नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- नई दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-25 स्थित इस्कॉन मंदिर में रविवार को एक विशेष आध्यात्मिक सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्था ‘चेतना’ (सुरभि सनातन की) द्वारा लाला पन्नालाल सिंघल स्मृति व्याख्यानमाला के अंतर्गत आयोजित किया गया। इस अवसर पर आयोजित 76वें सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में पद्मभूषण सम्मानित साध्वी ऋतंभरा ने शिरकत की। अपने ओजस्वी और भावपूर्ण संबोधन में उन्होंने भारतीय संस्कृति के मूल विचार “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

सुख साझा करने से बढ़ता है आनंद
साध्वी ऋतंभरा ने अपने संबोधन में कहा कि सच्चा सुख वही है जो दूसरों के साथ साझा किया जाए। जब व्यक्ति अपने आनंद को समाज और परिवार के साथ बांटता है तभी उसे वास्तविक संतोष की अनुभूति होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मंदिर में मिलने वाला प्रसाद भी इसी भावना का प्रतीक है। परिवार की महिलाएं प्रसाद को अपने पल्लू में बांधकर घर लाती हैं और फिर उसे घर के हर सदस्य में बांटती हैं। यही परंपरा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के विचार को जीवन में उतारने का संदेश देती है।
परोपकार और संवेदनशीलता ही सनातन की पहचान
अपने वक्तव्य में साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि सनातन संस्कृति हमें दूसरों के दुख को समझने और उनके सुख की कामना करने की शिक्षा देती है। यदि किसी पड़ोसी के घर में संकट या पीड़ा हो तो संवेदनशील समाज में उत्सव और आनंद का माहौल भी फीका पड़ जाता है। यही भावना “वसुधैव कुटुम्बकम्” की आधारशिला है, जिसमें पूरा विश्व एक परिवार के रूप में देखा जाता है।
उन्होंने संत नामदेव का उदाहरण देते हुए बताया कि विनम्रता और सेवा की भावना ही मनुष्य को महान बनाती है। मनुष्य का हृदय ऐसा होना चाहिए जो एक गहरे कुएं की तरह हो, जो अनंत स्रोत से जुड़ा रहता है और कभी खाली नहीं होता। इसी तरह समाज में भी प्रेम और सहयोग का प्रवाह निरंतर बना रहना चाहिए।
‘वात्सल्य ग्राम’ की प्रेरक पहल
कार्यक्रम के दौरान साध्वी ऋतंभरा द्वारा स्थापित ‘वात्सल्य ग्राम’ पर एक विशेष डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। लगभग 52 एकड़ क्षेत्र में फैले इस प्रकल्प का उद्देश्य निराश्रित और जरूरतमंद बालिकाओं को शिक्षा, संस्कार और सुरक्षा प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इस पहल का मूल उद्देश्य समाज में मातृशक्ति को सशक्त बनाना और उन्हें नई दिशा देना है।
‘सर्व मंगला पीठम’ मंदिर निर्माण की जानकारी
सेमिनार में यह भी बताया गया कि साध्वी ऋतंभरा के मार्गदर्शन में ‘सर्व मंगला पीठम’ नामक भव्य मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। इस मंदिर का उद्देश्य आस्था और आध्यात्मिकता को वैज्ञानिक सोच से जोड़ना है। बताया गया कि इस परियोजना पर लगभग 135 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भी इसके लिए उदारतापूर्वक सहयोग दिया।
गणमान्य लोगों की उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन संस्था ‘चेतना’ के अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि राजेश चेतन ने किया। कार्यक्रम के प्रायोजक और स्वागताध्यक्ष के रूप में गोल्डन मसाले के निर्माता अनिल सिंघल मौजूद रहे। सेमिनार की अध्यक्षता एकल संस्थान की चेयरपर्सन मंजू श्रीवास्तव ने की। उन्होंने अपने संबोधन में भारत की उभरती वैश्विक भूमिका और सामाजिक संगठनों की सकारात्मक पहल पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में इस्कॉन रोहिणी के अध्यक्ष केशव मुरारी दास ने भी विशेष अतिथि के रूप में भाग लिया और समाज में धर्म, संस्कृति तथा शिक्षा के महत्व पर अपने विचार साझा किए। इसके अलावा रोहिणी के पूर्व विधायक जयभगवान अग्रवाल भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।


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