नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नार्थ जिला/भावना शर्मा/- उत्तर जिला पुलिस की साइबर टीम ने एक ऐसे गिरोह के 3 शातिर अपराधियों को पकड़ा है जो नकली आईडी से उपभोक्ता नकली सिम कार्ड बनाकर बैंकों में खाता धारकों के साथ ठगी करते थे। इन आरोपियों में एक आरोपी एक प्रतिष्ठित बैंक की क्रेडिट कार्ड शाखा का कर्मचारी भी शामिल बताया जा रहा है। पुलिस ने आरोपियों से 5 मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड, 8 डेबिट कार्ड, 3 बैंक अकाउंट व 2 नकली आधार कार्ड के साथ-साथ कई अन्य दस्तावेज भी जब्त किये है।
उत्तर जिला डीसीपी सागर सिंह कलसी ने बताया कि साइबर ठगी को लेकर एक व्यक्ति अजेश निवासी मलकागंज ने शिकायत दी थी कि कुछ लोगों ने उसका ईमेल का पासवर्ड बदल दिया हैं और सिम कार्ड बदलने का मैसेज आया है। जबकि उसने ऐसा कुछ नही किया है। इसके बाद, शिकायतकर्ता ने अपने एचडीएफसी अकाउंट स्टेटमेंट की जांच की और पाया कि किसी ने उसके खाते में 11 लाख रुपये का ऋण लिया है और ऋण राशि से 1,00,000/- इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से किसी और के खाते में स्थानांतरित कर दिया है। शिकायत के आधार पर पीएस साइबर नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट में एफआईआर संख्या 40/22 दिनांक 07.05.2022 यू/एस 420 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया था। साइबर टीम ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की और काफी जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने 3 लोगों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की। पुलिस ने आरोपियों की पहचान कपिल निवासी तीर्थंकर नगर, जैन नगर कराला, दिल्ली, उम्र-28 वर्ष, सनी कुमार सिंह निवासी न्यू सैनिक विहार, मोहन गार्डन उत्तम नगर दिल्ली, उम्र-27 वर्ष। आरोपी पहले पीएस रणहौला, दिल्ली में दर्ज ’चोरी के एक मामले में शामिल पाया गया तथा पाविन रमेश निवासी तीर्थंकर नगर, जैन नगर, कराला दिल्ली, उम्र -21 वर्ष के रूप में की है। आरोपी अपने एचडीएफसी बैंक खाते से जुड़े फोन नंबर के सिम कार्ड को फिर से जारी करने के बाद सैकड़ों एचडीएफसी बैंक खाताधारकों/ग्राहकों को ठगते थे।
इस मामले में साइबर पुलिस के एसआई रंजीत चौधरी, एसआई रोहित सारस्वत, एसआई गुमान, एसआई राजू, एसआई प्रेम प्रकाश, एचसी अर्जुन, सीटी उमेश की टीम ने निरिक्षक पवन तोमर व एसीपी श्री स्वागत राजकुमार पाटिल के मार्गदर्शन में मनी ट्रेल और अपराध से जुड़े कॉल रिकॉर्ड के तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से जैन नगर, कराला, दिल्ली में विभिन्न छापे मारे और मामले को सुलझा लिया। टीम मामले की आगे की जांच कर रही है। और सह-आरोपी राकेश को पकड़ने के साथ-साथ उन फर्जी खातों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है जिनमें कथित राशि हस्तांतरित की गई है।


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