दिल की बीमारी से पीड़ित मरीज के लिए लेडलेस पेसमेकर

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 13, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

दिल की बीमारी से पीड़ित मरीज के लिए लेडलेस पेसमेकर

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/भावना शर्मा/- वैस्कुलर एक्सेस समस्याओं से हीमोडायलिसिस पीड़ित और दिल की धड़कन बिगड़ने के खतरे वाले मरीजों के लिए लेडलेस पेसमेकर हाल के दिनों का एक जीवनरक्षक विकल्प बन गया है। हाल ही में बीएल के मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने डायलिसिस पर चल रहे खराब किडनी वाले एक मरीज में सफलता पूर्वक लेडलेस पेसमेकर लगाया है। मरीज को बेहोशी और पूरी तरह हार्ट ब्लॉक स्थिति में लाया गया था और वह अस्थायी पेसमेकर के सहारे चल रहा था, जिसे उसकी दाहिनी जांघ की नसों के जरिये डाला गया था।
                  विस्तृत जांच से पता चला कि उसकी दोनों सब क्लेवियन नसें बारी-बारी से अवरुद्ध हो चुकी थीं और स्टेंट भी लगा हुआ था। मरीज की पेसमेकर पर संपूर्ण निर्भरता को देखते हुए उसकी जान बचाने का एकमात्र विकल्प ट्रांस वेनस स्थायी पेसमेकर ही लगाना था, लेकिन राइट वेंट्रिकल तक पहुंच मुश्किल होने के कारण यह संभव नहीं था। नई दिल्ली स्थित बीएलके मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी विभाग के चेयरमैन और एचओडी डॉ. सुभाष चंद्रा बताते हैं कि, पेसिंग समस्या के निदान के लिए हमारे पास दो ही विकल्प थे, सर्जिकल एपिकार्डियल लगाना जिसमें अन्य बीमारियों के कारण खतरा भी था और दूसरा विकल्प, आरवी एपेक्स में लेडलेस पेसमेकर लगाना। परिवारवालों को इसी अनुसार समझाया गया और पहली बार अस्पताल में लेडलेस प्रत्यारोपण को सफल अंजाम दिया गया जिसमें 10 साल से अधिक समय तक इस डिवाइस के अच्छी तरह काम करने की सुनिश्चितता थी। अस्थायी पेसिंग निकालकर यह पेसमेकर दाहिनी जांघ की नस के जरिये डाला गया। इसके तुरंत बाद मरीज को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया और अगले ही दिन स्वस्थ स्थिति में डिस्चार्ज कर दिया गया।श्
                 क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) मरीजों में लक्षण वाले ब्रैडीकार्डिया के इलाज के लिए अक्सर स्थायी पेसमेकर लगाने की जरूरत पड़ती है। हीमोलायलिसस कराने वाले एंडकृस्टेज रेनल डिजीज (ईएसआरडी) पीड़ितों में कई ऐसे संभावित कारक जुड़े होते हैं जिन पर इम्प्लांट करने वाले फिजिशियन को ध्यान देना होता है। इनमें वेनस एक्सेस समस्या, प्रत्यारोपण के दौरान रक्तस्राव का खतरा और तत्काल तथा दीर्घकालिक संक्रमण का खतरा। ऐसे मरीजों के आर्टरियोवेनस फिस्टुला में पेसमेकर या डिवाइस लगाना बेहतर माना जाता है। यदि ट्रांसवेनस के प्रत्यारोपण से फिस्टुला में कोई दिक्कत आती है तो डायलिसिस की दर और प्रभावशीलता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox