नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- 6 अप्रैल भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में दर्ज है, जब भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई और देश की राजनीतिक दिशा को एक नया स्वरूप मिला। राष्ट्रवाद, अंत्योदय और समर्पण के मूल सिद्धांतों को आधार बनाकर इस दल ने समय के साथ अपनी मजबूत पहचान बनाई। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से प्रेरित होकर पार्टी ने अपने वैचारिक ढांचे को सशक्त किया, जबकि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में संगठन ने जन-जन तक अपनी पहुंच बनाई।
संगठन की मजबूती और जनसमर्थन का विस्तार
वर्षों की निरंतर मेहनत, लाखों कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी और जनता के भरोसे के दम पर यह राजनीतिक दल आज वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े संगठनों में गिना जाता है। पार्टी का विस्तार केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर भी इसकी सक्रिय भूमिका देखने को मिली है। देशभर में फैले कार्यकर्ताओं का समर्पण और संगठनात्मक शक्ति इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर
वर्तमान समय में पार्टी का मुख्य उद्देश्य “विकसित भारत” के विजन को साकार करना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए हर स्तर पर योजनाएं और नीतियां तैयार की जा रही हैं। कार्यकर्ता भी इसी सोच के साथ देश के विकास और जनकल्याण के कार्यों में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।


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