज ने उपस्थित जनसमुदाय को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ दीं तथा श्री विभुजी महाराज को जन्मदिन की बधाई और आशीर्वाद प्रदान किया।
अन्य संतों और माताओं के विचार
इस अवसर पर विद्वान पंडितों द्वारा पूजा-अर्चना की गई। पूज्य माता श्री अमृता जी, श्री विभुजी महाराज, श्री सुयश जी महाराज, माता आराध्या जी और माता मोहिना जी ने भी अपने विचार व्यक्त किए और शुभकामनाएँ दीं।


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