उत्तर प्रदेश/अनीशा चौहान/- उत्तर प्रदेश के सीतापुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान का एक संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह संदेश रामपुर जिला समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष द्वारा समाजवादी पार्टी के लेटर पैड पर जारी किया गया है। चिट्ठी में आजम खान ने जेल से एक महत्वपूर्ण संदेश भेजा है, जिसमें उन्होंने रामपुर के मुद्दे को संसद में उतनी ही मजबूती से उठाने की अपील की है, जितना कि संभल का मुद्दा उठाया जा रहा है।
रामपुर और संभल का मुद्दा: आजम खान की चिंता
आजम खान ने अपने संदेश में कहा कि समाजवादी पार्टी ने संभल के मुद्दे को संसद में जोरशोर से उठाया, लेकिन रामपुर के मुद्दे को अनदेखा कर दिया गया। उनका कहना था कि रामपुर में जो कुछ हुआ, उसके बाद ही संभल में इस प्रकार के घटनाक्रम हुए। उन्होंने इंडिया गठबंधन को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि इस गठबंधन ने रामपुर की बर्बादी पर खामोशी अपनाई और मुस्लिम नेतृत्व को खत्म करने की कोशिश की।
आजम खान ने इंडिया ब्लॉक से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर मुसलमानों के वोट का कोई मूल्य नहीं है और उनके वोट का अधिकार उनकी हत्या का कारण बन रहा है, तो इसे लेकर गहरे विचार की आवश्यकता है। उनका यह संदेश सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी पर सवाल उठाता है, क्योंकि समाजवादी पार्टी भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है।
मुसलमानों की स्थिति पर चिंता
आजम खान ने मुसलमानों पर हो रहे हमलों और उनकी मौजूदा स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर मुसलमानों के अधिकारों को इस प्रकार खत्म किया जाएगा, तो यह देश की दूसरी आबादी के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मस्थलों को विवादित बनाकर उन्हें समाप्त करना, यह केवल साजिश करने वालों की कार्यवाही हो सकती है।
समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन पर सवाल
आजम खान के संदेश में भले ही समाजवादी पार्टी का सीधे नाम न लिया गया हो, लेकिन उन्होंने इंडिया गठबंधन को ही निशाना बनाया है। इस संदेश से साफ दिखता है कि समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन के बीच दरार बढ़ रही है, और यह सवाल अब उठने लगा है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच बढ़ते मतभेदों का असर गठबंधन पर क्या होगा।
निष्कर्ष
आजम खान का यह संदेश न केवल समाजवादी पार्टी के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह इंडिया गठबंधन के भीतर बढ़ते राजनीतिक तनाव की ओर भी इशारा करता है। अब यह देखना होगा कि इस मुद्दे को लेकर दोनों दलों के बीच क्या बातचीत होती है और क्या यह दरार भविष्य में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का कारण बनेगी।


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